सम्मान का स्वााद बचाने के लिए परहेज तो करना पड़ेगा

23 जुलाई को मैंने इसी कॉलम में, मध्यनप्रदेश विधानसभा में नगरीय विकास मंत्री मायासिंह की ओर से वरिष्ठ विधायक बाबूलाल गौर से पूछे गए एक तीखे सवाल का हवाला देते हुए लिखा था कि ‘’इस सवाल में छिपा संकेत गौर साहब को समझना होगा। निश्चित रूप से वे पार्टी के वरिष्ठं नेता हैं, सदन में उनका सम्माान भी है। लेकिन खुद को खबर बनाने की अनावश्यतक कोशिशों से उन्हें बचना होगा। सुर्खियों में बने रहने के लिए गौर साहब ने अपनी पीड़ा को जिस तरह खीज के रूप में प्रस्तु त करना शुरू कर दिया है, उसके चलते इस बात की पूरी संभावना है कि वे अपना वर्तमान सम्मारन भी खो बैठें। निश्चित रूप से सरकार या पार्टी में कोई भी उनका असम्मामन नहीं चाहेगा, लेकिन यदि उन्हों ने खुद को सक्रिय दिखाने के लिए संयम से समझौता किया, तो उसकी परिणति शायद उन्हेंन और अधिक ठेस पहुंचाने वाली होगी। आडवाणीजी का उदाहरण सबके सामने है…’’
और ठीक वही हुआ जिसकी आशंका मैंने व्याक्तग की थी। मंगलवार को पहले कैबिनेट की बैठक में और बाद में मुख्यामंत्री शिवराजसिह चौहान के विशेष प्रभाव वाले जिले विदिशा में जो आवाज उठी, उसने साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की सरकार और संगठन में पैंतरेबाजी चरम पर है। कैबिनेट की बैठक में खुद मुख्यसमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने संकेतों ही संकेतों में कुछ लोगों पर निशाना साधा। मीडिया में उनके हवाले से जो कथन छपा है वह ध्यालन देने योग्य है- ‘’डाल को मत काटो। मंत्री या अन्यन आपस में ऐसे बयानों से बचें जिससे पार्टी को नुकसान हो। छवि पर असर पड़े। कैबिनेट में हम एक दूसरे से बात कर सकते हैं। लेकिन सदन में कोई बात हो या बाहर कोई बयान दिया जाए, चाहे फिर वह कोई वरिष्ठं या कोई अन्यई ही क्योंय न हो, हम सरकार में हैं, इसलिए जिम्मे दारी से उसका जवाब दें। हां में हां न मिलाएं।‘’ यह बात कहते समय जो नाम मुख्यममंत्री ने खुलकर नहीं लिया, कैबिनेट की बैठक में ‘बाबूलाल गौर’ का वो नाम सरकार के प्रवक्ताे और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तबम मिश्रा ने ले लिया।
अब पता नहीं यह मंत्रिमंडल की बैठक में उठे इस मुद्दे का असर था या कोई प्रत्य क्ष या परोक्ष संकेत कि शाम होते होते विदिशा से वह खबर भी आई गई जिसकी आशंका थी। 30 जून को हुए शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तागर में राज्यय मंत्री बनाए गए, परसराम मीणा ने सीधे सीधे गौर साहब को पार्टी से निकाल बाहर करने की मांग कर डाली। मीणा ने कहा कि पार्टी ने गौर साहब को क्या -क्या नहीं दिया, उन्हें पार्टी के कारण ही मान मिला, सम्मा।न मिला। मीणा ने गौर साहब की पुत्रवधू और भोपाल की पूर्व महापौर कृष्णाा गौर को भी निशाने पर लिया और कहा कि उन्हेंम भी महापौर की कुर्सी गौर साहब के कारण ही मिली। लेकिन गौर को जब से मंत्रिमंडल से हटाया गया है, तब से वे पार्टी और सरकार के खिलाफ बोल रहे है। उनके बयानों से कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का मौका मिल रहा है। गौर लगातार कांग्रेसियों के संपर्क में है। वे कांग्रेसियों के साथ मिलकर सरकार को संकट में डालना चाहते है।
बुधवार को मीणा ने यही बयान विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान दोहराया। उनके अलावा मुरैना जिले के सुमावली के भाजपा विधायक सत्यहपालसिंह सिकरवार ने भी गौर पर कार्रवाई करने की मांग की।
दरअसल बाबूलाल गौर और सरताजसिंह को पिछले माह हुए शिवराज मंत्रिमंडल के फेरबदल में, उम्रदराज होने के कारण हटा दिया गया था। उसके बाद से सरताजसिंह तो ज्यातदा नहीं बोल रहे हैं, लेकिन बाबूलाल गौर के बयानों ने पिछले करीब एक माह के दौरान सरकार और पार्टी दोनों को सार्वजनिक रूप से और विधानसभा के भीतर भी मुश्किल में डाला है। गौर के सवाल बहुत चुभते हुए हैं और इनकी चुभन वे जिन्हेंे महसूस कराना चाहते हैं, उन्हेंक महसूस हो भी रही है।
लेकिन मुद्दा बाबूलाल गौर के सवाल उठाने का नहीं है, ऐसा लगता है कि जो प्रतिक्रिया हो रही है वो उनके तरीके को देखते हुए है। गौर साहब को समझना होगा कि जिस पार्टी में उन्होंेने अपनी पूरी राजनीतिक जिंदगी खपा दी, उस पार्टी की तासीर अब बदल गई है। अभी तो उन्हें उम्र का तकाजा याद दिलाते हुए मंत्रिमंडल से हटाया गया है, इससे पहले कि उन्हेंा नई तासीर की नई पीढ़ी, सरेआम हड़काने लगे उन्हेंि अपने सम्मांन की रक्षा कर लेनी चाहिए। मैंने अपने कॉलम में पहले भी लिखा था कि लालक़ष्ण आडवाणी जैसे कद्दावर नेता का हश्र सबके सामने है। गौर यदि सोचते हैं कि उनके तीखे या बगावती तेवरों से ही उनकी पहले जैसी पूछपरख बनी रहेगी, तो शायद यह उनकी गलतफहमी है।
यह मीडिया के नए दौर का बनाया हुआ माहौल है, जो रोज नए चटखारे चाहता है। कहीं ऐसा न हो कि मीडिया की रेसिपी के लिए मसाला मुहैया कराते कराते गौर खुद बेस्वााद हो जाएं। क्यों कि मीडिया की जीभ का कोई भी स्वाुद कभी स्थावयी नहीं होता। गौर साहब के पास मंत्री पद का चटखारेदार स्वा‍द न बचा हो, लेकिन वरिष्ठेता के सम्मा न की मिठास वे बरकरार रख सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें उम्र के तकाजे को ध्याकन में रखते हुए ‘मसालेदार’ चीजों से परहेज तो करना ही होगा।

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