शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार आज भी नहीं

सुबह सवेरे, भोपाल
शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार फिर टल गया है। मुख्यिमंत्री शिवराज ने भोपाल लौटकर कहा कि विस्तार अब देवशयनी ग्यारस के बाद ही होगा। यह 2 जुलाई को भी हो सकता है। उधर प्रदेश की प्रभारी राज्यपाल आनंदी बेन बुधवार को दोपहर तीन बजे भोपाल पहुंच रही है। प्रदेश की प्रभारी राज्यपाल के रूप में उनका शपथ ग्रहण शाम 4:30 बजे राजभवन में होने की संभावना है।  
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान तीन दिन की दिल्ली यात्रा के बाद मंगलवार को भोपाल लौटे। पहले चर्चा थी कि नए मंत्रियों के नामो पर सहमति बन गई है और मंगलवार को शपथ हो सकती है। लेकिन इस मुद्दे पर अंदरूनी तौर पर अभी भी घमासान मचा है। भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी भोपाल आने का कार्यक्रम टल गया है। वे मंत्रियों के शपथ समारोह में भाग लेने वाले थे। सूत्रो के अनुसार सारा पेंच आला कमान और प्रदेश इकाई द्वारा नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कराने के दबाव को लेकर फंसा है। संगठन 13 वरिष्ठ विधायकों की जगह युवा चेहरों को मौका देना चाहता है। जबकि शिवराज इस पर राजी नहीं  हैं। वे अपने कुछ पुराने साथियों को मंत्रिमंडल में देखना चाहते हैं, जिसके लिए भाजपा आलाकमान राजी नहीं है।
शिवराज के साथ दिल्ली से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत भी लौट आए। इस बीच चर्चा यह भी है कि प्रदेश की राजनीति में कुछ ‘बड़ा’ होने के आसार हैं।
दिल्ली में बीते दो दिन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वे गृह मंत्री अमित शाह से दो बार मिले। सोमवार शाम उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की।
बताया जाता है कि संगठन ने अगर नए चेहरों को मौका दिया तो गोपाल भार्गव, विजय शाह, सुरेंद्र पटवा, रामपाल सिंह, राजेंद्र शुक्ल, पारस जैन, नागेंद्र सिंह, करण सिंह वर्मा, जगदीश देवड़ा, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्‍नोई, भूपेंद्र सिंह के अरमानों पर कुठाराघात होगा। ये सभी शिवराज समर्थक बताए जाते हैं। उधर भाजपा सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि भाजपा भी वही गलती कर रही है जो कांग्रेस ने की थी। पार्टी को वरिष्ठ नेताओं का सहयोग लेना चाहिए।
 इस दौरान राज्य में दो उपमुख्य।मंत्री बनाने की भी चर्चा है। ये हैं नरोत्तम मिश्रा और तुलसी सिलावट। प्रदेश मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। इनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस तरह मुख्यमंत्री अधिकतम 29 और मंत्री बना सकते हैं। 

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