‘सोनम गुप्ता’और चंद सवाल ?

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सोनम गुप्ता की बेवफाई’का मुद्दा काले धन की तरह इतना सीरियस और अनश्वर होगा, यह किसी ने सोचा नहीं था। कल तक लोग इसे बीरबल के किस्से के तौर पर ही देख रहे थे। लेकिन जब यह चर्चा आईआईटी के सवाल की शक्ल लेने लगी तो मामला वाकई गंभीर होता दिखा। नोटबंदी के तुरंत बाद सोशल मीडिया में टाॅप ट्रेंड करने वाले इस मुद्दे को लेकर  आईआईटी गुवाहाटी में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में एक प्रोफेसर ने ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’को प्रॉबेबिलिटी सवाल के रूप में पूछा। इसे फेसबुक पर शेयर किया गया, जिसपर 600 से ज्यादा लाइक्स आए। दिल्ली आईआईटी ने तो इसे केस स्टडी माना। क्योंकि जिस तेजी से ( हताशा में लिखे गए) इस वाक्य  ने पाॅपुलरिटी पाई, वह शायद सुसाइड करने पर भी नहीं मिलती।

नए और खुल्ले नोटों के समांतर यह जिज्ञासा भी जन- मन में  कुलबुलाने लगी कि आखिर यह सोनम गुप्ता है कौन? सोनम है तो गुप्ता ही क्यों है? उसने अपने अज्ञात प्रेमी से पीछा छुड़ाने  के लिए नोटबंदी का मुश्किल समय ही क्यों चुना? उसके और नोटबंदी के बीच क्या रिश्ता है? क्या सोनम अपने प्रेमी से इसलिए नाराज थी कि वह हजार- पांच सौ के बदले तुरंत नए नोट नहीं ला पाया था या फिर वह आशिक को ब्लैक मनी की तरह ट्रीट करने लगी थी। और फिर उसकी बेवफाई का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? ये तमाम सवाल उतने ही जटिल हैं जितना कि ईश्वर को जान लेना।

जिस तरह गणेशजी ने दूध पीया था, कुछ उसी तरह नोटबंदी के सैलाब के बीच अचानक 10 से लेकर 2 हजार तक के कुछ नोटों पर एक वाक्य नमूदार होने लगा-‘सोनम गुप्ता बेवफा है।’लोग उस पर रिएक्ट  भी करने लगे। बगैर यह जाने- बूझे कि इसके पीछे रहस्य क्या है? आईआईटी दिल्ली के एक प्रोफेसर ने सोनम मसले को आत्महत्या से जोड़कर देखा और अपने स्टूडेंट्स से  नोटबंदी के कारण खुदकुशी की दर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सवाल कर डाला कि क्या इससे नोटबंदी से आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ेगी या घटेगी? छात्रों ने भी इसमें काफी रूचि दिखाई क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि इस टॉपिक पर चर्चा, समाज में हो रही चीजों को समझने के लिए जरूरी है।

ट्विटर यूजर्स ने सोनम के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होने  #Modi_Bewafa_Hai ट्रेंड चलाकर नोटबंदी के फैसले की आलोचना की। लाख टके का सवाल यह है कि प्यार में धोखा खाए आशिक ने सोनम की बेवफाई को जगजाहिर  करने नोटबंदी समय क्यों चुना? क्या वह बंद हुए नोटों की अप्रासंगिकता से सोनम की बेवफाई को जोड़ना चाहता था या फिर सोनम को काले धन की तरह बदनाम कर  सियासी लाभ लेना चाहता था? यह भी हो सकता है कि सोनम अपनी गुल्लक के हजार- पांच सौ के नोट सीधे ही बदलवा आई हो और आशिक को इसमें कोई खेल करने का मौका न मिला हो। यह भी मुमकिन है कि सोनम की भावना नोटबंदी  की तरह नेक हो, लेकिन प्यार जताने के आशिक के तरीकों पर उसे विपक्ष की  तरह ऐतराज हो। लिहाजा आशिक ने सोनम को नोटों के जरिए बदनाम करने की ठान ली हो। इस काम में उसके कोई भेदभाव नहीं किया। जो बात 10 के चालू नोट पर लिखी, उसी शिद्दत 1000 के बंद नोट पर भी लिखी। लेकिन ऐसा करके उसे हासिल क्या हुआ? क्योंकि सोनम की बदनामी भी नोटबंदी  की आलोचना की तरह ही है। कब उलटी पड़ेगी, कह नहीं सकते।

 

 

 

 

 

 

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