अब गांवों के तालाबों से होगी खेतों की सिंचाई, सरकार बना रही योजना

Haryana Chief Minister Mr Manohar Lal presiding over a meeting of Rural Development, Public Health Engineering and Irrigation Departments at Chandigarh on January 6, 2016. Haryana Agriculture and Irrigation Minister Mr O.P Dhankar is also seen in the picture.

चंडीगढ़।  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने  बुधवार को अधिकारियों को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सूखे तालाबों को वर्षा के पानी से भरने के लिए जिलावार व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए ताकि इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई तथा अन्य कार्यों के लिए किया जा सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जिला एवं उप-मंडल स्तरीय आपात टीमें गठित करने के भी निर्देश दिए ताकि प्रदेश में सेम की समस्या के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

    मनोहर लाल बुधवार को ग्रामीण विकास, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी तथा सिंचाई विभागों की एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा के मौसम के दौरान अधिकतर पानी व्यर्थ चला जाता है जिसका दोहन किया जाना चाहिए। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सूखे तालाबों को भरने के लिए एक व्यापक योजना बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि पानी का इस्तेमाल सिंचाई तथा मवेशियों के पीने के लिए किया जा सके। उन्हें बताया गया कि राज्य में लगभग 1583 सूखे तालाब हैं, जिनमें से 309 तालाब  पिछले मानसून के दौरान भर गए थे। उन्होंने अधिकारियों को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्थलों की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण करने के निर्देश भी दिए जहां तालाबों की आवश्यकता नहीं है।
मनोहर लाल ने अधिकारियों को स्वच्छ पानी से भरे लगभग 1000 तालाबों के उपयोग के प्रावधान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन तालाबों के पानी का इस्तेमाल पाइप लाइनें बिछाकर या जलमार्गों के माध्यम से निकटवर्ती खेतों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रसायनों तथा थ्री-पोंड एवं फाइव-पोंड प्रणाली अपनाकर तालाबों के दूषित पानी को साफ करने के भी निर्देश दिए। बैठक में उन्हें बताया गया कि ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने फाइव-पोंड प्रणाली की 1400 परियोजनाएं शुरू की हैं जिनके सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही सामने आएंगे।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में सेम की समस्या से संबंधित शिकायतों बारे चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को इस समस्या से निपटने के लिए आपात योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई  विभाग ऐसी टीमें गठित करेगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा नगर निगमों द्वारा ऐसी टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें युद्घ स्तर पर कार्य करेंगी और शिकायत प्राप्त होने पर तुरंत मौके पर पहुंचेंगी तथा समस्या का समाधान करेंगी।

बैठक में उन्होंने अधिकारियों को राज्य में पानी के वास्तविक प्रवाह के मानचित्र तैयार करने के भी निर्देश दिए ताकि प्रत्येक नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। इससे विभिन्न नहरों एवं जलाशयों में पानी के अतिरिक्त प्रवाह की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी जिससे अग्रिम योजनाएं बनाकर उसका समुचित उपयोग किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश के प्रत्येक जिले में बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान क रने तथा ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना को रोकने के लिए समय रहते कदम उठाने के भी निर्देश दिए।
बैठक में कृषि एवं सिंचाई मंत्री ओ.पी.धनखड़, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दलीप सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव राकेश गुप्ता, विकास एवं पंचायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती नवराज संधु, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रधान सचिव अलोक निगम और शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव अनिल कुमार भी उपस्थित थे ।

 

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