रंग छोड़ने वाला ‘असली‘ नोट…!

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नोटबंदी पुराण का नया क्षेपक यह है कि दो हजार के नए नोट रंग छोड़ते हैं। यह खुलासा खुद आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने किया है। नोटों को लेकर सामाजिक मिथक यह रहा है कि नोट का रंग धुलाई से फीका पड़ सकता है, लेकिन बेरंग नहीं हो सकता। अनपढ़ भी इसी हिसाब से नोट के असली-नकली होने का अंदाज लगा लेते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद सरकार का यह  दूसरा  मानसिक झटका है। नोटों को लेकर हमारे यहां कई मुहावरे और मान्यताएं प्रचलित हैं। नोट पर गांधीजी का चित्र होने से दो नंबर के कारोबार में इसे ‘गांधीजी’ के नाम से जाना जाता है। यह बात अलग है कि जिस साधन शुचिता के लिए गांधीजी जीवनभर संघर्ष  करते रहे, उसका उपहास इस अनैतिक मुद्रा विनिमय में हर कदम पर उड़ाया जाता है।

यूं पिछले एक हफ्ते से बड़े नोटों का चलन से बाहर होना, छोटे नोट न मिलना, नए नोटों का दर्शन दुर्लभ होना वगैरे जुमले चलन में हैं। इन्हीं के बीच 2 हजार के नोटों का जिक्र नई बहू की मुंह दिखाई जितना ही जिज्ञासा और रोमांच से भरा है। कुछ तस्वीरें मीडिया में छपीं, जिसमें गांधीजी की छाप वाला 2 हजार का नवेला नोट लहराते लोग दिखे। जिनके हाथों में यह नोट था, उनके चेहरे पर धन्यता का भाव था। वैसे भी इस नोट के बाजार में आने की जितनी चर्चा हुई, उतनी तो सालों पहले चलने वाले दस हजार के नोट की भी नहीं हुई होगी। यह नोट अंगरेजों के जमाने में चला करता था और आजादी के पहले बंद हो गया।

दो हजार के नोट के अवतरण के साथ हमे कई बातें समझाईं गईं। मसलन यह इसका आकार-प्रकार निराला है।  डिजीटल खूबियों वाले इस नोट में एक तरफ गांधीजी की मिरर इमेज और दूसरी तरफ मंगल यान मिशन का‍ चित्र है। चर्चा यह भी रही कि नए नोट में कुछ ऐसी गुप्त व्यवस्था है कि यह नोट कब किसके पास और कहां है यह इनकम टैक्स वाले चुटकियों में पता लगा सकते हैं। हालांकि नोट में जीपीएस सिस्टम लगा होने का वित्त मंत्री ने खंडन किया है। लेकिन हमेशा की तरह इस मामले में भी लोगों को सरकार की बात पर भरोसा नहीं हो रहा। लोग इसे ले तो रहे हैं, मगर अविश्वास के साथ। क्योंकि अाजकल कहीं कुछ भी रिकाॅर्ड होकर वायरल हो जाता है। यह तो दो हजार का नोट है। यह भी बताया गया कि नोट का रंग रोज गोल्ड है। इस रंग का नोट पहली बार आया है। हालांकि लोकमानस में तो नोटों का रंग हरा ही बसा हुआ है। ‘हरे-हरे नोट’ सुनते ही लोगों के कान और बाल दोनो खड़े होते रहे हैं। दो हजार वाला यह नया नोट इस पुरानी धारणा भी बदलेगा। कहा गया कि नया नोट साइज में अब तक के नोटों से अलग, वजन में हल्का और छूने में पतला है। माना जा सकता है कि पुराने हजार वाले नोट के मुकाबले नए दो हजार के नोट में वो ‘वजनदारी’ नहीं है।

बकौल शक्तिकांत दास सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नए नोट पर रूई रगड़ो तो वह रंग छोड़ने लगेगा। हालांकि  उन्होने यह स्पष्ट नहीं किया कि रंग छोड़ने से मतलब रंग बदलना है या फिर बेरंग होना है। दास की दलील है कि नए जमाने के इस नोट का रंग छोड़ना ही उसके ‘असली’ होने की निशानी है। न छोड़े तो समझो कि वह नकली है। देसी समझ में अब तक रंग जमाने   वाली चीजें ही असली समझी जाती थीं। नए नोट ने इस मिथक को भी तोड़ा है। यानी जो बदलता है वही खरा है। पक्के रंग में रंगने का जमाना गया। जब नोट भी कच्चे रंग में हो तो कोई मन को क्या रंगाएगा?

 

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