उपचुनाव समर में डटेंगे पार्टियों के मोर्चा पदाधिकारी

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भले ही प्रदेश में होने वाले 27 विधानसभा उपचुनाव कब होंगे यह भारत निर्वाचन आयोग ने अभी साफ न किया हो लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने अभी से अपने-अपने विभिन्न मोर्चा और प्रकोष्ठ पदाधिकारियों को चुनावों में सुनिश्‍चित जिम्मेदारियां देकर सक्रिय कर दिया है। उनके ये दस्ते अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए अपने-अपने अभियान को गति देने में भिड़ गए हैं। यदि कांग्रेस से विधायकों के भाजपा में जाने का सिलसिला आगे बढ़ता है तो फिर उपचुनावों की संख्या में कुछ और बढ़ोत्तरी हो जायेगी। भाजपा के अनुशांगिक संगठन पार्टी के निर्देशानुसार विधानसभा क्षेत्रवार प्रभारी और सह-प्रभारी बना चुके हैं जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रत्येक मोर्चा संगठन को उपचुनाव में 25-25 पोलिंग बूथों की जिम्मेदारी दी है।

इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिन बूथों पर जिन्हें जिम्मेदारी दी गयी है मोर्चा संगठन को वहीं रहकर काम करना है, इससे अलग हटकर काम नहीं करना है। मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता के अनुसार यही कारण है कि मोर्चा संगठनों को उनकी पसंद के अनुसार विधानसभा क्षेत्रों का काम दिया गया है ताकि जिन्हें जहां जिम्मेदारी दी गयी है वे वहीं डटे रहें। इन उपचुनावों में यह भी तय होना है कि प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली शिवराज सिंह चौहान सरकार बनी रहेगी या फिर से कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनेगी। जिन्हें जिन मतदान केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गयी है वहां पार्टी को जिताने के लिए भी उन्हें ही उत्तरदायी बनाया गया है। चुनाव परिणाम के बाद किसकी क्या परफार्मेंस रही इसका आंकलन होगा। कांग्रेस में एक प्रभारी होगा और उसकी देखरेख में सबको काम करना होगा। जिन 25 मतदान केंद्रों की जिम्मेदारी मिली है वहां कम से कम 20 केंद्रों पर यदि पार्टी को बढ़त मिलेगी तो इसी आधार पर संगठन मेें पद बांटे जायेंगे।

भाजपा के सभी प्रकोष्ठ इन उपचुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने मोर्चो को जिम्मेदारी बांट दी है और वे सभी काम में जुट गए हैं। इनका मुख्य काम कमलनाथ सरकार की विफलताएं और शिवराज सरकार की सफलताएं मतदाताओं तक पहुंचाना है। भाजयुमो ने ‘झूठ बोले कौवा काटे‘ की थीम पर 11 अभियान छेड़ रखे हैं और कमलनाथ तथा दिग्विजय सिंह जहां-जहां जायेंगे वहां-वहां मोर्चा इन दोनों नेताओं का घेराव करेंगे और उसका मुद्दा होगा कि चार हजार रुपये का बेरोजगारी भत्ता कमलनाथ सरकार ने क्यों नहीं दिया। हर पंचायत व बूथ स्तर पर 11-11 लोगों की टीम बनाकर मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में जोड़ने का काम चालू कर दिया गया है। महिला मोर्चे की भी कई टोलियां बनाई गयी हैं जो विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय हो गयी हैं। बूथ सेक्टर व मंडल स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। भाजयुमो व किसान मोर्चे ने विधानसभावार प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। किसान मोर्चा पिछली सरकार द्वारा किसानों से किए गए वायदों के पूरा नहीं होने की बात उठायेगा। इसी प्रकार अनूसूचित जाति मोर्चा, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मोर्चा भी सक्रिय हो चुके हैं।

और अन्त में…………

उपचुनावों में किसानों की कर्जमाफी एक अहम् मुद्दा होगा जिस पर आपस में भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे को किसानों के सामने कठघरे में खड़ा करने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगी। भाजपा ॠणमुक्ति के नाम पर उसके अनुसार हुए फर्जीबाडे़ को किसानों के बीच साबित करने का प्रयास करेगी तो कांग्रेस ने भी एक साल के अंदर 22 लाख से ज्यादा किसानों के जो कर्ज माफ किए हैं उसका सूची तैयार कर ली है। इनमें से अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनका 50 हजार तक का कर्ज माफ हुआ है और इनके बीच पहुंचकर कांग्रेस वीडियो तैयार कर रही है तथा इनके माध्यम से वीडियो को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों द्वारा सीधे किसानों तक 27 क्षेत्रों में पहुंचाने वाली है। वह किसानों को यह भी बतायेगी कि कर्जमाफी का दूसरा चरण प्रारंभ हो चुका था और तीसरे चरण की तैयारी थी जिसके बाद सभी किसानों का कर्ज माफ हो जाता लेकिन भाजपा ने उसकी सरकार गिरा दी इसलिए ऐसा नहीं हो पाया। कांग्रेस शिवराज सरकार से जोरशोर से मांग करेगी कि उनके द्वारा आरंभ की गयी जय किसान कर्जमाफी योजना को चालू रखा जाए। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुर्जर हर मतदान केंद्र पर किसान सैनिक तैनात कर रहे हैं और ये कर्जमाफी से जुड़े वीडियो जुटाकर अपलोड करेंगे तथा किसानों तक अपनी बात पहुंचायेंगे। शिवराज सरकार कर्जमाफी को एक बड़ा फर्जीबाड़ा साबित करने के लिए एक मंत्री समूह  गठित कर चुकी है। कृषि मंत्री कमल पटेल ज्यादा ही आक्रामक व मुखर हैं और किसानों का आह्वान कर रहे हैं कि जिन्हें कर्जमाफी के प्रमाणपत्र मिल गए हैं लेकिन कर्ज माफ नहीं हुआ वे पुलिस मेे रिपोर्ट दर्ज करायें, लेकिन फिलहाल अभी तक किसी ने पुलिस की शरण नहीं ली है, हो सकता है उपचुनाव आते-आते ऐसा भी हो जाए।

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