गणपति विसर्जन के साथ गणेशोत्सव की हुई समाप्ति

इंदौर/भोपाल। दस दिनों तक गणेशजी की उपासना कर गुरुवार को गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के बीच गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन हो गया।

गणेशजी की पूजा करने के बाद दसवें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा अर्चना कर विदा किया। घरों में अंतिम दिन भी छप्पन भोग, मोदक आदि का भोग लगाकर प्रसाद बांटा गया तथा गणेशजी को मूहूर्त में विसर्जन की प्रक्रिया का पालन किया गया।  मिट्टी की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नगर निगम ने कई स्थानों पर कुंड बनाए थे लेकिन समय रहते तैयारी नहीं होने से दोपहर बाद विसर्जन का काम शुरु हुआ जो देर रात चलता रहा। वहीं पीओपी की मूर्तियों को अलग से एकत्रित किया गया जिन्हे विसर्जन करने की अलग व्यवस्था होगी।

इसके अलावा शहर में चौराहों पर पीओपी की गणेश मूर्तियों को अलग से रखा गया ताकि उन्हे विसर्जन के लिए अलग से व्यवस्था की जा सके। महापौर मालिनी गौड़ ने भी लोगों के साथ मिलकर इन कुंडों में विसर्जन कर तालाबों के संरक्षण का संदेश दिया। उनका कहना था कि गणेशजी का सुरक्षित विसर्जन करने से तालाबों को गंदा व प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। नगर निगम के इस कदम की जमकर लोगों ने सराहना की।

पालदा क्षेत्र में भव्य पांडाल में विराजे पालदा के राजा को विसर्जन के लिए मुंबई ले जाया गया। इसके लिए बड़ी संख्या में चल समारोह निकालकर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे तथा बप्पा को अंतिम विदाई दी। हर साल गणेशजी को मुंबई ले जाया जाता है तथा वहीं विसर्जन किया जाता है इस साल भी समिति द्वारा पालदा के राजा को मुंबई ले जाया गया।

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