चेक पेमेंट वाली शादी…!

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Dr Mahesh Sharma, Minister of State of Culture & Tourism during the Idea Exchange. Express photo by Renuka Puri.

 

अच्छा हुआ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल ने इस बात की खात्री कर ली कि देश में मंत्रियों की संतानों की शादियों के पेमेंट चेक से ही हो रहे हैं। उनकी चिंता यह भी रही वीआईपी बेटे- बेटियों की शादी में ढाई लाख की कैश सीमा का उल्लंघन तो नहीं हो रहा और इसके लिए नए नोट ‍बिन दिक्कत मिल रहे हैं या नहीं। केजरीवाल परिवार में पले राजनेता हैं, इसलिए घर गृहस्थी की ‍तकलीफों का उतना ही खयाल रखते हैं। ऐसे में केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री डाॅ महेश शर्मा के यहां हो रही शादी को लेकर उनका ‘चिंतित’ होना स्वाभाविक ही था। यह बात अलग है कि केजरीवाल के पास उपलब्ध जानकारी आधी- अधूरी थी। केजरीवाल के ट्वीट पर कुछ नाराजी से ही सही, डाॅ महेश शर्मा ने जवाब दिया कि मेरे बेटे की शादी है, बेटी की नहीं। दूसरे, मैं सारे पेमेंट चेक से कर रहा हूं। इसके बाद शक की कोई गुजाइंश नहीं रही कि नोटबंदी के बाद कम से कम मंत्रियों के यहां तो शादियां ‘एक नंबर’ में ही हो रही हैं।

जानकारी इसलिए भी सुकूनदायक थी क्योंकि नोटबंदी के बाद शादियों को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही थीं, उससे लगने लगा था कि सभी वर- वधुअो और उनके  मां- बापों की कुंडली में नोटबंदी का उच्च मंगल बैठा हुआ है। मसलन नोएडा में एक शादी‍ इसलिए टूटी कि ससुराल वालों ने नोटबंदी के पहले मिला 10 लाख का नकद दहेज यह कहकर लौटा दिया कि पूरी रकम नए नोटों में चाहिए। लड़की का बाप न तो मंत्री था और न ही बैंक मैनेजर कि तुरंत इतनी रकम जुटा पाता। मुजफ्फरनगर में एक शादी इसलिए टूटी‍ कि लड़के ने दहेज में नई कार के साथ नए नोटों में कैश मांग लिया था। लड़की का  बाप कार तो ले आया पर सौ- सौ के नए नोट ला पाना उसके बस की नहीं थी। नोएडा में एक लड़की सगाई के बाद 10 दिनों से मां के साथ बैंको के चक्कर काट रही है क्योंकि उसे 1 लाख रू. नहीं मिल रहे। रतलाम के नामली में तो नोटबंदी के कारण भगवान विेष्णु की शादी भी खटाई में पड़ गई है। नोटों की इस परेशानी के मद्देनजर पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने नेक सुझाव यह दिया कि शादी के रिसेप्शन में दूल्हा- दूल्हन हाथ में कार्ड स्वाइप मशीन लेकर बैठें ताकि मेहमान लिफाफों के बजाए अपने डेबिट कार्ड से गिफ्ट दे  सकें। वैसे नोटबंदी के जंजाल में अपवादस्वरूप एक शादी ऐसी भी रही कि जो महज पांच सौ के नए नोट में चाय पर ही ‍निपट गई। नोटबंदी के इस ‘पाॅजिटिव इफेक्ट’ का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ में किया। हालांकि उन्होने यह नहीं बताया कि पाचं सौ वाली शादी में आए बारातियों ने मन में क्या सोचा।

बहरहाल केजरीवाल ने महेश शर्मा से जो सवाल किए उसमें नोटबंदी पर ईमानदारी से अमल के साथ यह आत्मीय चिंता भी थी कि मंत्री शर्मा की बेटी  की शादी  ढाई लाख में ही हो पा रही है या नहीं और हो रही है तो इतने नोट भी उन्हें बिना लाइन में लगे और बिना धक्के खाए कैसे मिल गए? और क्या सभी लोगों की किस्मत में अपने बेटे बेटी की शादी सरकारी नियम के अनुसार ही कर पाने का सौभाग्य लिखा है या नहीं?

परम संतोष मंत्री के जवाब सुनकर हुआ कि कहीं कुछ ‘गड़बड़’ नहीं है। झाड़ू लगाने से लेकर मेहंदी लगाने वाले और ज्वेलर से लेकर कैटरर तक सभी को चेक से पेमेंट किए जा रहे हैं। कहीं कोई टोटा नहीं है। चाहें तो इसे आप चेक पेमेंट शादी भी कह सकते हैं। अब सवाल सिर्फ इतना ही कि जब सब एक नंबर में ही है तो केजरीवाल को पेमेंट मोड चैक करने की जरूरत क्यों पड़ी?

 

 

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