मलेरिया की जांच के लिए गठित टीमें गायब, बढ़ते मामलों को रोकने बनाए गए थे टीम

भोपाल। बिगड़ते मौसम के मिजाज के साथ ही प्रदेशभर में मलेरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। अनेक शहरों में चकिनगुनिया और डेंगू के मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी लोगों की सेहत को लेकर अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य विभाग से दो टूक कहा गया है कि वह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी जरूरी इंतजाम पहले से तय कर रखें। मलेरिया की जांच के लिए टीमें बनाई गई हैं लेकिन मौके पर एक भी मौजूद नहीं है। इस मामले में दस्ते स्वास्थ्य विभाग की आंख में धूल झौंक रहे हैं।

इधर राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के अनेक शहरों में मलेरिया तेजी से अपने पैर पसार रहा है। गुना में तो लापरवाही के सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अस्पताल की ओपीडी में लगातार बीमारों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। वायरल के साथ ही मलेरिया और फेल्सीफेरम के मामले में काफी इजाफा हुआ है। ताजा स्थिति में समूचे जिले में 351 मलेरिया मरीज मिले हैं। इसके साथ ही फेल्सीफेरम के आठ मामले की जांच के बाद पॉजीटिव रिपोर्ट आई है। जिला अस्पताल में भी सैकड़े से अधिक मरीजों के ब्लड सेंपल लिए गए हैं। हालांकि इनकी जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई हैै। चिकित्सों ने आशंका जाहिर की है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मलेरिया मरीजों की तादाद और भी बढ़ सकती है।

आधा दर्जन टीमों को वार्डो में घर-घर दस्तक देकर बुखार एवं संक्रमित व्यक्तियों के ब्लड सेंपल लेने के निर्देश स्वास्थ्य महकमें ने दिए थे। गुरुवीर के दिन टीम को वार्ड क्रमांक चार सहित अन्य वार्डो में भेजा गया था। लेकिन टीमें वार्डो में पहुंची ही नहीं। जब इनकी जांच की गई तो टीमें वार्डो से गायब मिली। इसके साथ ही वार्डवासियों से पूछताछ करने पर उन्होंने इस बारे में अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। इतना ही नहीं वार्ड पार्षदों ने भी इस बात की गवाही दी कि टीमें उनके वार्ड में मरीजों की जांच करने नहीं पहुंची। इन टीमों को जांच करने के साथ ही कालोनियों और घरों में भरे हुए पानी में लार्वा की जांच करनी थी। लेकिन टीमें यहां पहुंची ही नहीं।

जब इन टीमों की खोज खबर की गई तो पता चला कि यह टीमें वार्ड में न पहुंचकर टीकाकरण कार्य में उलझी हुई हैं। इस बात की तस्दीक अस्पताल जाकर की गई। 

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