कोरोना : उपचुनाव टले पर विधायकों का कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला जारी

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भारत निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोरोना काल में उपचुनाव नहीं होंगे और इस संबंध में कानून मंत्रालय को सर्टिफिकेट भी भेज दिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि 7 सितम्बर तक देश में कोई भी लोकसभा या विधानसभा के उपचुनाव नहीं होंगे, चुनाव कब होंगे इस सम्बंध में आयोग का कहना है कि कोरोना काल चलते तक उपचुनाव नहीं होंगे। फिलहाल मप्र में आगर मालवा क्षेत्र का उपचुनाव टल जाएगा लेकिन बाकी 26 विधानसभा क्षेत्रों मेंं उपचुनाव होंंगें या नहीं इस बारे में संशय बना हुआ है।

आज गुरुवार को कांग्रेस के खंडवा जिले के मांधाता से निर्वाचित विधायक नारायण पटेल ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है जिसे प्रोटेम स्पीकर रामेश्‍वर शर्मा ने स्वीकार कर लिया। इस प्रकार अब एक सीट और खाली हो गयी है। भारत चुनाव आयोग कि इस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उप चुनावों पर अभी कोई भी फैसला नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में 7 सितंबर के पहले उपचुनाव होंगे अथवा नहीं इसको लेकर 24 तारीख की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
 पटेल ने आज शाम भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। एक तरफ तो कोरोना संक्रमण टलने के बाद ही उपचुनाव होंगे तो दूसरी तरफ कांग्रेस और कितनी कोरोना की चपेट में आयेगी, इसको लेकर अब उसका चिंतित होना स्वाभाविक है। कांग्रेस का एक तरफ डेमेज कंट्रोल चल रहा है तो दूसरी ओर उसके विधायक एक-एक कर उसके हाथ से खिसक कर भाजपा की झोली में गिर रहे हैं। चुनाव टलने के बावजूद राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमावट करने और एक-दूसरे पर बढ़त लेने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देंगे। ये दल सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से इशारों ही इशारों में और कभी-कभी सीधे तौर पर आरोपों की तेज बौछार जारी रखेंगे। मनोवैज्ञानिक ढंग से कांग्रेस और भाजपा दलबदल का छौंक भी बीच-बीच में लगाते रहेंगे।

कांग्रेस के 25 विधायक विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं तो कांग्रेस ने भाजपा के कुछ पुराने नेताओं को अपने दल में मिलाना चालू कर दिया है। शिवराज सरकार में मंत्री रहे गुना जिले के के.एल. अग्रवाल आज अपने साथियों सहित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के सामने कांग्रेस की सदस्यता ले चुके हैं और उन्हें बम्होरी से उम्मीदवार बनाये जाने का संकेत भी मिल गया है। अग्रवाल को कांग्रेस में शामिल करने का उत्साह परवान चढ़े इससे पूर्व ही भाजपा ने उसके एक और विधायक को तोड़कर इस पर घड़ों पारी उड़ेल दिया है। अग्रवाल के साथ लगभग एक हजार भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस की सदस्यता लेने का दावा किया जा रहा है लेकिन इसे भाजपा के लिए कोई झटका नहीं माना जा सकता, क्योंकि राजनीतिक तौर पर भाजपा से अग्रवाल का तलाक 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व ही हो चुका था जब उन्होंने निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ा। यह बात अलग है कि जिस समय वे सदस्यता ले रहे थे लगभग उसी समय यह खबर भी आई कि चुनाव आयोग ने कोरोना काल तक उपचुनाव नहीं होने का ऐलान कर दिया। कम्प्यूटर बाबा ने फिर से कांग्रेस के पक्ष में मोर्चा संभालने की बात कहते हुए लोकतंत्र बचाओ यात्रा शुरु करने की बात कही है तो मिर्ची बाबा फिर से धूनी रमाने वाले हैं। कम्प्यूटर बाबा पहले भाजपा में थे, शिवराज ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, बाद में बाबा नाराज हो गये और विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस के लिए जमकर प्रचार किया तथा साधुओं एवं बाबाओं को उसके पक्ष में उतार दिया। कांग्रेस को भी शायद लगा कि उसकी सरकार बनाने में कम्प्यूटर बाबा का योगदान है इसलिए उन्हें फिर से एक सरकारी पद देते हुए केबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया। सरकार गिरते ही बाबा का जलबा खत्म हो गया। कम्प्यूटर बाबा ने कहा है कि जिन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है वहां लोकतंत्र बचाओ यात्रा शुरु करेंगे लेकिन उपचुनाव वाली सीटों की संख्या बढ़ती जा रही है।

उपचुनाव कोरोना संक्रमण के कारण टाले गये हैं इसलिए कांग्रेस अचानक आक्रामक हो गयी है और पूर्व मंत्री विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों को आइसोलेट हो जाना चाहिए क्योंकि कल मंत्रि परिषद की बैठक में भाग लेने वाले सहकारिता मंत्री कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं। उन्होंने भोपाल में अचानक लगाये जाने वाले लॉकडाउन पर भी सवाल उठाये तथा आरोप लगाया कि भाजपा उपचुनाव से डर रही है इसलिए उपचुनाव टल रहे हैं। सहकारिता मंत्री अरविन्द भदौरिया ने भी उनके संपर्क में आये लोगों से कोरोना टेस्ट कराने व सतर्कता बरतने का अनुरोध किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत ने अपने दो दिन के सभी राजनीतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं क्योंकि वे भदौरिया के साथ लखनऊ गये थे। पूर्व मंत्री विधायक पीसी शर्मा ने प्रदेश में कोरोना के फैलाव को लेकर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार इसको रोकने में बुरी तरह विफल रही है। उन्होेंने यह भी आरोप लगा दिया कि प्रदेश में भाजपा की रैलियों के कारण कोरोना तेजी से फैल रहा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ने को लेकर कांग्रेस नेता अलग-अलग तर्क दे रहे हैं और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि संक्रमण के पीछे भाजपा सरकार द्वारा महामारी में निरन्तर चलाया जा रहा ट्रांसफर उद्योग जिम्मेदार है। प्रदेश में संक्रमण के फैलने का असली कारण यही है, क्योंकि जिलों में जो अधिकारी ठीक ढंग से काम कर रहे थे उन्हें हटा दिया गया और एकदम से नये अधिकारियों को पदस्थ कर दिया गया, जिन्हें जिलों का जरा भी अनुभव नहीं था, उन्हें जिलों को समझने में समय लगा और तेजी से कोरोना फैल गया जिस पर ये नये-नवेले अधिकारी नियंत्रण नहीं कर पाये।


और अन्त में …………………!

कांग्रेस सोशल मीडिया के माध्यम से कमलनाथ की एक हनुमान भक्त और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजापाठ करने वाले व्यक्ति की छबि बना रही है। वह लोगों की आस्था के धार्मिक स्थलों के उन्नयन और विकास के लिए किए गये कार्यों का हवाला भी दे रही है। कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष सैयद जाफर ने एक ट्वीट में कहा है कि भगवान श्रीराम के वनवास गमन का मार्ग हमारे मध्यप्रदेश से होकर गुजरता है, “राम वनगमन पथ“ को कमलनाथ सरकार ने बनाना आरम्भ किया था। उन्होंने छोटे से कार्यकाल में हमारे मंदिर, धार्मिक स्थान तथा पवित्र नदियों के संरक्षण, विस्तार व उन्नयन एवं निर्माण के लिए जो कदम उठाये वे अतुलनीय हैं।  

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