मप्र : 3 लाख बच्‍चों का पेेट भरना था, भर दिया टैक्‍स

मार्च अंत में हर किसी की कोशिश होती है कि वह किसी तरह आयकर में छूट पा जाए। इसके लिए तमाम तरह के निवेश किए जाते हैं, खर्च गिनाए जाते हैं लेकिन मप्र के महिला एवं बाल विकास विभाग ने तो एक कदम आगे जा कर तीन सालों तक वह टैक्‍स भरा जो उसे भरने ही नहीं था। उसे तो पोषण आहार में वेट टैक्‍स भरने से छूट मिली हुई थी। विभाग ने तीन सालों के दौरान 196.56 करोड़ का वेट टैक्‍स भरा जबकि उसे टैक्‍स में छूट का दावा करना था। टैक्‍स में भरी गई इस राशि का हिसाब लगाए तो पता चलता है कि विभाग इतनी राशि से 3 साल तक 3 लाख बच्‍चों को पोषण आहार प्रदान कर सकता था। यह असल में बजट आवंटन और उसके खर्च पर विभागों द्वारा बरती जा रही लापरवाही का नमूना है, जो सरकारी कार्यप्रणाली को उजागर करता है।

मामला कुछ यूं है कि एकीकृत बाल विकास योजना के तहत पोषण आहार वितरण के लिए केन्‍द्र सरकार आधा पैस देती है। आधा राशि राज्‍य सरकार मिलाती है। इस राशि का उपयोग पोषण आहार खरीदने और बच्‍चों को प्रदान करने में किया जाता है। आयुक्‍त एकीकृत बाल विकास विभाग ने 4 जून 2008 को एमपी एग्रो इंडस्‍ट्री डेवलपमेंट कार्पोरेशन से पोषण आहार खरीदने का अनुबंध किया था। यह अनुबंध कैबिनेट तथा मुख्‍यमंत्री द्वारा गठित समिति द्वारा लिए गए निर्णय के पालन में किया गया था। तय अनुबंध के अनुसार एमपी एग्रो ने मार्च 2012 तक पोषण आहार प्रदान किया। एमपी एग्रो द्वारा मिला पोषण आहार आंगनवाड़ी केन्‍द्रों से टेक होम राशन की तरह बांटा गया। अनुबंध हुआ था कि एमपी एग्रो बीपीएल दर पर महिला एवं बाल विकास विभाग को गेहूं और चावल उपलब्‍ध करवाएगा तथा इसकी कीमत मप्र या केन्‍द्र सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक नहीं होगी। इस अनुबंध में किसी प्रकार के टैक्‍स के भुगतान की शर्त नहीं थी।

एमपी एग्रो ने मई 2009 में महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित किया कि उसके द्वारा प्रदाय की जाने वाली सभी सामग्री पर 12.5 प्रतिशत की दर से वेट टैक्‍स देना होगा। इस पत्र में यह भी बताया गया था कि वेट टैक्‍स में छूट का प्रस्‍ताव वाणिज्‍यकर विभाग को मई 2009 में ही भेजा जा चुका है। कैग ने अपने ऑडिट में पाया कि आयुक्‍त एकीकृत बाल विकास विभाग ने अप्रैल 2010 से मार्च 2013 के बीच 4.60 लाख मीट्रिक टन पोषण आहार खरीदा। इस आहार की कीमत 1708.56 करोड़ थी। टेक होम राशन की इस कीमत के बदले 13 प्रतिशत की दर से 196.56 करोड़ का वेट टैक्‍स दिया गया।

विभाग चाहता तो कल्‍याणकारी योजना के अंतर्गत महिला एवं बच्‍चों के लिए प्रदाय की गई खाद्य सामग्री पर वेट टैक्‍स में छूट का दावा कर सकता था। कैग का मानना है कि जिस पोषण आहार पर टैक्‍स भरा गया वह स्‍व सहायता समूहों द्वारा आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर प्रदाय किए जाने वाले पके भोजन की श्रेणी का है। पके भोजन को वेट से छूट मिली हुई है। विभाग इस आधार पर छूट का दावा कर सकता था। यह दावा नहीं करने के कारण कैग ने माना कि पोषण आहार प्रदान करने की योजना में 196.56 करोड़ की हानि हुई है।

हालांकि तत्‍कालीन प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग ने वेट टैक्‍स भरने को सही करार देते हुए कहा है कि केन्‍द्रांश पर वेट लागू था और वाणिज्‍य कर आयुक्‍त द्वारा जुलाई 2013 में जारी आदेश के अनुसार ही टैक्‍स भरा गया। हालांकि यह माना गया कि एमपी एग्रो द्वारा प्रदान की गई खाद्य सामग्री पर वेट से छूट का निर्णय विचाराधीन था। कैग ने इस उत्‍तर को संतोषप्रद नहीं माना है। उसका कहना है कि वेट टैक्‍स राज्‍य सरकार ले रही थी। अत: इसमें छूट पाई जा सकती थी लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। इस लापरवाही के कारण पोषण आहार वितरण राशि में 196.56 करोड़ की हानि हुई। विभाग के पास यह पैसा होता तो वह अगले तीन सालों तक 3 लाख बच्‍चों को पोषण आहार प्रदान कर सकता है।

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