सकारात्मक सोच से तनाव को बनायें अपनी ताकत

आधुनिक स्त्री के जीवन में चिंता और तनाव घोलने वाले ये कुछ कारण हैं। इन वजहों से अक्सर महिलाएं चिंता में पड़ जाती हैं और उनकी जिंदगी निराशा के सागर में डूबने लगती है। आधुनिक स्त्री पर घर, परिवार, बच्चे और कॅरियर के साथ ही अन्य तमाम जिम्मेदारियां हैं। वह मल्टीटास्किंग है और उसकी व्यस्तताएं भी तमाम हैं। उन्हें एक समय पर कई लक्ष्य साधने हैं, फलस्वरूप उनके पास अपनी ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए शरीर को आराम देने व अपनी सेहत पर ध्यान देने के लिए वक्त नहींहै। हम चर्चा करेंगे उन कारणों पर कि क्यों तनाव इतना बढ़ जाता है कि खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है और क्या है उसे नियंत्रण में रखने के जांचे-परखे उपाय, ताकि उसके नकारात्मक प्रभावों को बदलकर सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सके। जिसकी मदद से जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाना संभव हो सके। यहां यह गौर करना जरूरी है कि क्यों तनाव व चिंताएं बढ़कर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती हैं?

क्या हम अपनी क्षमता से ज्यादा भार लेने के आदी हैं? ऊर्जावान व महत्वाकांक्षी महिलाएं अक्सर जरूरत से अधिक काम व जिम्मेदारियां लेने के लिए तत्पर रहती हैं। इस बात का ख्याल रखें कि हम सभी को सिर्फ बारह घंटे मिलते हैं। इस दरम्यान हमें अपने मीटिंग्स, असाइनमेंट्स और वर्क प्रोजेक्ट के लिए वक्त निकालना होता है। साथ ही अपनी निजी जिंदगी और परिवार पर भी ध्यान देना पड़ता है। यहां कोई भी काम कम महत्वपूर्ण नहीं, सभी की अहमियत है। कई बार लंबित काम हमारे तनाव की बड़ी वजह बन जाता है। कई बार निर्णय लेना कठिन होता है। अगर हम हर कार्य के लिए अपना टाइम टेबल तैयार करते हैं और उसके अनुसार ही कार्य करते हैं तो भी संभव है कि अन्य लोग या कुछ जरूरी काम अप्रत्याशित रूप से हमारा समय छीन लें। इस तरह हमारा टाइम टेबल डिस्टर्ब हो जाएगा। फलस्वरूप तनाव बढ़ जाएगा और शारीरिक तकलीफ भी बढ़ सकती है।

जब मस्तिष्क संशय और चिंताओं से घिरा होता है, तब पर्सनल व प्रोफेशनल समस्याओं का समाधान खोजना और इस संबंध में सफलता सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार करना मुश्किल होता है। हमें लगता है कि इस स्थिति से उबरने में कोई हमारी मदद नहीं कर सकेगा। जब मदद का कोई रास्ता नजर नहींआता तो हम परेशान हो उठते हैं। समस्या का समाधान खोजने में असफलता का डर हमें अपनी गिरफ्त में ले लेता है और उससे हमारी गतिविधियां प्रभावित होती हैं। हमें यह महसूस होता है कि हमारे द्वारा किया गया कोई भी कार्य गलत ही होगा। यह अहसास हमें गंभीर तनाव में डाल देता है।

दांपत्य और प्रेम संबंधों में कठिन समय हमेशा हमारे जीवन पर गहरा असर डालता है। घर लौटने पर अक्सर ही जीवनसाथी और बच्चों से कहासुनी से हमारी थकान कई गुना बढ़ जाती है। ऐसा लगता है, मानो सारी ऊर्जा समाप्त हो गई है। बाहर की दुनिया तेजी से बदल रही है, उसके संदर्भ में कई बार मां-बाप और बढ़ती उम्र के बच्चों की सोच अलग होती है और यही बात दोनों के मध्य कहासुनी और अनबन की वजह बन जाती है। युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते बच्चों का अपना लाइफस्टाइल होता है। वे अपने लिए स्पेस चाहते हैं। अपने सीक्रेट सुरक्षित रखना चाहते हैं। अगर अभिभावक खासकर मां का बच्चों से दोस्ताना रिलेशनशिप है तो दोनों ही आनंद महसूस करते हैं, पर बहुत से घरों में अभिभावक और संतान के मध्य संबंध तनाव और परिवार में गहमागहमी भरे माहौल की वजह बनते हैं।

