बुलेट प्रूफ बाथरूम वाला सीएम

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शान- अो- शौकत और दरियादिली हो तो तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री कल्वकुंतला चंद्रशेखर राव जैसी। पहले वो अपनी बुलेट प्रूफ महंगी गाडि़यों के लिऐ चर्चा में रहे। इस बार बुलेट प्रूफ ाथरूम के लिए सुर्खियों में हैं। खबर है कि किसानों की आत्महत्याअों के लिए बदनाम इस राज्य की राजधानी हैदराबाद के पाॅश बेगमपेट इलाके  में सीएम राव ने 1 लाख वर्ग फीट में महलनुमा घर बनाया है। इसके चारों तरफ बुलेटप्रूफ शीशे लगे हैं। साथ ही इसके दो बाथरूमों (एक खुद सीएम के लिए और दूसरा बेटे केटीआर के लिए) में हाई क्वालिटी के शीशे लगे हैं। इनकी कीमत लाखों में है। बताया जाता है कि तेलंगाना की चौकन्नी खुफिया एजे‍ंसियों ने इसकी सिफारिश की थी। राव के घर की सुरक्षा के ‍िलए 50 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।

केसीआर विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति करते रहे हैं। उन्होने तीन पार्टियां बदली और वर्तमान तेलंगाना राष्ट्र समिति को सत्ता में लाकर इस नवीनतम राज्य के मुख्यमंत्री बने। लेकिन राज्य के लोग उन्हें सुशासन से ज्यादा शाहखर्ची के लिए ज्यादा जानते हैं। खुद को सोशल एक्टिविस्ट मानने वाले राव की रजानीति के साथ धनार्जन में भी उतनी ही महारत रही है। गृह जिले मेडक में उनका 59 एकड़ में फैला फार्म हाउस है। जिससे उनको सालाना 5 करोड़ से भी ज्यादा की आय होती है।

तंगदिली और कंजूसी शब्द राव की डिक्शनरी में ही नहीं हैं। मसलन उन्होने मुख्‍यमंत्री बनते ही अपने लिए सरकारी खर्च पर 5 करोड़ की बुलेट प्रूफ मर्सि‍डीज खरीदवाई। वे भगवान के बड़े भक्त हैं। और इसका प्रदर्शन निस्संकोच करते हैं। वे खुद को हिंदूवादी नहीं बताते लेकिन दान दक्षिणा और चढ़ावे आदि में हिंदुत्ववादियों को पीछे छोड़ते हैं। राव ने हाल ही में वारंगल की भद्रकाली देवी को 3.70 करोड़ रुपए का सोने का मुकुट चढ़ाया था। तर्क था कि उन्होंने  देवी से तेलंगाना राज्य निर्माण के लिए मन्नत मानी थी। इसके पूरी होने पर देवी को मुकुट भेंट किया। 11.7 किलो का मुकुट बनवाने राज्य सरकार ने विशेष आॅर्डर दिया था। केसीआर भगवान तिरूपति के भी अनन्य भक्त हैं। चर्चा है कि उन्होने देवता के स्वर्णाभूषण बनाने के लिए 5.59 करोड़ रू. मंजूर किए हैं।

हर राज्य के मुख्यमंत्री के लिए उसकी गरिमा के अनुरूप बंगला, सुरक्षा इंतजाम और ताम झाम रहता है। होना भी चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री के बंगले के बाथरूम भी बुलेट प्रूफ हों, यह सुरक्षा व्यवस्था का अतिरेक और जन धन का दुरूपयोग ही है। सोचें कि जब बंगले के चारों अोर कड़ा पहरा होगा तो कोई भीतर कैसे घुस सकता है ? और घुस भी जाए तो मारने के लिए वह बाथरूम ही क्यों पसंद करेगा? इससे ऐसा लगता है कि जैसे हिरण्यकश्यप को हर चीज से खतरा था, उसी तरह केसीआर को बाथरूम तक से खतरा है। या फिर बाथरूम इतना लक्जरियस हो कि मारने वाला अपना मूल काम छोड़ बाथरूम एंज्वाय करने में लग जाए। ऐसा हो तो सीएम से ज्यादा महत्वपूर्ण बाथरूम हो जाता है। आश्चर्य नहीं कि जल्द ही बाथरूम की रक्षा के लिए नए बीएसएफ ( बाथरूम सेफ्टी फोर्स) के गठन के बारे में  भी सुनने को मिले।

केसीआर के शाही शौक की काली तस्वीर यह है कि राज्य में बीते दो सालों में सूखे के कारण ढाई हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। लेकिन इसका कोई अवसाद मुख्यमंत्री की कार्य और जीवन शैली पर नहीं झलकता। यूं देश में अमीर राजनीतिज्ञों की कमी नहीं है, कई अपनी लक्जरी कोठियों और जीवन शैली के लिए चर्चित भी रहे हैं। लेकिन आंख का पर्दा की कोई चीज होती है। और किसी ने बाथरूम को भी बुलेट प्रूफ बनाने का दुस्साहस हो, ऐसा सुनने में नहीं आया। विडंबना यह है कि केसीआर खुद को जनता का मुख्यमंत्री मानते हैं, ऐसा मुख्यमंत्री बाथरूम में भी डरता हो, इसे क्या कहा जाए?

 

 

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