रतलाम-इंदौर के बीच की समय-सारणी रेल अधिकारियों के तुगलकी निर्णय का शिकार?

प्रात: 6 बजे चलने वाली ट्रेन को प्रात: 4.30 बजे चलाने का प्रस्ताव

रतलाम। रतलाम-इंदौर के बीच जब से गेज कन्र्वेशन हुआ है तब से इस रेल मार्ग पर गिनती की ही गाडिय़ां चल रही है। मीटर गेज के समय तो यात्रियों को इतनी परेशानी नहीं होती थी। इंदौर जाने के लिए पर्याप्त ट्रेने थी। लेकिन जब से इसे बड़ी लाइन में तब्दिल किया गया है लोगों का इंदौर जाना भी मुश्किल हो गया है। अब तो ओर यह सुनने में आया है कि रेल प्रशासन तुगलकी फरमान जारी करने वाला है, जिसमें प्रात: 6 बजे चलने वाली ट्रेन को अलसुबह 4.30 बजे इंदौर के लिए चलाया जाएगा। पता नहीं यह निर्णय क्या सोच समझकर लिया गया है। यदि यह निर्णय क्रियान्वित हुआ तो इंदौर जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

हजारों नौकरी पेशा लोगों के सामने उत्पन्न होगी समस्या

रतलाम से लगाकर गौतमपुरा तक हजारों नौकरी पेशा लोग प्रात: 6 बजे की ट्रेन से सफर करते है,ताकि वे समय पर नौकरी पर पहुंच सके। उच्च न्यायालय में जाने वाले पक्षकार और वकील भी इसी ट्रेन से इंदौर जाते है। यदि 4.30 बजे नई समय-सारणी में ट्रेन निर्धारित की गई तो अपडाउन करने वाले यात्रियों के लिए क्या स्थिति बनेगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। क्या कोई अपडाउन करने वाला यात्री प्रात: 4.30 की ट्रेेन पकड़ पाएगा और क्या 7 बजे इंदौर पहुंचकर वह तीन घंटे कैसे व्यतित करेगा यह विचारणीय प्रश्न है।

लोगों की उम्मीद पर पानी फिरा

लोगों को उम्मीद थी कि गैज कन्वर्शन के बाद चित्तौड़-इंदौर,रतलाम-इंदौर या महू तक अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएगी। अब इंदौर से महू का रेलमार्ग भी खुल चुका है। ऐसे में रेल प्रशासन को अधिक ट्रेनें चलाने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह तो अच्छा है अभी इंदौर जाने वाले यात्रियों को सडक़ मार्ग से काफी बसें उपलब्ध हो गई है,लेकिन क्या रोज चार्टड बस से 220 रुपया किराया एक तरफ और दोनों तरफ का 440 रुपया किराया  कोई अदा कर सकता है। ऐसे लोगों के लिए बस में सफर करना कैसे संभव होगा,जिन्हें प्रतिदिन इंदौर जाना होता है,उनके लिए ट्रेन ही एक माध्यम है, जो कम किराए में आने-जाने के लिए यात्रियों को सुविधा मुहैया कराती  है।

अपडाउन करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए
यदि रेल प्रशासन को 4.30 बजे ट्रेन चलाना ही है तो उसके बाद दूसरी ट्रेन 6.30 या 7 बजे  चलाना चाहिए, ताकि अपडाउन करने वाले यात्रियों को सुविधा हो सके। वैसे 6 बजे की वर्तमान ट्रेन का समय भी लोगों के लिए कष्टप्रद था। गर्मी में तो ठीक लेकिन ठंड व बरसात में यात्रियों के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। इस ट्रेन का समय यदि 6.30 या 7 बजे होता है तो यात्रियों को काफी सुविधा होगी। रतलाम और इंदौर के बीच स्टेशनों के कई ऐसे कर्मचारी,अधिकारी है,जिनकी संख्या 3 से 4 हजार के आसपास है। प्रतिदिन इंदौर-रतलाम आते-जाते है। यदि इन यात्रियों की सुविधा का ध्यान नहीं रखा गया तो यह माना जाएगा कि रेल प्रशासन रेल यात्रियों की सुविधा कम अपनी सुविधा का अधिक ध्यान दे रहा है।

जनप्रतिनिधि, कर्मचारी संगठन व पत्रकारों को आवाज उठाना होगी

जनप्रतिनिधियों एवं रेल कामगारों की यूनियनों,कर्मचारी संघों, अभिभाषक संघ सहित क्षेत्र के जागरूक पत्रकारों को रेल प्रशासन को कुंभकर्णी निंद और विवेकहीन निर्णय से जागृत करने के लिए आवाज बुलंद करना होगी। तभी रेल प्रशासन हरकत में आएगा,अन्यथा सेवा के इस उद्योग को रेल अधिकारी अपने मनमाने निर्णय से उपयोगहीन दुकान बनाकर रख देंगे। वैसे भी रेल प्रशासन अपनी डपली अपनी राग के लिए प्रसिद्ध रहा है। उसका जन सामान्य से कोई लेना-देना नहीं।

