रोहतक के कर्मवीर ने रचा इतिहास, खून से लिखी गीता

चंडीगढ़ हरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गांव के रहने वाले पंडित कर्मवीर कौशिक ने अपने खून से गीता और कुरान को लिखे हैं। कर्मवीर का कहना है कि उसे यह विचार देश को एक सूत्र में जोड़े रखने के लिए आया। तभी उन्होंने अपने खून से लिखने का निर्णय लिया। कर्मवीर बताते हैं कि लगभग तीन साल में 186 पन्नों की श्रीमद्भगवत गीता लिखी और लगभग 7 साल में 369 पन्नों में कुरान-ए-शरीफ को लिखा।  30 दिसंबर 2015 को उन्होंने अपने जन्मदिन पर कुरान-ए-शरीफ को पूरा किया। कर्मवीर ने बताया कि उन्होंने एक मोरपंख से दोनों ग्रंथ को लिखा है। सुई चुभाकर अंगुली से खून निकालकर पीपल के पत्ते पर खून एकत्रित करके मोरपंख से कागज पर लिखकर दोनों ग्रंथ को पूरे किए।

वर्ष 2005 की बात है, जब जवानी के जोश में मामूली से झगड़े के बाद वह प्रतिद्वंद्वी युवक को मरहम-पट्‌टी करवाने के लिए गोहाना में डॉ. श्याम के पास ले गए थे। पेशे से डॉक्टर होने के साथ साहित्यकार और विचारक श्याम सखा ने कर्मवीर को वृंदावन घुमाने का प्रस्ताव रखा और उन्होंने स्वीकार कर लिया। वहां जाने के बाद ऐसे रमे कि वहीं रहकर श्याम धुन में रंग गए। इसी दौरान श्रीमद्भगवद गीता का अध्ययन करते-करते एक दिन उनके मन में इसे अपने हाथों से लिखने का विचार आया। पंडित कर्मवीर बताते हैं कि बीते वर्ष हरिद्वार में उन्हें एक अंग्रेज ने उनकी पांडुलिपियों के लिए 5 करोड़ रुपए देने का ऑफर किया था, मगर वह किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं कर सकते। उनका कहना है कि वे पैसे के लिए यह काम नहीं कर रहे हैं। समाज और धार्मिक सद्भावना के लिए उनका यह प्रयास है। हालांकि कर्मवीर आर्थिक रुप से बहुत कमजोर है, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने यह पांडुलिपि नहीं बेची।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY