ऐसे भगवा पेंट का क्या मतलब ?

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  • ऐसे भगवा पेंट का क्या मतलब ?केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डाॅ. रामशंकर कठेरिया ने हाल में ‍जिहादी अंदाज में कहा कि देश के भले के लिए जरूरी हुआ तो शिक्षा का भगवाकरण किया जाएगा। देश को जिस तरह की शिक्षा नीति की जरूरत है, सरकार उसी पर काम कर रही है। फिर चाहे वह भगवाकरण हो या संघवाद। शिवाजी के राज्याभिषेक की जयंती पर लखनऊ विवि के एक समारोह में कठेरियाजी ने ये बात इतनी सहजता से कही कि मानो उनके पास देश को शिक्षित का करने की इतनी बड़ी जिम्मेदारी न होकर पुताई का बड़ा ठेका हो और वे हाथ में भगवा पेंट का डिब्बा लेकर कह रहे हों कि भई किधर कलर मारने का है।

अब भगवाकरण मतलब क्या? भगवा एक रंग है, जो हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म में शौर्य और समर्पण का प्रतीक माना गया है। हिंदुत्व की वह नैसर्गिक और सनातन पहचान है। यह रंग न तो पूरी तरह लाल है न सफेद है। हरे और नीले से तो कोसों दूर है। ये तमाम  रंग तो प्रकृति में पहले भी थे, लेकिन  हमारे पूर्वजों ने भगवा (केसरिया) को ही धार्मिक प्रतीक के रूप में शायद इसीिलए चुना क्योंकि इसमें कुछ दूसरे रंगों की भी आभा शामिल है। भगवा रंग धर्मध्वजा तक रहे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यदि वह राज धर्म में घुलने लगता है कि दर्द होना स्वाभाविक है। क्योंकि संविधान की एक व्याख्या यह है कि राजसत्ता का कोई धर्म नहीं होता। ऐसी परेशानी तब नहीं थी, जब चौतरफा हिंदुत्व अथवा उसी से निकले रंगों की रेलमपेल थी। समस्या तब हुई,  जब दूसरे रंगों ने भगवा को कैद करने की कोशिश की। भगवा रंग को सर्वमान्य तरीके से  भारत भूमि में खिलने का पूरा हक है। अगर कठेरिया इसी शाश्वत भाव से कह रहे हैं तो ‘शिक्षा का भगवाकरण’ स्वाभाविक ही है, आखिर (श्रीमद् ) भागवत के देश में भगवा रंग की रंगदारी न होगी तो किस रंग की होगी? हिंदुस्तान में हिंदू संस्कारों और शिक्षाअों की बात नहीं होगी, किस देश में होगी? हम विश्व इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए भगवा अपनी रंगत को दिखाएगा ही। हिंदू दर्शन, हिंदू संस्कार और हिंदू इतिहास इस भरत खंड कर ऐतिहासिक अनिवार्यताएं हैं। जिन्हे नकारना अपनी परछाईं को ही सच मानने जैसा है।

लेकिन कठेरिया जैसे लोग जिस भाव और अंदाज में यह सब कहते हैं, वह भगवा रंग की प्राण प्रतिष्ठा कम, हिंदू संस्कृति के आलीशान महल को गेरूआ रंग से पोत मारने का भौंडा आग्रह ज्यादा लगता है। ‘शिक्षा का भगवाकरण’ विवेकवान तरीके से भी हो सकता है। डाॅ. मुरली मनोहर जोशी ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा था- ‘शिक्षा के भगवाकरण का अर्थ भारत की पवित्र परंपराअों की अोर लौटना है।‘ पश्चिमी सोच ने हिंदू क्रिया कलापों को ‘भगवा’ नाम इसलिए भी दिया क्योंकि हमारे सन्यासी भगवा पताका लेकर चलते हैं। लेकिन भगवाकरण का अर्थ मूढ़मति होना नहीं है। किसी ने कुछ कह दिया सो मान लिया। यह भी कि हिंदू दर्शन, हिंदू संस्कृति और हिंदू जीवन शैली ही विश्व में सर्वश्रेष्ठ और बहस से परे है। सारा ज्ञान वेदों में भरा पड़ा है। अतीत की बातों को विज्ञान की कसौटी पर परखने की जरूरत नहीं है, वगैरह।

कठेरियाजी को भगवाकरण का मर्म कितना पता है, पता नहीं। लेकिन उन पर 23 अपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें एक हत्या का है। जाली डिग्रियों का मामला भी चल रहा है। हालांकि कठेरिया का तर्क है कि एक भी प्रकरण में आरोप तय नहीं हैं। उन पर आरोप सिद्ध हो न हों पर वे ‘भगवाकरण’ को कच्चे घर की सौंधी लिपाई की तरह लें तो बेहतर है, न कि महल का रूप बिगाड़ने वाली अंधी पुताई  की तरह।

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