पैसेंजर यात्रियों की फजीहत

रेल अधिकारियों की अपनी दुनिया अलग ही चलती है। उन्हें सारी सुख सुविधा रेल प्रशासन से मुहैया होती है इसलिए उन्हें अपनी दुनिया से बाहर झांकने की फुर्सत ही नहीं है कि जन सामान्य यात्री किन परेशानियों का सामना कर रहा है। उच्च स्तर पर प्रधानमंत्री तेज गति की ट्रेन चलाने के लिए वचनवद्ध है और उन्होंने बुलेट ट्रेन लाने का सपना संजोया हुआ है, लेकिन उन्हें यह पता नहीं है कि निचले स्तर पर पैसेंजर ट्रेनों के यात्रियों की क्या स्थिति है। इंदौर ट्रेन का उदाहरण ही ले तो 6 से 8 डिब्बे की ट्रेन चल रही है, जिसमें भेड़-बकरी की तरह यात्री यात्रा करते है और ऐसी ही अनेक ट्रेनें है जिसमें सामान्य श्रेणी के कोच कम है। छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए ट्रेनों की कमी है,लेकिन न रेल प्रशासन इस ओर ध्यान देते है और ना ही रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य और जनप्रतिनिधि अपनी आवाज को रेल प्रशासन तक पहुंचाते है।

रेल सलाहकार समिति के सदस्यों की यह स्थिति हैै कि या तो  उनके सुझाव पर रेल प्रशाासन अमल नहीं करता या फिर वे महत्वपूर्ण सुझाव देने में परहेज करते है। उन्हे यह परहेज रहता है कि अगली बार कई उन्हें रेल सलाहकार समिति से पृथक न कर दिया जाए।

लोकसभा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री भी इंदौर-रतलाम ट्रेन पर ध्यान दे

सांसदों की सलाहकार समिति की बैठक कई बार महाप्रबंधक सेे साथ होती है और कई सलाहकार समितियों में क्षेत्रीय सांसद भी है। इंदौर की सांसद तो लोकसभा अध्यक्ष है और क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत भी है। लेकिन उन्हें जिस ताकत से अपनी आवाज रेल मंत्रालय तक पहुंचाना चाहिए नही पहुंचाते। इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन ने केवल इंदौर क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा का ही ध्यान रखा जबकि उन्हें पूरे मालवा की ओर ध्यान देना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर वह बैठी है उन्हें चाहिए कि महू-चित्तौड़ के बीच रेल यात्रियों की सुविधा की चिंता करे। रतलाम-इंदौर के बीच जब गैैज कन्वर्शन हो चुका है,ऐसी स्थिति में मुंबई जाने वाली ट्रेनों को भी गौतमपुरा फतेहाबाद होकर रतलाम के बीच नई ट्रेनें चलाना चाहिए या फिर कुछ टे्रनों की मार्ग बदलकर इस रूट पर संचालित किया जाए, ताकि इंदौर रतलाम के बीच नई ट्रेन लोगों को मिल सके। अभी मुंबई जाने वाली सारी ट्रेनें उज्जैन,नागदा, रतलाम होकर जा रही है।

इंदौर से देर शाम को चलने वाली ट्रेन…

रतलाम से तो यह ट्रेन प्रात: 6 बजे समय से चलती है,लेकिन वहां से देर शाम को चलने वाली ट्रेन हमेशा एक से डेढ़ घंटा लेट रतलाम पहुंचती है। अफसोस की बात है कि अपडाउन करने वाले यात्री इस ट्रेन के सफर से थक कर चूर हो जाते है, लेकिन कई महिनों से लेट-लतीफी चलने वाली इस ट्रेन की गति की ओर विलम्ब से रतलाम पहुंचने के कारणों की जांच मंडल के अधिकारी शिकायतों के बाद भी नहीं करते।

दैनिक यात्री संघ का सुझाव

अजमेर, रतलाम, भोपाल ट्रेन में (इंदौर,जयपुर के कोच) रतलाम में ही अलग करके (अभी उज्जैन में कटते है)  6 बजे इंदौर के लिए चलाए। एवं वापसी में इंदौर से शाम 8 या 8.30 बजे चलाए जिसे रतलाम में जोड़ दिया जाए।

नागदा शटल के रेक को सुबह 6 बजे, इंदौर सेे महू वापसी में पूर्व निर्धारित समय उज्जैन होते हुए नागदा चलाए। प्रात: 6 बजे वाली डेमू को रतलाम से 7.30 बजे चलाए और 11.30 वाली 10.30 बजे जिससे नीमच,मंदसौर,डेमू की कनेक्टीवीटी हो सके।

इंदौर-उदयपुर ट्रेन को व्हाया फतेहाबाद चलाए,ताकि प्रात: 6.30 बजे इंदौर के लिए अतिरिक्त ट्रेन चलाने की आवश्यकता न रहे। इसी में रतलाम दो जनरल कोच जोड़ दिए जाए। अब क्यू ट्रेक का कार्य भी पूर्ण हो चुका है,इसलिए नवीन ट्रेनों के संचालन की कार्ययोजना के लिए अभी से सोचा जाए। इंदौर में नए प्लेटफार्म का विस्तार हो चुका हैै एवं डबल डेकर ट्रेन का संचालन भी बंद हो चुका है अत: रतलाम से इंदौर और इंदौर से रतलाम के बीच ट्रेनों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जाए,साथ ही समय सारणी का निर्धारण पूर्व मीटरगेज ट्रेन के समय के अनुसार किया जाए,ताकि डेली अपडाउन करने वाले यात्रियों के साथ ही अन्य यात्रियों को आवागमन की सुविधा हो सके। इसी के साथ ही यात्री संघ ने रेल प्रशासन को कई महत्वपूर्ण सुझाव भेेजे है,ताकि यात्री सुविधा का विस्तार हो सके।

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