मप्र में दमदारी से ‘अजेय’ रहने की जिम्‍मेदारी अजय सिंह को

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नेता प्रतिपक्ष के प्रबल दावेदार मुकेश नायक के साथ अजय सिंह

 

पूर्व मंत्री और छह बार से विधायक अजय सिंह को कांग्रेस ने एक बार फिर मप्र विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्‍व सौंपा है। अपनी आक्रामक शैली से भाजपा सरकार से लोहा ले रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्‍यदेव कटारे के निधन के उपरांत यह पद खाली हुआ था और परंपरानुसार कांग्रेस के हर खेमे से कद्दावर विधायकों के नाम इस पद के दावेदारों में शामिल थे। अजय सिंह के नाम पर दिल्‍ली में मुहर भले ही लगी हो लेकिन इस निर्णय की पटकथा भोपाल में ही लिखी जा चुकी थी।

दिग्‍गज कांग्रेसी नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री अर्जुनसिंह के पुत्र अजय सिंह को राजनीति विरासत में मिली है, लेकिन उन्‍होंने अपने अलग मुहावरे गढ़े हैं। अब उनकी शैली को आजमाने का वक्‍त आया है। खासकर, ऐसे समय में जब 13 सालों से सत्‍ता पर काबिज भाजपा को हटाने के लिए कांग्रेस में नेतृत्‍व को लेकर संघर्ष जारी है। बागी हुए विधायक नारायण त्रिपाठी पर कार्रवाई की मांग को लेकर अजय सिंह ने तीखे तेवर दिखलाए थे तथा विरोधस्‍वरूप वे लंबे समय तक विधानसभा में नहीं आए थे। कांग्रेस उम्‍मीद कर रही है कि आचरण की यह सख्‍ती ही मुद्दों पर सरकार को घेरने में उनकी सहायक बनेगी।

राजनीतिक प्रेक्षकों के कयासों के अनुरूप कांग्रेस हाईकमान ने अजय सिंह को नेता प्रतिपक्ष चुना है। यह घोषणा कांग्रेस के सड़क पर शक्ति प्रदर्शन तथा एकता दिखाने के ठीक अगले दिन की गई है। इसका यही अर्थ लगाया जा सकता है कि हाईकमान मप्र को लेकर खासा गंभीर है और पार्टी के सभी गुटों को साधने की रणनीति पर काम आरंभ हो गया है। जहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में सांसद कमलनाथ और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने साथ खड़े होने का कोई मौका नहीं छोड़ा, वहीं सदन में अजय सिंह पर भरोसा जता कर पार्टी ने कई समीकरण साधे हैं। इस नियुक्ति के बाद अगली महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारियों के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

अजय सिंह ने पार्टी का विश्‍वास जीतने की चुनौती तो पार कर ली है लेकिन इस ‘पॉवर गेम’ में उन्‍हें न केवल सरकार को ताकत से घेरना है बल्कि पार्टी विधायकों के अंदरूनी शिकवा शिकायतों से भी पार पाना है। सदन में साथी विधायकों ने भले ही अजय सिंह को बधाई दी हो लेकिन बधाई के स्‍वरों में मिठास कुछ कम महसूस हुई। ऐसे में उन्‍हें सदन के अंदर और बाहर उसी कौशल के साथ राजनीति करनी होगी जिस कौशल के लिए उनके पिता अर्जुनसिंह ख्‍यात हैं।

इस नियुक्ति के दो दिन पहले एक अनौपचारिक चर्चा में अजय सिंह ने कहा था कि पार्टी को एक ऐसे नेतृत्‍व की जरूरत है जो ‘सेक्रिफाइज’ कर सके। जो अपने हितों को पार्टी के हित में बलिदान कर दे तथा कार्यकर्ताओं की आवाज बन जाए। अब मौका आया है कि वे अपनी इस बात पर स्‍वयं खरा साबित हो कर दिखाए।

 

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