दो कविताएं

प्रदीप कुमार शर्मा

1-इंतज़ार

सुबह से रात
सरहद पर खड़ा है वो
लिये
औरों की नींदों की सौगात
जबकि धुल गया काजल
उसके इंतज़ार में
दो जागती आँखों का !

2-राष्ट्र का गुरूर

एक सरहद
देशभक्ति को पार करती हद
जिसमें सर
झुकता नहीं
कटाना मंज़ूर है
एक वीर
राष्ट्र का गुरूर है |

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