विचार पर लकवा लगने की पहचान कैसे होगी?

प्रश्न 1: चौबीस वर्षीय अमेरिकन इयान बुकार्ट  के दिमाग़ में चिप लगाकर लकवाग्रस्त दाँए हाथ को सक्रिय बना दिया गया है। यह चिप मस्तिष्क से तरंगें भेजकर पूरे हाथ को काम करने योग्य बनाता है। क्या उम्मीद की जा सकती है कि जल्दी ही ऐसी चिप भी खोज ली जाएगी जो हमारे देश के उन महानुभावों के मस्तिष्क में फ़िट करने के काम आएगी जिनके सोच, विचार, नज़रिए और बोलों पर लकवा लगा हुआ है? परंतु, क्या ऐसे भद्रजनों की पहचान करना आसान है? शिनाख्त कर सूची बनाएँ।

प्रश्न 2: धमकी मिलने के अलावा नागपुर में कन्हैया कुमार (जेएनयू फ़ेम) को सुनने आई भीड़ में से कुछ ने उसका स्वागत जूते-चप्पलों से भी किया। पहले भी अरविंद केजरीवाल जैसे लोग इस तरह की घटनाओं का शिकार हुए हैं। लोगों की इतनी तीव्र भावनाएँ क्या सामने वाले के बढ़ते प्रभाव का द्योतक है? जिस देश में चार्वाक जैसे नास्तिक को भी धर्माचार्यों ने ऋषि का दर्जा दिया हो, वहाँ किसी विचारधारा पर हमला क्या यह सिद्ध करता है कि विरोधियों के पास उसकी बातों का तार्किक खंडन करने की गुंजाइश नहीं बची है? या वह सचमुच नफ़रत करने योग्य है? विवेचना करें।

प्रश्न 3: कुछ दिन पहले दिल्ली में मर्सिडीज़ कार को चलाने वाले नाबालिग़ ने एक की जान ले ली। अब हैदराबाद में सात साल की बच्ची का स्कूटी चलाने वाला समाचार दिखाया जा रहा है। ऐसे मामलों में बालिग़ अभिभावक और नाबालिग़ चालक की अक़्लमंदी में कोई फ़र्क़ दिखाई देता है क्या? कार हो या सरकार, जब तक उसे चलाने वाला ड्राईवर दक्ष नहीं होगा दुर्घटनाएँ होती रहेंगी। दक्षता का प्रमाणपत्र वाहन चालक को परिवहन विभाग देता है किंतु सरकार चलाने वालों का चुनाव जनता करती है। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए परीक्षण के मापदंड निर्धारित हैं। क्या जनता भी वोट देने से पहले उम्मीदवारों का कोई टेस्ट लेती है? ऐसी परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करें।

प्रश्न 4: उत्तरप्रदेश में एक पोस्टर विवाद पैदा कर रहा है। पोस्टर में जनता रूपी द्रौपदी को अखिलेश, आज़म, राहुल आदि कौरवों से अपने चीरहरण से रक्षा के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष केशव मौर्य से गुहार लगाते दिखाया गया है। भाजपा इसमें दिखाई भावना का समर्थन करते हुए उसे प्रदर्शित करने के तरीक़े से असहमति जता रही है। क्या यह नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की धमाकेदार एन्ट्री का स्टाइल है या आगामी दिनों में यू.पी. में पार्टी द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली की पूर्व झलक है?

प्रश्न 5: सिने एंड टेलिविज़न आर्टिस्ट एसोसिएशन ने टीवी कलाकार प्रत्यूषा बैनर्जी की आत्महत्या जैसे संवेदनशील मसले पर दिए गए बेसिर पैर के बयानों के कारण राखी सावंत और डॉली बिन्द्रा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की घोषणा की है। अब क्या उन्हें फ़िल्मों और टीवी में काम मिलना बंद हो जाएगा? क्या मीडिया उन्हें नहीं दिखाएगा या जनता उन्हें नापसंद करने लगेगी? जब भड़काऊ भाषण के लिए नेताओं पर प्रतिबंध नहीं लग पाता या लोग उन्हें वोट देना बंद नहीं करते तो मूर्खतापूर्ण बयानों के लिए कितनी पाबंदी लगाई जा सकती है? सौ शब्दों में बताएँ।

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