पीवी सिंधु के ‘गोपी’ ने अब उड़ाई मप्र की ‘शटल’

  • देश को पीवी सिंधु देने वाले पुलैला गोपीचंद से विवाद निपटा, रीते रहे तीन साल

रियो ओलम्पिक में रजत पदक जीतने वाली पीवी सिंधु और उसके पहले लंदन ओलम्पिक में कांस्‍य पदक जीतने वाली साइना नेहवाल या विश्‍व के पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी श्रीकांत किदम्‍बी हो या दुनिया के नंबर छह खिलाड़ी रहे पी. कश्‍यप । बैडमिंटन खेलने के अलावा इन भारतीय खिलाडि़यों की एक समानता यह है कि इन सभी के गुरु बैडमिंटन के स्‍टार पुलैला गोपीचंद हैं। इन्‍हीं गोपीचंद ने मप्र के बैडमिंटन के खिलाडि़यों को सही दीक्षा देने के लिए कोच बनना स्‍वीकार किया है और उनके साथ हुए समझौते के बाद खेल विभाग ने 8 सितंबर 2013 को ग्‍वालियर में बैडमिंटन अकादमी आरंभ की है। दुर्भाग्‍य है कि व्‍यस्‍तता के चलते गोपी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए और अब तक यह अकादमी भगवान भरोसे ही रही। अब तमाम चर्चाओं के बाद गोपी ने खेल विभाग की सुनी और अपने एक कोच को पिछली माह अकादेमी में भेजा है। अब उम्‍मीद है कि तीन सालों से बैडमिंटन कोर्ट का सन्‍नटा टूटेगा और यहां के होनहार सितारे तमगों की चमक बिखराएंगे।

2013 में ग्‍वालियर की बैडमिंटन अकादमी का शुभारंभ करते हुए मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि प्रदेश सरकार खेलों के क्षेत्र में ‘‘मिशन-2020’’ के लक्ष्य को लेकर चल रही है। इसके तहत प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को अभी से तराश कर ऐसा बनाएंगे, जिससे सन् 2020 के ओलंपिक में न केवल मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व हो बल्कि हमारे खिलाड़ी स्वर्ण पदक भी जीतकर लाएं। चौहान का यह भरोसा बैडमिंटन में इस लिए था क्‍योंकि खेल विभाग ने जी तोड़ प्रयास कर सर्वाधिक चर्चित कोच पुलैला गोपीचंद को अपनी अकादमी से जोड़ा था। इस में खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का अहम् योगदान रहा है। अकादमी आरंभ हुई, बच्‍चों का चयन हुआ लेकिन गोपीचंद नहीं आए। सूत्रों के अनुसार भारतीय टीम के कोच होने के कारण वे शर्तों में बंधे थे इसलिए बिना पैसे लिए मप्र की बैडमिंटन अकादमी का कोच बनना स्‍वीकार किया लेकिन वे यहां समय नहीं दे पाए। उन्‍होंने प्रस्‍ताव दिया कि मप्र अपने चयनित खिलाडि़यों को उनकी हैदराबाद स्थिति अकादमी में प्रशिक्षण के लिए भेज दे। लेकिन ऐसा करने पर ग्‍वालियर में अकादमी चलाने का उद्देश्‍य पूरा नहीं हो रहा था। गोपीचंद के न आने से अकादमी के कोर्ट में सुस्‍ती छाई रही। अंतत: संवाद किया  गया और तय हुआ कि गोपीचंद अपने दो प्रशिक्षकों को ग्‍वालियर भेजेंगे जो अकादमी का संचालन करेंगे। लेकिन गोपी ने कहा कि वे दो कोच एक साथ नहीं भेजेंगे बल्कि एक-एक कर क्रमिक रूप से कोच भेजेंगे। इस पर भी आपत्तियां उठीं लेकिन बाद में इस शर्त के साथ सुलह हुई कि गोपी एक-एक कोच भेजेंगे और उसी अनुसार खेल विभाग प्रत्‍येक कोच को प्रतिमाह 40 हजार का पारिश्रमिक प्रदान करेगा।

जुलाई में आए गोपी के विष्‍णु

इस तरह 2016 में ग्‍वालियर के कंपू स्थित जिला खेल परिसर में चल रही बैडमिंटन अकादमी में नवीन सत्र के लिए 20 बच्चों का चयन किया गया। ये सभी बच्‍चे अंडर 13 आयु वर्ग के हैं। इन्‍हें मुख्‍य कोच गोपीचंद द्वारा भेजे गए सहायक कोच विष्णु कुमार प्रशिक्षित कर रहे हैं। तय किया गया है कि गोपीचंद समय-समय पर अकादमी में आ कर प्रशिक्षण की समीक्षा करेंगे और बच्चों को भी समय-समय पर हैदराबाद में संचालित उनकी बैडमिंटन अकादमी में भेजा जाएगा।

6 करोड़ के आरंभ हुई अकादमी

अकादमी के निर्माण पर आरंभ में सवा 6 करोड़ रूपए की राशि खर्च की गई थी। प्रथम चरण में बैडमिंटन अकादमी में 4  प्रैक्टिस कोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से परिपूर्ण 2 हवाई कोर्ट का निर्माण किया गया है। इस अकादमी के निर्माण में खेलतंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सांसद रहते अपनी सांसद निधि से साढ़े चार करोड़ से अधिक रूपए की राशि मुहैया करवाई थी।

 

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