कुंडली में शुक्र के प्रभाव से प्राप्त होता है भौतिक सुख

प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा रहती है कि उसका जीवन सुखपूर्ण रहे, उसे जिंदगी में कभी किसी चीज की कमी न रहे। किसी को तो यह सुविधा जन्मजात ही नसीब होती है, किसी को मेहनत से प्राप्त होती है और किसी को प्राप्त ही नही होती हैं। यह सब व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति सुनिश्चित करती है।

हमारी कुंडली में 12 घर 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं, वैदिक ज्योतिष के अनुसार हमारे जीवन की हर छोटी से छोटी घटना इन 12 घरों 12 राशियों और 9 ग्रहों से जुड़ी होती हैं।

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को शुभ ग्रह माना गया है। ग्रह मंडल में शुक्र को मंत्री पद प्राप्त है। यदि कुंडली में शुक्र ग्रह शुभ प्रभाव देने वाला होता है तो व्यक्ति को अपने पूरे जीवन में हर भौतिक सुख की प्राप्ति होती है। शुक्र के विशेष प्रभाव से वह जीवनभर सुखी रहता है। शुक्र के शुभ प्रभाव के चलते व्यक्ति सौम्य एवं अत्यंत सुंदर होते है। यदि किसी की कुंडली में शुक्र शुभ प्रभाव देता है तो वह जातक आकर्षक, सुंदर और मनमोहक होता है।

शुक्र लग्र द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव में स्थित हो तो धन, सम्पत्ति और सुखों के लिए अत्यंत शुभ फलदायक है। सशक्त शुक्र अष्टम भाव में भी अच्छा फल प्रदान करता है। शुक्र अकेला अथवा शुभ ग्रहों के साथ शुभ योग बनाता है। चतुर्थ स्थान में शुक्र बलवान होता है। इसमें अन्य ग्रह अशुभ भी हों तो भी जीवन साधारणत: सुख कर होता है।

सप्तम भाव में शुक्र की स्थिति विवाह के बाद भाग्योदय की सूचक है। शुक्र पर मंगल के प्रभाव से जातक का जीवन अनैतिक होता है और शनि का प्रभाव जीवन में निराशा व वैवाहिक जीवन में अवरोध, विच्छेद अथवा कलह का सूचक है।

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