नीतीश क्यों उठा रहे हैं आरक्षण का मुद्दा?

प्रश्न 1: सागर में सब डिविजनल मेजिस्ट्रेट के रीडर ने एक सहायक अध्यापक को पन्द्रह मिनट देरी से पहुँचने पर अपना काम एक पैर पर खड़े रहकर निपटाने की सज़ा सुनाई और पालन भी कराया। स्कूली बच्चों के जाति प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए एसडीएम कार्यालय में अटैच किए गए गुरुजी को छात्रों के देर से आने पर दी जाने वाली सज़ा याद आई होगी या नहीं? या रीडर (हिंदी में पढ़ाकू ही कहेंगे न?) को अपने स्कूली दिनों में मास्सा’बों की दादागिरी की यादें कचोट रही थीं, जिसका ख़मियाज़ा टीचर ने भुगता! क्या यह अपना-अपना दांव है, जब लगे तब कोई क्यों चूके? विश्लेषण करें।

प्रश्न 2: पर्यावरणविद ‘वॉटरमैन’ राजेन्द्र सिंह का मानना है कि नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ने वाले प्रोजेक्ट के चलते क्षिप्रा के अपने बहाव, निकासी, जैव विविधता जैसे प्राकृतिक स्वभाव के लिए ख़तरा पैदा होने की पूरी संभावना है। उज्जैन में सिंहस्थ का महापर्व सम्पन्न हो रहा है। क्या विद्वान पंडित यह बताएँगे कि सिंहस्थ के दौरान क्षिप्रा नदी में नर्मदा के जल से स्नान करने पर पुराणों मे वर्णित पूरा पुण्य लाभ प्राप्त होगा?

प्रश्न 3: यदि नफ़रत का प्रहार झेलने वाले राजनेताओं की सूची बनाई जाए तो अरविंद केजरीवाल उसमें ऊँचे पायदान पर होंगे। आम आदमी पार्टी बनाने के बाद हर साल उनका स्वागत कभी थप्पड़, कभी स्याही और कभी जूतों ने किया है। क्या उनकी सफलता का रास्ता इन्हीं बेइज़्ज़त स्पीड ब्रेकरों से होकर गुज़रता है, जो उनके राजनैतिक कॅरियर को नया उछाल देने के काम आते हैं? क्या यही कालिख या जूते बुरी नज़र वालों से उनकी रक्षा किया करते हैं? और ऐसा कर के विरोधी उनकी मदद ही करते हैं। व्याख्या करें।

प्रश्न 4: बिहार के नीतीश बाबू ने ईसाई और मुसलमानों जैसे अल्पसंख्यक समुदायों को भी लाभ देने के लिए आरक्षण की सीमा पचास प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की माँग करते हुए प्रायवेट सेक्टर में भी आरक्षण की वकालत की है। आरक्षण पर आर.एस.एस. प्रमुख के बयान से उपजी बहस से विधानसभा चुनाव जीतने में मिली मदद से उत्साहित नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश में संभावित गठबंधन को अच्छे परिणाम दिलाने के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं या उससे भी आगे उनकी नज़र लोकसभा चुनावों पर टिकी हुई है? क्या भाजपा द्वारा राष्ट्रवाद पर ध्रुवीकरण के प्रयास का जवाब देने के लिए आरक्षण के मसले पर नीतीश पोलराइजेशन का प्रयास कर रहे हैं? विवेचना करें।

प्रश्न 5: गधों के अधिकारों के लिए काम करने वाले ‘डांकी सेंचुरी’ संस्था के दिल्ली वाले डॉ. सुरजीत नाथ का दावा है कि जहाँ मशीन काम नहीं आती वहां गधे काम आते हैं। इसीलिए ‘मेक इन इंडिया’ में गधों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कहाँ एक ओर कल-पुर्ज़ों वाला ‘मेक इन इंडिया’ का बब्बर शेर और दूसरी ओर हाड़-माँस का बोझा ढोता चींपो-चींपो करने वाला गधा! क्या सुरजीत नाथ यह मानते हैं कि यदि मशीनी शेर चल नहीं पाएगा तो उनका गधा उसे पीठ पर लादकर मंज़िल तक पहुँचाने के काम आएगा? केवल निर्मल हास्य के लिए आकलन करें।

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