मोदी के “वन ड्रॉप मोर क्रॉप” मिशन को शिव ‘राज’ के अफसरों का पलीता

0
198
पाइप के बंडल पर लगे स्‍टीकर में पाइप की लंबाई का बॉक्‍स खाली।

 

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सीहोर मे हुए किसान महासम्‍मेलन में “वन ड्रॉप मोर क्रॉप” पर जोर देते हुए किसानों से ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने पर जोर दिया था। उनके सपने को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना मिशन बना लिया और प्रदेश को माइक्रो इरिगेशन तंत्र के जाल से पाटने की मुहिम छेड़ दी। लेकिन मोदी के सपने और शिवराज के मिशन को उद्यानिकी विभाग के अफसर और निजी कंपनियां मिल कर चूना लगा रहा है। हमने इस श्रृंखला में होशंगाबाद और देवास में माइक्रो इरिगेशन योजना में गड़बडि़यों को उजागर किया है। अब निमाड़ से भी ऐसी ही गड़बडि़यों की सूचनाएं मिल रही है। पूरे प्रदेश में गड़बड़ी का समान तरीका है। किसानों के खेतों में न पाइप पहुंचे, न ड्रीप लगे लेकिन कंपनियों को भुगतान हो गया। मिलीभगत ऐसी कि किसानों से उनके हिस्‍से की राशि की जगह केवल हस्‍ताक्षर लिए, किसान को कंपनी ने आधे से कम सामग्री प्रदाय की और बचाई गई मोटी रकम अफसरों के साथ मिल कर डकार ली।

देश के प्रधानमंत्री मोदी और मुख्‍यमंत्री चौहान सिंचाई सुविधा तथा किसानों को आधुनिक कृषि साधन प्रदान कर समृद्ध बनाना चाहते हैं। इसीलिए केन्द्र प्रवर्तित माईक्रोइरीगेशन योजना चलाई गई है। इस योजना में सभी वर्ग के हितग्राही किसान को एक समान कुल 80 प्रतिशत का अनुदान केन्‍द्र व राज्‍य सरकार द्वारा दिया जा रहा है। केवल 20 प्रतिशत राशि कृषक से ली जाती है। इस योजना में प्रति हितग्राही अधिकतम 5 हेक्टर तक का लाभ दिया जा सकता है। राज्‍य का उद्यानिकी विभाग हर साल प्रत्येक जिले में माईक्रो इरिगेशन के लिए लक्ष्य निर्धारित करतस है। माइक्रो इरिगेशन के लिए उद्यानिकी विभाग में पंजीकृत कंपनियों को माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने का काम दिया जाता है। यहीं से खेली आरंभ होता है। कंपनियां किसानों का 20 प्रतिशत अंश स्‍वयं जमा कर देती हैं और किसान को आवश्‍यकता से कम माल प्रदाय किया जाता है। जो सामान किसानों को प्रदाय नहीं किया जाता उसमे में अफसरों को रिश्‍वत दे दी जाती है। यानि एक हेक्‍टेयर क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन के लिए 9000 मीटर पाइप की जरूरत होती है तो कंपनी 3 हजार मीटर पाइप ही देती है और बचे 6000 मीटर पाइप का पैसा डकार जाती है।

बंडल में कितना पाइप, लिखा नहीं, कैसे हो सत्‍यापन

किसानों को कम माल दिया गया है, इसका सत्‍यापन किए जाने के खतरे को देखते हुए कंपनियों ने बड़ी चतुराई से बंडल पर पाइप की लंबाई के बारे में लिखना ही बंद कर दिया है। आमतौर पर एक बंडल में 300 मीटर पाइप होता है लेकिन खरगोन, बड़वानी, खंडवा में किसानों को दिए गए बंडल में 200 मीटर से भी कम पाइप होता है। बंडल की पर्ची पर कंपनी का नाम, निर्माण स्‍थल आदि के बारे में जानकारी छापी गई है लेकिन लंबाई वाला स्‍थान खाली है। यदि कोई जांच पड़ताल करता है तो उस पर लिख दिया जाता है।

बड़ी कपंनियों ने हाथ खींचे, छोटी मैदान में

निमाड़ क्षेत्र में अरिहंत, प्रगति, दत्‍ता, स्‍वर्णभूमि जैसी छोटी कंपनियां ही माइक्रो इरिगेशन योजना में सामग्री प्रदाय कर रही है जबकि नेटाफिम (विश्‍व स्‍तर पर काम करने वाली कंपनी), जैन जैसी कुछ सालों पहले तक काम करने वाली बड़ी कंपनियों ने अपना काम समेट लिया है।

विधायक विजयसिंह सोलंकी ने खोला मोर्चा – भौतिक सत्यापन करो

भगवानपुरा विधायक विजयसिंह सोलंकी ने सुबह सवेरे को बताया कि उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई योजना में किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। किसानों के नाम पर विभाग के अधिकारी और कुछ कंपनियां वारे-न्यारे कर रही हैं। इसमें दी जाने वाली अनुदान का पूरा लाभ भी किसानों को नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जिले में 1 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए किसानों को निर्धारित अनुदान का लाभ दिया जाना है। इसके विपरीत विभाग ने ड्रिप सप्लायर एजेंसियों से सांठगांठ कर किसानों को पंजीकृत कर दिया। सोलंकी ने बताया कि इस योजना में नियमों का पालन नहीं किया गया। उद्यानिकी विभाग ने कृषि विभाग और जनपद से समन्वय नहीं किया। किसानों को उनके पंजीकरण का पता ही नहीं है। चौंकाने वाला तथ्य ये है कि पंजीकरण के नाम पर एक ही खेत होने के बावजूद एक परिवार के कई सदस्यों को पंजीकृत कर दिया। यहां तक कि एक ही किसान को दो-दो बार भी नियम विरुद्घ चयनित किया गया है। उनकी शिकायत है कि अनुमोदन के नाम पर संबंधित पटवारी, सरपंच व सचिव बिना भौतिक सत्यापन के घर बैठे अनुमोदन कर रहे हैं। नियमानुसार सामग्री का भौतिक सत्यापन खेत पर किया जाना चाहिए। उन्हें आशंका है कि इस पूरे मामले में 6 से 7 करोड़ रुपए की अनुदान का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा। यहां तक कि पंजीकरण के दौरान किसानों को संपर्क नंबर भी गलत अंकित किए गए है। नियमानुसार किसान अपनी पसंद की दुकान से ड्रिप खरीद सकता है।

 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY