इलैया राजा टी गए तो माफियाओं के फिर हो जाएंगे हौसले बुलंद

भिण्ड। मध्यप्रदेश में एक बार फिर तबादलों का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में यदि भिण्ड जिलाधीश इलैया राजा टी का अभी स्थानांतरण हुआ तो भाजपा प्रदेश सरकार की किरकिरी होगी और कांग्रेस के साथ-साथ माफियाओं को मिलेगी स्वयं भू वाहवाही। विगत एक साल में उन्होंने अंचल में जहां क्राइम को रोकने में सफलता पाई है, तो वहीं माफियाओं पर अंकुश लगाया है। अगर भिण्ड से चले गए, तो विकास तो अवरुध होगा ही, साथ ही माफियाओं के हौसले फिर से बुलंद हो जाएंगे और अपराधों का ग्राफ भी बढ़ जाएगा।

वर्तमान में जिस तरह विकास की दृष्टि से पिछड़े भिण्ड जिले को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे का काम ईमानदार स्वच्छ प्रशासन के जरिए किया जा रहा है, उससे 90 फीसदी आमजन खुश है, जिस तरह आम व्यक्ति की शिकायत के निराकरण वाट्सएप पर महज मेसिज डालने से हो रहा है, उससे सबसे ज्यादा गरीब तबके के चेहरों पर मुस्कुराहट दिखाई दे रही है, भिण्ड को स्वच्छ बनाने, नकल मुक्त बनाने, विद्यालयों में अच्छी शिक्षा व्यवस्था कायम करने की जो अच्छी पहल जिलाधीश ने शुरू की है, वह अभी सिर्फ शुरुआती दौर में है।

यदि जिलाधीश के अच्छे कामों के बाबजूद भी उनका प्रदेश सरकार स्थानंतरण करती है तो आम जनता के बीच यही संदेश जाएगा कि भाजपा नहीं चाहती कि भिण्ड का विकास हो, यह भी प्रमाणित हो जाएगा, क्योंकि जिलाधीश के अच्छे काम से नकल माफिया, शिक्षा माफिया, खनिज माफिया, भूमि माफिया के साथ-साथ दो प्रतिशत ऐसे लोग जिनके काले कारनामे जिलाधीश की ईमानदार कार्रवाई से प्रभावित हो रहे हैं, स्थानांतरण उनकी जीत होगी।

एक ओर चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां दावा करती हैं कि विकास को करने के लिए पांच वर्ष कम पड़ते हैं इसलिए उन्हें ज्यादा समय का मौका मिलना चाहिए और जनता ने उनकी इस नीतिगत बात का मान रखा और कांग्रेस को लगातार 10 वर्ष और भाजपा 15 सालों से लगातार सत्ता पर काबिज है, अब यदि भिण्ड की जनता चाहती है कि वर्तमान जिला प्रशासन की सेवाएं कम से कम तीन वर्षों के लिए भिण्ड मेें रहनी चाहिए तो क्या गलत चाहती है।

जिलाधीश ने भिण्ड पदस्थापना के बाद वर्षों से गंदे पड़े भिण्ड बस स्टैण्ड को स्वच्छ व साफ बनाने की प्रदेश सरकार की मंशा को महज पांच दिनों में कर दिखाया, उन्होंने प्रदेश में इस मुद्दे पर अब्बल स्थान प्राप्त किया। शायद भिण्ड के लिए यह पहले जिलाधीश होंगे जिनको रात को 12 बजे भी साइड पर देखा गया, यही नहीं रात्रि में यदि 12 बजे भी कोई जिलाधीश को समस्या से अवगत कराता है तो वे उस समस्या को त्वरित कार्रवाई में जुट जाते हैं। शहर के सदर बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल में अलग से हॉकरजोन का भी निर्माण हो चुका है, यदि जिलाधीश का स्थानांतरण हुआ तो हॉकरजोन बनेगा आवारा पशुओं का अड्डा। यही नहीं नगर पालिका में हो रही तमाम घोटालों को उजागर कर उसमें ईमानदारी से कार्य हो यह पहल भी की है, वह भी ठण्डे बस्ते में चली जाएगी।

भिण्ड जिले में यदि सबसे कठिन काम को उन्होंने अंजाम दिया है तो वह नकल पर नकेल लगाने का कार्य है, फर्जी शिक्षण संस्थाओं में तालाबंदी के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई शुरू हो इसकी भी पहल कर रहे हैं, वह भी अधूरी रह जाएगी, सुरक्षा कानून व्यवस्था के मामले में भी भिण्ड को असमाजिक तत्वों पर नकेल डालने में पुलिस अधीक्षक भी जिलाधीश के परस्पर सहयोग से कामयाब हुए हैं।

यह भिण्ड का दुर्भाग्य ही है कि जब-जब भिण्ड को ईमानदार स्वच्छ प्रशासन मिला उसे गंदी राजनीति ने टिकने नहीं दिया, चाहे मनीष सिंह रहे हों या फिर आईपीएस गाजीराम मीणा, आईएएस एम. गीता, सुब्रत साहू या संजय जोशी उनको बीच में ही अपने विकास के अधूरे सपने को छोडक़र जाना पड़ा है।

भिण्ड जिले से ईमानदार अधिकारी का स्थानांतरण होता है तो उसमें उस अधिकारी का कोई नुकसान नहीं होता, नुकसान तो यहां की आम जनता का है। यदि वाकई में जिलाधीश के अच्छे कार्य से मुख्यमंत्री व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी खुश हैं तो उन्हें चाहिए होनहार युवा जिलाधीश को कुछ समय भिण्ड में ही रखा जाए। यदि उनके अच्छे काम के पुरुष्कार बतौर उन्हें अच्छे स्थान पर पहुंचाया जाता है तो व्यक्तिगत रूप से इलैया राजा टी तो उपकृत हो जाएंगे लेकिन पिछड़े इलाके की गरीब जनता के साथ अन्याय होगा। महानगर तो पूर्व से ही विकसित हैं और वहां रहने वाले लोग भी जागरुक हैं।

प्रदेश सरकार को चाहिए कि कांग्रेस के वर्षों के शासन काल में विकास से महरूम रहे भिण्ड के विकास की भाजपा सरकार ने इलैया राजा टी, नवीनत भसीन, आईएएस सीईओ प्रवीण सिंह व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमृत मीणा को लम्बे समय तक भिण्ड में रहने की जरूरत है। ताकि भिण्ड भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। जिलाधीश के स्थानांतरण की खबर मात्र से शिक्षा माफिया, नकल माफिया, खनिज माफिया, भू माफिया के हौंसले बुलंद हो गए हैं और कांग्रेस भी ताल ठोकने में पीछे नहीं है कि उसके दवाब के चलते जिलाधीश का स्थानांतरण हुआ है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY