हर दिन बनायें बच्चों के लिए हेल्दी टिफिन

बच्चों के स्कूल जाने से पहले अभिभावकों द्वारा पढ़ाई से संबंधित हर चीज पर विशेष ध्यान दिया जाता है लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर उनके द्वारा लापरवाही बरती जा रही है।

आजकल बच्चों के टिफिन में फास्टफूड सबसे ज्यादा पाया जाता है। अब पराठे, सब्जी रोटी की जगह चाऊमीन, चिप्स, सेंडविच स्कूली बच्चों के लंच बाक्स का मेनू बन गया है। जो कि बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों के टिफिन में खाद्य सामग्री देने में सावधानी बरतनी चाहिए।

प्रोटीनयुक्त हो टिफिन
बच्चों को लंच में जरूरी विटामिन और कैलोरीज की जरूरत होती है जो उन्हें फास्ट फूड से नहीं मिलती है। वहीं जंक फूड बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी कम करता है। ऐसे में बच्चों को विटामिन और प्रोटीन से भरा टिफिन देना चाहिए। इसके लिए बच्चों के लंच बॉक्स में हरी सब्जियां, फल आदि रखना चाहिए, जो कि उनके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं।

प्लास्टिक के टिफिन बॉक्स ठीक नहीं
चिकित्सकों का मानना है कि बिना फूड ग्रेड सर्टिफिकेट वाले प्लास्टिक के लंच बॉक्स से रसायनों का रिसाव होता है, जो खतरनाक हो सकता है। वहीं प्लास्टिक बोतलों में रखा पानी एक बार फ्रिज या एसी वाले वातावरण से गर्म वातावरण में जाता है, तो इनमें रसायन का तेजी से रिसाव होता है। जो बच्चों की सेहत पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। इसे देखते हुए बच्चों के लंच बॉक्स खरीदते समय भी अभिभावकों को हमेशा विशेष ध्यान रखना चाहिए।

विज्ञापनों का गहरा प्रभाव
बच्चों के दिमाग पर विज्ञापनों का भी गहरा प्रभाव है। जिस तरीके सेविज्ञापन कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर लोगों को फास्ट फूड्स की तरफ आकर्षित करती हैं। लिहाजा बच्चे लंच बाक्स में अपनी पसंद और जिद के मुताबिक इसे ले जाने लगते हैं। वहीं इसके पीछे अभिभावकों का आलस और जल्दबाजी भी मुख्य कारण है।अभिभावक बच्चे की जिद के आगे और कम समय होने के चलते उनकी सेहत की परवाह किए बगैर लंच बॉक्स रखकर थोड़ी देर की खुशी तो बच्चों को दे रहे हैं, लेकिन बच्चों की सेहत के साथ किया गया यह खिलवाड़ उन्हें आने वाले दिनों में मंहगा पड़ सकता है।

स्कूल प्रबंधन दे अभिभावकों को समझाईश
स्कूलों में बच्चे क्या खा रहे हैं, क्या पी रहे हैं, इस पर स्कूल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं रहता है। बच्चों के लंच बॉक्स को लेकर स्कूल प्रबंधन की भी नजर रहनी चाहिए। इसके लिए स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों का प्रतिदिन टिफिनचेक करना चाहिए। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधकों को बच्चों के टिफिन को लेकर अभिभावकों को सम्य – समय पर समझाइश भी देनी चाहिए।

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