दिग्विजय, ज्योतिरादित्य और सुमेर सिंह पहुंचे राज्यसभा, राज्यसभा चुनाव में भाजपा को धीरे से लगा जोर का झटका

सुबह सवेरे, भोपाल
जैसी की संभावना थी चुनाव नतीजे वैसे ही निकले। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह 57 भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया 56 और भाजपा के ही सुमेर सिंह सोलंकी 55 वोट प्राप्त कर राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हुए। भाजपा को राज्यसभा चुनाव में धीरे से जोर का झटका उस समय लगा जब उसके दो वोट निरस्त हो गए। दलित के मुद्दे पर भाजपा की पूरी रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की घेराबंदी की रही लेकिन उल्टे उसकी ही फजीहत हो गई जब उसे जो 2 वोट कम मिले वह दोनों विधायक अनुसूचित जाति के है। सूत्रों के अनुसार संगठन ने दोनों विधायकों की खिंचाई भी की है लेकिन इस समय जिस प्रकार का संख्या बल है उसको देखते हुए इसकी उम्मीद कम है कि भाजपा कोई कड़ी कार्रवाई करेगी।
भाजपा के अंदरखाने जो असंतोष की बातें चल रही थीं और भाजपा उस पर नियंत्रण पाने का दावा कर रही थी वह बात खुलकर सतह पर आ गई कि पार्टी के अंदर सब कुछ सही नहीं चल रहा और अभी भी कुछ असंतोष बाकी है। एक विधायक गुना जिले के गोपीलाल जाटव हैं जिन्होंने स्वीकार किया है कि उनसे गलती हो गई। जाटव ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए चुनाव परिणामों की घोषणा के पूर्व ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव जीतने की बधाई सोशल मीडिया पर पोस्ट कर डाल दी। लगता है कि रणनीति के तहत अनुसूचित जाति के दोनों विधायकों ने पार्टी को अपनी नाराजगी से अवगत करा दिया और सफाई भी दी थी। भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी में ऐसा होना सामान्य नहीं माना जा सकता उस परिस्थिति में जबकि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे और जयंत पांडा विधायकों को एकजुट करने के लिए राजधानी में डेरा डाले रहे। डिनर और लंच के दौर हुए। विधायकों के लिए संभागीय प्रभारी बने उन्हें प्रशिक्षण दिया गया और जिन दो विधायकों के वोट भाजपा को नहीं मिले वह दोनों ही अनुभवी पुराने विधायक है। दोनों ही विधायक किसी ना किसी बात को लेकर नाराज चल रहे थे शायद इसलिए उन्होंने अपना संदेश भी दे दिया और सफाई भी दे दी। दिलचस्प बातें यह रहीं कि सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों के मत तो भाजपा को मिले लेकिन उसके अपने विधायकों के 2 मत निरस्त हो गए। कांग्रेस पार्टी अपने एक निर्दलीय विधायक सहित 93 मत पाने में सफल रही जबकि भाजपा का यह दावा कि कांग्रेस में असंतोष है और वह इस उम्मीद में रही कि कांग्रेस में कुछ सेंध लगेगी वैसा नहीं हो पाया। अभी उपचुनाव और मंत्रिमंडल विस्तार की दो चुनौतियों का भाजपा को सामना करना है और अपने घर में पनप रहे असंतोष को भी दबाना है। कांग्रेस के फूल सिंह बरैया को 36 मत मिले। निर्दलीय और सपा, बसपा विधायकों के मत भाजपा को मिले हैं। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत विश्‍वास प्रस्ताव का समर्थन किया था। चुनाव नतीजों की घोषणा के साथ ही समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला पर गाज गिर गई और उन्हें पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया क्योंकि उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को वोट दिया था।

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