क्या गूगल ने भी जेएनयू को राष्ट्रद्रोही मान लिया है?

प्रश्न 1: केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं कि 30 अप्रैल तक शहरों में कम से कम एक वार्ड में खुले में पेशाब करने या शौच करने पर जुर्माने से दंडित करना शुरू किया जाए। अगले ढाई वर्षों में यह व्यवस्था पूरे देश में लागू करने की योजना है। हमारे देश में लगभग आधी आबादी खुले में शौच करती है। जनमानस में गहरी पैठ बनाए सदियों से चली आ रही इस बेशर्म परंपरा को इतने कम समय में कैसे मिटाया जा सकेगा? क्या अब घर से बाहर निकलते समय किसी बात का पता आपको हो न हो, सुलभ कॉम्पलेक्स की जानकारी ज़रूर होना चाहिए! आप क्या सोचते हैं, पचास शब्दों में बताएँ।

प्रश्न 2: केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा और भाजपा के क़द्दावर नेता शाहनवाज़ हुसैन ट्विटर पर प्रभु ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने के दु:ख भरे अवसर गुड फ्रायडे पर बधाई संदेश देकर उपहास का पात्र बने। यह नेताओं के अधकचरे ज्ञान का परिणाम है, या बड़े लोगों का सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल करने वाले सहायक की चूक है या सामान्य सी मानवीय भूल है? विश्लेषण करें।

प्रश्न 3: आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने भारतीय जनता पार्टी से रोचक सवाल पूछा है कि मेहबूबा मुफ़्ती भारत माता की जय बोलेंगी? यदि नहीं बोलेंगी तब भी क्या उनका दल पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाएगा? भारत माता की जय बोलने को लेकर देश में चल रही बहस और विवादास्‍पद घटनाओं के बाद क्या ‘आप’ नेता के सवाल का जवाब कोई देना चाहेगा? या बक़ौल अडवाणी जी ऐसे प्रश्न पूछने का कोई औचित्य नहीं है? व्याख्या करें।

प्रश्न 4: किसी भी पृच्छा के पूरी होने से पहले अनेक जानकारियों का विकल्प देने में गूगल का जवाब नहीं। टाइप करिए एंटीनेशनल या सेडीशन, गूगल बिना देर किए आपको जेएनयू के गेट पर ले जाकर खड़ा कर देगा। क्या कुछ देशवासियों की तरह गूगल ने भी जेएनयू को राष्ट्रविरोधी होने का पर्याय मान लिया है? गूगल इस ग़लती को सुधारने में जुट गया है। परंतु ऐसी नौबत आने के लिए कौन ज़िम्मेदार है- जेएनयू स्वयं, राजनीति, छात्र आंदोलन, गुट विशेष की साज़िश, मीडिया या कोई शातिर हैकर? विवेचना करें।

प्रश्न 5: एस.श्रीसंत, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी, जो गेंदबाज़ी से ज़्यादा मैच फ़िक्सिंग के निराधार आरोप झेलने के लिए जाने जाते हैं, अब भाजपा की टिकट पर तिरुवनंतपुरम से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। केरल में जहाँ भाजपा का प्रदर्शन बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है, पार्टी श्रीसंत पर दाँव क्यों लगा रही है? भाजपा को क्यों लगता है कि कमर में तौलिया खोंसे श्रीसंत इलेक्शन के खेल में सटीक चुनावबाजी से विरोधियों को परास्त कर देंगे? या अमित शाह को उनके येन-केन-प्रकारेण बाज़ी जीतने के हुनर पर पूरा भरोसा है? संक्षेप में बताएँ।

 

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