मुझे मालवा के किसान की समझ पर हैरानी हुई थी उस समय

यूँ तो बात बहुत पुरानी है पर सन्दर्भ उसका नया ही है। उन दिनों मैं नीमच में सीईओ जिला पंचायत हुआ करता था। नीमच जाने का भी बड़ा दिलचस्प संयोग था , तब नीमच के कलेक्टर थे  प्रभात पराशर जो पहले कभी उज्जैन में जिला पंचायत में यही दायित्व सम्हाल चुके थे। एक बैठक में वे उज्जैन आये , बैठक के बाद हम सब यूँ ही चर्चा कर रहे थे तभी उन्होंने पास में खड़े  ए के सिंह से कहा ,  मैं अपने जिले में एक सी ई ओ खोज रहा हूँ आप चाहो तो नीमच चलो ।

ए के सिंह उन दिनों उज्जैन में ही सीईओ जिला पंचायत थे और मैं एडीएम । मैं पास ही खड़ा उनकी वार्ता सुन रहा था। सिंह साहब कहने लगे की मुझे तो दिक्कत होगी क्योंकि मेरी धर्मपत्नी उज्जैन के कॉलेज में पढ़ा रही हैं और मेरे जाने से उनका भी ट्रांसफर करना पड़ेगा पर आप चाहो तो शर्माजी को ले जाओ इन्हे यहाँ काफी दिन भी हो चुके हैं। उन्होंने मुझसे कहा चलोगे ? नीमच में मैंने सीएओ का नया बंगला खाली रख रखा है। मैंने हामी भर दी और कुछ ही दिनों में मेरा तबादला नीमच हो गया , ये और बात है कि संयोग से बड़ी जल्द ही इसके बाद मैं ग्वालियर चला गया पर इसकी बात फिर कभी।

नीमच में पदस्थापना के दौरान एक दिन हम ग्रामीण क्षेत्र के दौरे पर गए , साथ में ग्रामीण विकास के अधिकारीगण भी थे। निर्माण कार्यों के निरीक्षण के बाद ग्रामपंचायत के सरपंच महोदय बोले कि साहब घर चलें ,चाय पी लें। मैंने कुछ झिझक जाहिर की , क्योंकि पुराने समय में हमें सिखाया जाता था कि दौरे पर जाओ तो किसी के घर जाने से बचना चाहिए , पर साथ चल रहे जनपद सीईओ ने कहा कि ये सरपंच महोदय विवादों से परे और भले मनुष्य हैं तो मैं तैयार हो गया। घर पहुंचे तो मैंने देखा घर क्या आलीशान बंगला था , पूरे घर में मकराना का संगमरमर फर्श पे लगा था। बैठक में चाय पीने का इंतजार कर रहे थे तो मैंने महसूस किया घर में चारों ओर से लहसुन की महक आ रही थी , सरपंच जी समझ गए , बोले क्षमा करें फसल घर में भर रखी है।

मैंने आश्‍चर्य से पूछा की इतने आलीशान मकान में आपने लहसुन भर रखा है ? सरपंच जी बोले इसी लहसुन से तो आलीशान मकान बना है। हम सब हँस पड़े फिर बातों- बातों में मैंने कहा कि होशंगाबाद और नरसिंहपुर के किसान भी खेती में काफी उन्नतिशील हैं तो सरपंच जी बोले हैं तो सही पर पिछड़े हैं , गेंहू चना ही उगाते हैं नगदी फसल नहीं कर पाते। मुझे उस समय मालवा के किसान की समझ पर हैरानी हुई थी और जब मैं सागर मैं कमिश्‍नर हो कर पहुंचा तो धान के उपार्जन के दौरान पता चला कि इस इलाके के किसान छिटका पद्धति से धान बोते हैं और बीज की किस्म ऐसी है कि पैदावार को उपार्जन के लिए लेने में पसीना आ जाता है।

तब दमोह के कलेक्टर तरुण राठी से मैंने कहा था की इस बार हम प्रयास कर बीज परिवर्तन कराएँगे। ईश्‍वर जाने वो हो पाया या नहीं पर इस बीच मेरा तबादला उज्जैन हो गया और पिछले हफ्ते रतलाम के दौरे पर जब मैं गया तो यह सन्दर्भ उपस्थित हुआ जिससे मुझे ये सब पुरानी यादें ताज़ा हो आईं। हमारी रतलाम की कलेक्टर रुचिका चौहान ने मुझे जावरा तहसील के गौशाला निरीक्षण के रस्ते में पड़ने वाले रियावन ( पिपलोदा ) ग्राम में दो नौजवान कृषक युवकों द्वारा संचालित नर्सरी दिखाई जो अब तक देखी गयी नर्सरियों से एकदम भिन्न थी। भिन्नता ये थी की स्ट्राबैरी , अंजीर और अंगूर के पौधों सहित टमाटर और पालक के पौधे जमीन में नहीं बल्कि हवा में लटक रहे पाइप में पैदा हो रहे थे। रविंद्र धाकड़ नाम का यह नवयुवक बी कॉम पढ़ा है पर पुश्तैनी खेती का व्यवसाय होने से कुछ नया करने की सोच रखता था।

हाइड्रोपोनिक पद्धति नामक यह खेती प्रणाली वह इजरायल से सीख कर आया है। अब इसमें उसका भाई जो सरकारी नौकरी में वैज्ञानिक का काम कर चुका है , नौकरी छोड़ कर उसका हाथ बंटाता है। रविंद्र ने मुझे बताया कि नारियल की जटा से बनाये गए चूरे निर्मित छोटी कटोरी नुमा बर्तन में पौधा लगाया जाता है और पाइप में उसे फंसा दिया जाता है। पाइप में ही पानी छोड़ा जाता है उसमे आवश्यकता अनुरूप पोषक तत्व ( न्यूट्रिशंस ) मिलाये जाते हैं। पौधा स्वयं आवश्यकता अनुरूप इन्हे जड़ों से ले लेता है और इस तरह ऑर्गनिक कृषि की जाती है। उन्होंने मुझे बताया कि इजरायल में जमीन की कमी है और इस कारण वहां इस प्रकार से हवा में खेती करते हैं। भारत के शहरी क्षेत्रों से लगे कृषकों के लिए ये पद्धति उपयोगी है। उन्होंने यह भी कहा की आजकल प्रदूषण से बागवानी फसलें और फल की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं इस पद्धति से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी बल्कि कम स्थान पर छोटे किसान भी अपनी गुजर बसर कर सकेंगे। धाकड़ नर्सरी के नाम से विकसित इस फार्महाउस से वे सालाना इतनी आय लेते हैं जो आप सोच भी नहीं सकते। मुझे इसमें इस नौजवान का जो वाक्य सबसे ज्यादा आकर्षित लगा वो ये था कि रिटायरमेन्ट के बाद यदि आप के पास घर पर ही थोड़ी सी जमीन हो या छत भी हो तो भी आप इसे कर सकते हो।

आनंद शर्मा
लेखक उज्जैन संभागायुक्त हैं

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