नई शिक्षा नीति को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मानव संसाधन मंत्रालय का नाम अब शिक्षा मंत्रालय होगा

मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। अब मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक व सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 34 साल बाद भारत की नई शिक्षा नीति आई है। स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। मानव संसाधन मंत्रालय को अब फिर से शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। शुरुआत में इस मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही था लेकिन 1985 में इसे बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय नाम दिया गया था। जावड़ेकर ने नई शिक्षा नीति को ऐतिहासिक बताया तो पोखरियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के बाद भारत ज्ञान की महाशक्ति बनकर उभरेगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षा नीति को लेकर 2 समितियां बनाई थीं। एक टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और दूसरी डॉ. के कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि सवा 2 लाख सुझाव आए थे।

 नई शिक्षा नीति की मुख्य बातें
– जीडीपी का कुल 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य तैयार किया गया है। फिलहाल भारत की जीडीपी का 4.43 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है। 

– मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।

– अगर आप किसी पारिवारिक समस्या या फिर किसी अन्य कारण से पढ़ाई को बीच सेमेस्ट में छोड़ते हैं तो अब मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम के तहत अगर आपने एक साल पढ़ाई की है तो सर्टिफिकेट, दो साल बाद डिप्लोमा और तीन या चार साल के बाद डिग्री दी जाएगी। यानी आप अधूरी पढ़ाई का भी कहीं इस्तेमाल कर सकते हैं।

– रिसर्च में जाने वालों के लिए भी नई व्यवस्था की गई है। उनके लिए 4 साल के डिग्री प्रोग्राम का विकल्प दिया जाएगा। यानी तीन साल डिग्री के साथ एक साल एमए करके एम फिल की जरूरत नहीं होगी। इसके बाद सीधे पीएचडी में जा सकते हैं। 

– मल्टीपल डिसिप्लनरी एजुकेशन में अब आप किसी एक स्ट्रीम के अलावा दूसरा सब्जेक्ट भी ले सकते हैं। यानी अगर आप इंजीनियरिंग कर रहे हैं और आपको म्यूजिक का भी शौक है तो आप उस विषय को भी साथ में पढ़ सकते हैं।

– नेशनल टेस्टिंग एजेंसी हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को एक एंट्रेंस एग्जामिनेशन ऑफर करेगी, ताकि बच्चे एक कॉमन एग्जाम से यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले सकें। ये हायर एजुकेशन के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन होगा।

– लीगल और मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का संचालन सिंगल रेग्युलेटर के जरिए होगा।- कहा गया है कि पांचवी कक्षा तक स्कूलों में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाए। हो सके तो इसी तरह 8वीं तक पढ़ाया जाए।

– छठी कक्षा के बाद से ही वोकेशनल एजुकेशन की शुरुआत।

– सभी सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक तरह के मानदंड होंगे।

– टीचर्स के लिए एक नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड तैयार किया जाएगा। जिससे टीचर्स का रोल क्या है और उन्हें किस बेंचमार्क तक पहुंचना है ये तय किया जाएगा।

– स्कूली बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में तीन तरह के मूल्यांकन होंगे। जिसमें पहला मूल्यांकन बच्चा खुद करेगा, दूसरा उसके सहपाठी करेंगे और तीसरा टीचर्स करेंगे। इस रिपोर्ट कार्ड में बच्चे की लाइफ स्किल पर भी हर बार चर्चा होगी।

– बोर्ड एग्जाम में हर सब्जेक्ट को दो लेवल पर भी ऑफर किया जा सकता है। बोर्ड एग्जाम के लिए कहा गया है कि इसमें सिर्फ नॉलेज टेस्ट की जाए। जो रटकर याद किया गया है उसे टेस्ट नहीं किया जाए। उन चीजों को इस एग्जाम में टेस्ट करें जो रोजमर्रा की चीजों में छात्र इस्तेमाल करेंगे।

– अमेरिका की एनएसएफ (नेशनल साइंस फाउंडेशन) की तर्ज पर यहां एनआरएफ (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) लाया जाएगा।

– एनआरएफ में विज्ञान के साथ सामाजिक विज्ञान भी शामिल होगा। ये बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा। ये शिक्षा के साथ रिसर्च में हमें आगे आने में मदद करेगा।

– हिंदी और अंग्रेजी भाषा के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कोर्स होगा। वर्चुअल लैब के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।

– राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 के 15 वर्ष हो गए हैं,अब नया पाठ्यचर्या आएगा। शिक्षक शिक्षा के पाठ्यक्रम के भी 11 साल हो गए हैं, इसमें भी सुधार होगा।

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