माननीय, एक बार मुझे भी किसी तरह ‘मंत्री’ बना दीजिए…..

माननीय मुख्यमंत्रीजी, सा.वंदे। यह बंदा आपके ही पार्टी का एक अदना सा नुमाइंदा है। आपको यह बताते हुए मुझे बहुत हर्श हो रहा है कि अपनी पार्टी में मेरी सिनियॉरिटी के कार्यकर्ता’ ’पार्षद” लेवल तक  पहुंच गए है। जब मैंने आपका चमत्कार देखा तो अभिभूत हो गया कि आपने अपने राज्य में ऐसे 14 लोगों को ‘मंत्री’ बना दिया,जो अभी ‘विधायक’ भी नहीं है। यह आपका अद्भुत कार्य देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और मुझे भी उससे एक प्रेरणा मिली। इसी प्ररणा से प्रेरित होकर मैं आपसे सविनय विनम्र निवेदन कर रहा हूं कि माननीयजी, मुझे भी मात्र कुछ ही दिनों के लिए अपने राज्य में मंत्री बना दीजिए।

जब एक दूसरे राज्य(महाराष्ट्र) में एक व्यक्ति  बिना विधायक बने ही  कुछ दिन ‘मुख्यमंत्री’ बना रह सकता है,( ये बात अलग है कि अब कुछ महीनों बाद उन्होने वहां की ‘विधान परिषद’ की सदस्यता ले ली) तो फिर आपके लिए मुझे मंत्री बनाना क्या मुश्किल काम है? आपने देखा होगा कि बहुत से अखबारों में किसी व्यक्ति को ‘कभी विशेष अवसर’ पर ‘अतिथि संपादक’ बनाने की प्रथा होती है। जब एक गैर पत्रकार व्यक्ति ‘अतिथि संपादक’ बन सकता है, तो मुझ जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता को मंत्री बनाने में आपको कौन दिक्कत दे सकता है  भला?

माननीय, दरअसल मैं आपसे मंत्री बनाने का निवेदन इसलिए कर रहा हूं कि मेरी 95 वर्षीय  माताजी का एक स्वप्न है कि वे मुझे कम से कम एकबार ‘मंत्री’ बना देखना चाहती है।  सर, जब अकबर बादशाह अपने बेटे की आन रखने के लिए ‘अनारकली’ को महज एक रात के लिए ‘महारानी’ बना सकते है, तो आप मेरी माताजी की एक अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए इतना तो कर ही सकते है!

माननीय, मैं आपसे वादा करता हूं कि यदि आप मुझे ’कुछ ही  दिनों  के लिए’ मंत्री बनाए तो मंत्री रहने के दौरान न तो मैं किसी को  कोई बड़े ठेके बाटूंगा और न ही कोई ‘कमीशनबाजी’  का कार्य ही करूंगा। मैं एक मघ्यमवर्गीय  आदमी हूं और यह भली भांती जानता हूं कि मेरा जन्म पैसा कमाने के लिए नहीं हुआ है, अन्यथा गत 25 वर्शों से क्या मैं केवल पार्टी कार्यकता  ही रहता?

माननीय, मैं जानता हूं कि यदि आप मुझे ‘मंत्री’ बनाते हेै तो बहुत से कुछ दूसरे लोग, जिन्हे मंत्री पद नहीं मिला, वे आपसे असंतुष्ट होकर आप पर नाराज  हो जाएंगे। सर, वैसे भी राजनीति मं आज तक कब कौन सबको संतुष्ट कर पाया है?  आज भी कुछ लोग जिन्हे मंत्री पद की लालसा थी, वे असंतुष्ट होकर बैठे ही है न? फिर मेरे एक अकेले को मंत्री बना देने से उसमे  क्या फर्क पड़नेवाला है? यदि आप मुझे मंत्री बना दे तो  आपको मेरी 95 वर्षीय माताजी का आर्शीवाद ही मिलना है और उसका सकारात्मक प्रभाव आपको प्रदेश में होने वाले 24 विधानसभा उपचुनाव में देखने को मिलेगा ही।

माननीय, यदि आपको मुंझे मंत्रीपद देना संभव न हो तो इतना भर कीजिए कि मुझे किसी ‘हाऊसिंग  बोर्ड’ या ‘प्राधिकरकण’ का ’अध्यक्ष’ बनाकर ‘ राज्यमंत्री का दर्जा’ ही दे दीजिए। फिर तो मेरे ‘ विधायक’ न होने की अड़चन भी बाधा नहीं  बनेगी।  मैं ‘बिना  वेतन और भत्ते’ लिए और यहां तक कि ‘बिना विभाग का मंत्री’  बनने के लिए भी तैयार हूं।

माननीय,  मेरे मंत्री बनने के पीछे मेरी  एक अभिलाषा इतनी भर है कि -मंत्री बनने के बाद मैं अपने घर के  सामने प्रतिष्ठा पूर्वक  शान से अपने नाम के साथ ‘मंत्री पद’ की पाटी’ टांग संकू। आशा है ,आप मेरी इस अर्जी पर गौर फरमाकर मेरी एक अदनी सी इच्छा पूरी करेंगें। फिर सर, यह मंत्री पद मैं  केवल कुछ ही दिनों के लिए तो मांग रहा हूं न!

-डॉ. विलास जोशी

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