बेदाग छवि वाले चुनाव क्यों नहीं जीत पाते?

प्रश्न 1: भोपाल नगर निगम द्वारा 98 करोड़ के घाटे का बजट पेश किया गया जबकि अवैध होर्डिंग के मामलों में 128 करोड़ की बक़ाया राशि वसूली के लिए शेष है। इन बड़े बकायादारों का या तो अता-पता नहीं है या वे बक़ाया राशि जमा कराने के इच्छुक नहीं हैं। आम आदमी की तो प्रॉपर्टी ज़ब्त हो जाती है या नल का कनेक्शन ही काट दिया जाता है। क्या इन बकायादारों को छोटा मोटा माल्या कह सकते हैं? या जब तक डिफाल्टर विदेश न भाग जाए तब तक क़र्ज़ का रोना रोने में मज़ा ही क्या है? पचास शब्दों में बताएँ।

प्रश्न 2: पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में चुनाव रैली के दौरान अजान की आवाज़ सुनकर मोदीजी ने अपना भाषण कुछ पलों के लिए यह कहकर रोक दिया कि हमारे कारण किसी की प्रार्थना में बाधा नहीं पहुँचना चाहिए। प्रधानमंत्री द्वारा पेश की गई इस सहृदयता का अनुसरण भविष्य में क्या सभी नेता करेंगे तथा अजान के समय ख़लल डालने वाली सभी गतिविधियों को विराम दे दिया जाएगा? या यह चुनाव के समय अपनाया गया एक हथकंडा मात्र है? विवेचना करें।

प्रश्न 3: वर्ष 2016 कांग्रेस के लिए अशुभ सिद्ध हो रहा है। शुरुआत में ही अरुणाचल में 30 विधायक बाग़ी हो गए और सत्ता चली गई। उत्तराखंड में नौ विधायकों का विद्रोह, स्टिंग ऑपरेशन, राष्ट्रपति शासन और शक्ति परीक्षण की कशमकश। मणिपुर में भी सीएम न बदलने पर 25 विधायकों ने भाजपा में जाने की धमकी दी है। जेटली जी केजरीवाल सरकार को अलोकतांत्रिक कह चुके हैं। हिमाचल के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं। क्या जनता द्वारा चुनी हुई सरकार गिरने की बारी इनमें से किसी की है या सभी की या किसी की नहीं? व्याख्या करें।

प्रश्न 4: गुजरात के विकास मॉडल पर चलने को आतुर क्या यह जानते हैं कि वहां अभी भी 53 हजार आंगनवाड़ियों में से 20 प्रतिशत में पीने लायक पानी और टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। कई वर्षों से कृषि कर्मण पुरस्कार पा रहे मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्या भी करते हैं। खर्चीली और तामझाम वाली इन्वेस्टर मीट के बावजूद बड़े औद्योगिक घराने की कोई महत्वाकांक्षी योजना हमारे यहाँ नहीं शुरू हुई। स्त्रियों के लिए शानदार योजनाएं लाने में पॉयनियर एमपी बलात्कार जैसे मामलों में देश में शीर्ष स्थान पर है। इन कमियों के लिए क्या आप सहमत हैं कि कई मुद्दों पर मोदीजी का गुजरात भी परफ़ेक्ट नहीं है, तो हम तो फिर भी बीमारू राज्य रहे हैं? कारण सहित उत्तर दें।

प्रश्न 5: इंडिया स्पेन्ड द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार भाषणों में घृणा फैलाकर राजनीति करने वाले तीस प्रतिशत उम्मीदवार चुनाव जीत जाते हैं, जबकि बेदाग़ छवि वाले केवल दस परसेंट लोगों को ही इलेक्शन में सफलता मिलती है। क्या इन आंकड़ों से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि नेताओं और राजनीति में गंदगी को कोसने वाली अवाम की रुचि भी पूर्ण परिष्कृत नहीं है? जब मतदाता ही नफ़रत फैलाने वालों के नाम पर अपनी पसंद की मुहर लगाते हैं, तो केवल नेता ही बदनामी के हक़दार क्यों? जनता भी क्यों नहीं? पक्ष या विपक्ष में राय दें।

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