सकारात्मक सोच के 7 उपाय

1. कोई आपको नकारात्मकता की ओर उकसाने की कितनी भी कोशिश करे, पर आप शांत व संयत रहेंगी। कार्य और घर-परिवार की जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होतीं। उनके मध्य आपको अपने हृदय में शांति और सुकून का भाव जगाना होगा। एक कार्य पूरा करने के बाद कुछ देर ब्रेक लेकर गहरी सांसें लें, ऊर्जा का संचय करें और फिर नए कार्य में लगें।

2. क्रोध और निराशा को सकारात्मक विचारों और ऊर्जा में परिवर्तित करें। ऐसी आदतें विकसित करें, जिससे तनाव को दूर भगाना आसान हो सके। रोज का कार्य रोजाना निपटाने की कोशिश करें। मामला चाहे ऑफिस का हो या घर-परिवार का। व्यवस्थित दिनचर्या से तनाव दूर रखने में मदद मिलती है।

3. व्यर्थ की उलझनों व उहापोह में पडऩे से बचें, क्योंकि इससे सोचने की क्षमता प्रभावित होती है और मन नकारात्मक विचारों में उलझता है।

4. मन से डर को निकालें। यकीन मानिए, हर समस्या का समाधान होता है। कई बार दोस्त, परिवार या सहकर्मी की मदद से या हम स्वयं ही समस्या का समाधान खोजते हैं। वहींकई बार समय के साथ ही उस समस्या का हल मिल जाता है। भविष्य को लेकर संशय व समस्याओं को गंभीर तनाव का कारण न बनने दें।

5. चिंता की प्रवृत्ति को आदत न बनने दें। भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर आशंकित व उधेड़बुन में पड़े रहने के बजाय तर्क का रास्ता अपनाएं। जब कभी भविष्य को लेकर आशंकित महसूस करें तो जो कार्य कर रही हों उससे थोड़ी देर का ब्रेक ले लें। किसी दूसरे विचार पर ध्यान केन्द्रित करके मस्तिष्क को शांत करने का प्रयास करें। लंबे समय से चली आ रही चिंता व तनाव की स्थिति में प्रोफेशनल मदद की जरूरत होती है। इसलिए अगर आपको इसकी जरूरत महसूस हो तो मदद लेने में हिचक महसूस न करें। आपको बस अपने सोचने के तरीके में बदलाव लाने के लिए मदद की जरूरत है, ताकि आप जिंदगी में प्रसन्न व ऊर्जावान महसूस कर सकें।

6. मौजूदा समस्या के सभी समाधानों पर शांति से विचार करें। चिंताओं को दरकिनार करते हुए तार्किक विचारों को स्थान दें, जिससे आपको विपत्ति में समस्या का समुचित हल सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।

7. किसी भी चिंता या तनाव को पूरे दिन स्वयं पर हावी न रहने दें। जीवन में कोई समस्या या उलझन है तो उस ओर ध्यान जाना स्वाभाविक है, पर लगातार उस दिशा में सोचते रहना भी ठीक नहीं है। उस ओर से दिमाग हटाकर किसी अन्य महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान केन्द्रित करें या कुछ दिनों के लिए घूमने निकल जाएं। इस तरह नयी ऊर्जा से पूर्ण होकर समस्या का हल तलाशने की कोशिश करें। याद रखें कि इस दुनिया में ऐसा कोई शख्स नहीं है, जिसके जीवन में चिंताएं और तनाव न हों। ये सब आधुनिक जिंदगी का हिस्सा हैं, इसलिए खुशमिजाज रहते हुए युक्तिपूर्वक उनका सामना करें। अपनी रोजाना की जिंदगी में चिंताओं के बिंदुओं को सूचीबद्ध करें और व्यवस्थित रूप में उनका समाधान सुनिश्चित करें। अगर किसी समस्या का हल सूझ न रहा हो तो उसे कुछ समय के लिए यूं ही छोड़ देना बेहतर है।

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