नवरात्र का दूसरा दिन, मंदिरों में ‘ब्रह्मचारिणी’ के जयघोष

नई दिल्ली। शनिवार को चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है और नवरात्र का दूसरा दिन है, इसलिए आज मां दुर्गा के ‘ब्रह्मचारिणी’ रूप की विधि-विधान से पूजा हो रही है। मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिम में उनके दाहिने हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल देखने को मिलता है। जगह-जगह मंदिरों में मां ‘ब्रह्मचारिणी’ के दर्शन और पूजा के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है।
शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के यहां पुत्री बनकर जन्म लिया और महर्षि नारद के कहने पर अपने जीवन में भगवान महादेव को पतिरूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक इसी कठिन तपस्या के कारण ही उनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा।
अपनी इस तपस्या की अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर और अत्यंत कठिन तप से महादेव को प्रसन्न कर लिया। उनके इसी तप के प्रतीक के रूप में नवरात्र के दूसरे दिन इनके इसी रूप का पूजन और स्मरण किया जाता है।
पंडितों के मुताबिक, नवरात्र के दूसरे दिन मां भगवती को चीनी का भोग लगाने का विधान है। ऐसा विश्वास है कि चीनी के भोग से उपासक को लंबी आयु प्राप्त होती है और वह नीरोगी रहता है। साथ ही, उसमें अच्छे विचारों का आगमन होता है और मां पार्वती के कठिन तप को मन में रखते हुए संघर्ष करने की प्रेरणा प्राप्त होती है।

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