टेहरीमारिया में कब गूंजेगी शहनाई?

प्रश्न 1: भयंकर सूखा झेल रहे बुंदेलखंड में छतरपुर जिले के टेहरीमारिया गाँव के साठ नवयुवक पानी की भारी क़िल्लत के कारण सिर पर सेहरा बाँधने को तरस रहे हैं। इस गांव में कोई पिता अपनी बेटी से पानी भरने के लिए मीलों चक्कर लगवाने को तैयार नहीं है। भांजियों की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले मुख्यमंत्री मामा क्या भांजों की सुध भी लेंगे और पानी की समस्या दूर करने के लिए तत्‍काल क़दम उठाएँगे ताकि टेहरीमारिया में भी शहनाई गूँज सके। पचास शब्दों में बताएँ।

प्रश्न 2: देश में हुई अनेक आतंकी वारदातों में पाकिस्तान की आई.एस.आई. का हाथ होने की दुहाई सरकारें देती रही हैं। फिर क्यों पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले की जाँच के लिए आई.एस.आई. सदस्य वाली ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन टीम को शिवसेना, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने अनुमति दी होगी- बक़ौल केजरीवाल मोदीजी द्वारा नोबेल प्राइज़ पाने, पाक की पोल उनकी टीम के सामने ही खोलने, बदले में अज़हर मसूद से पूछताछ की अनुमति लेने, पाक द्वारा आतंकी घटना को नकारने का अवसर समाप्त करने या गुनहगारों को सज़ा दिलाने के लिए? विवेचना करें।

प्रश्न 3: मोदीजी चाहते हैं कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियाँ अपनी नौकरी के लिए कर्मचारियों का चयन सरकार द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल प्रत्याशियों की सूची से करें ताकि उनका धन और समय दोनों बच सके। अर्थात् मध्यप्रदेश में निजी क्षेत्र की नौकरी पीईबी (पूर्व नाम व्यापम) या पीएससी के माध्यम से मिले। क्या ऐसा करने से निजी क्षेत्र के कार्यों की गुणवत्ता में सुधार आएगा या उनकी नौकरियों में सरकार का परोक्ष दखल शुरू हो जाएगा या यह उससे भी ज़्यादा दूर की सोच है? व्याख्या करें।

प्रश्न 4: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला ने पठानकोट हमले की जांच के लिए आई पाकिस्तान की जे.आई.टी. का स्वागत करते हुए सुझाव दिया है कि इसी तर्ज़ पर भारत और पाक संयुक्त रूप से सत्य एवं सुलह आयोग बनाएँ जो पिछले पच्चीस सालों में जम्मू-कश्मीर में जो भी हुआ है उसकी छानबीन करे और दोषियों की जवाबदारी तय करे। यह भारत के आंतरिक मामलों ख़ासकर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के हस्तक्षेप के लिए परोक्ष निमंत्रण है या नहीं? क्या ऐसा करने से पाकिस्तान के साथ चली आ रही कश्मीर समस्या हल करने में कोई मदद मिलेगी? विश्लेषण करें।

प्रश्न 5: उत्तराखंड के ग्रेट पॉलिटिकल थ्रिलर में हर एपीसोड के अंत में नया रोमांचक रहस्य बरक़रार रहता है। कांग्रेस के बाग़ी विधायकों की मानें तो राहुल गांधी ने यदि उन्हें मुलाक़ात का समय दे दिया होता तो, शायद दृश्य कुछ और ही होता! क्या इतनी साधारण सी बात भी कांग्रेस उपाध्यक्ष को समझ में नहीं आई थी? क्या आजकल सरकार बनाना और उसे बनाए रखना दोनों ही काम एक जैसे मुश्किल हो गए हैं? ख़ासकर ग़ैर भाजपा दलों के लिए? पक्ष या विपक्ष में राय दें।

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY