कल लद्दाख जाएंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व सेना प्रमुख

चीन और पाकिस्तान एक साथ आकर भारत को घेरने में जुट गया है। हालांकि भारतीय सेना भी मुहतोड़ जवाब देने तैयार है। जानकारी के मुताबिक चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) में 20 हजार जवानों की तैनाती कर दी है। इतना ही नहीं, शिनजियांग में भी उसने 10 से 12 हजार जवान रोके हुए हैं, जो जरूरत पर जल्द सीमा पर पहुंच सकते हैं। लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच मौका देखते हुए पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में एलओसी के नजदीक सेना की दो डिविजनों को तैनात किया है। पाकिस्तानी सेना के एलओसी के नजदीक लगभग 20 हजार सैनिकों की तैनाती को भारत के ऊपर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान ऐसी हरकतें चीन के इशारों पर कर रहा है।
भारत ने भी उसी लेवल पर फोर्सेज तैनात की हैं ताकि चीन और पाकिस्तान को किसी भी हरकत का फौरन मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। तैयारियां परखने के लिए शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लेह जा रहे हैं। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी होंगे। जनरल नरवणे एक हफ्ते पहले भी लेह-लद्दाख का दौरा कर चुके हैं।

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन ने जिस तरह से आक्रामक रुख अपनाया है, उसे देखते हुए पूर्वी लद्दाख में सुरक्षा के ताजा हालात क्या हैं, राजनाथ इसका जायजा लेंगे। वह आर्मी चीफ की पिछले दौरे की तरह लद्दाख में कई फारवर्ड पोस्ट्स पर जा सकते हैं।
रक्षा मंत्री का यह दौरा चीन के लिए साफ संदेश होगा। चीन का कोई भी बड़ा सैन्य अधिकारी हेडक्वार्टर से निकलकर जिनझियांग में नहीं आया है। न ही उनके किसी मंत्री ने सैनिकों की सुधि ली है। जबकि भारत की तरफ से एयरफोर्स चीफ और आर्मी चीफ जवानों के बीच जाकर उनका हौसला बढ़ा चुके हैं। अब रक्षा मंत्री का वहां जाना जवानों के हौसले को और मजबूत करेगा। राजनाथ सिंह भी फारवर्ड पोस्ट्स पा जाकर सैनिकों से मुलाकात कर सकते हैं।
बॉर्डर से सटी गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, डेपसांग प्लेन्स और हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सेना ने आक्रामक तेवर दिखाए हैं। भारत की ओर से भी बॉर्डर एरियाज में चीनी तैनाती के बराबर सैनिक पोस्ट किए गए हैं। इसके अलावा चीन ने एलएसी के करीब इलाकों में जिस तरह से हथियार और युद्ध का साजोसामान जमा किया है, उसे देखते हुए भारत की तैयारी भी पूरी है।

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 23 जून को लेह के मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज करा रहे जवानों से मिले थे। इसके बाद वह लद्दाख के फारवर्ड बेसेज पर भी गए जहां मौजूद जवानों का उन्होंने हौसला बढ़ाया। जनरल नरवणे ने सैनिकों को भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर पूरी सेना उनके साथ खड़ी है।

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