एक गिलास पानी मिलेगा?

 

प्‍यास लगते ही एक गिलास पानी मांग लेना और मांग के बदले एक गिलास पानी दे देना हमारी सामान्‍य दिनचर्या में शामिल है लेकिन सूखे की मार झेल रहे देश के करीब 54 करोड़ लोग पीने के लिए एक गिलास पानी देने की स्थिति में भी नहीं है। एक मटका पानी लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। देश का 39 प्रतिशत भूभाग तथा 40 प्रतिशत आबादी जल संकट से जूझ रही है। युवाओं को 13 राज्‍यों के 247 जिलों में सूखे की असलियत दिखाने के लिए चार संगठनों ने एक कार्यक्रम की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत उन्‍हें एक हफ्ते तक सूखा प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों के साथ रखा जाएगा और सूखे की मैदानी हालत दिखाई जाएगी। ये युवा वहां सूखे के सर्वे, जल संसाधनों का नक्‍शा तैयार करने तथा ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का काम करेंगे।

एकता परिषद के पीवी राजगोपाल, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय गठबंधन की मेधा पाटकर, जलबिरादरी के राजेंद्र सिंह और स्‍वराज अभियान के योगेन्द्र यादव ने अपने संगठनों के माध्‍यम से इस अभियान की घोषणा की है। इन संगठनों ने देश भर के युवाओं से आह्वान किया है कि सात दिन गांवों में गुजारें और सूखे व उसके कारण उत्‍पन्‍न संकट को करीब से देखें। इसके लिए देशभर के सूखा प्रभावित 247 जिलों में 25 केन्‍द्रों का निर्माण किया गया है। आवेदन मिलने के बाद इन युवाओं को इन केन्‍द्रों के माध्‍यम से गांवों में भेजा जाएगा। युवा गांवों में चयनित परिवारों के साथ रहेंगे और देखेंगे कि पानी न होने पर उनकी जिंदगी कितनी कठिन हो गई है।

एकता परिषद के राजागोपाल बताते हैं कि स्‍वतंत्रता के पहले तो सूखे के प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं थे, बाद में भी वही औपनिवेशिक मानसिकता जारी रही और सूखे के प्रबंधन हेतु कोई कानूनी ढांचा नहीं बना। पिछले दो दशकों में, सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत मिलने को कानूनी एवं संवैधानिक अधिकार माना गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। रोजी-रोटी का अधिकार एवं खाद्य सुरक्षा अधिनियम बनया गया लेकिन सूखे का प्रबंधन अब भी बड़ा प्रश्‍न बना हुआ है। पानी बचाने के बुनियादी संसाधनों तालाब, पोखर, नदी, बावड़ी, पानी के चैनल आदि को नष्ट किया गया है। अब हमारे पास ऐसा कोई प्रभावी तरीका नहीं है जिसके द्वारा वर्षा जल को संग्रहित किया जा सके और भूजल का स्तर बढ़ा सकें।

जन संगठनों ने सूखे को मुद्दा बना कर युवाओं को इन सबके प्रति संवदेनशील बनाने का काम शुरू किया है। इसी के तहत युवाओं से आवदेन मांगे जा रहे हैं ताकि वे गांवों में रह कर खुद जमीनी हकीकत देख सकें और इससे निपटने में सहयोग दे सकें। इस अभियान से जुड़ने के लिए 7065003180 पर संपर्क किया जा सकता है।

सात दिन गांव में, क्‍या करेंगे युवा

  1. सूखे से जुड़े तथ्य एकत्रित करेंगे। सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर ये पता लगाएंगे कि सूखा ग्रामीणों की ज़िन्दगी को किस स्तर पर और कितना प्रभावित कर रहा है। इस कार्य के लिए संगठनों ने प्रश्नावली तैयार की है।
  2. जल संसाधन के मानचित्र तैयार करेंगे।
  3. अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना। ग्रामीणों को उनसे जुड़े कानून और अधिकार की जानकारी देंगे।
  4. सूखा राहत के लिए कागज़ी कार्रवाई करने में ग्रामीणों की सहायता करेंगे।

 

 

 

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