अर्जुन-छाल से बना काढा हृदय रोगियों के लिए फायदेमंद

पर्यावरण संरक्षण एवं आयुर्वेदिक व यूनानी औषधियों के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों में औषधीय पौंधो को रोपित करने तथा उन्हें गमलों में प्रदर्शित करने का अभियान शुरू किया गया। अभियान का शुभारम्भ राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चन्द्रावल (लखनऊ) के परिसर में निदेशक आयुर्वेदिक सेवाएं द्वारा अर्जुन एवं हरसिंगार के पौधे रोपित कर किया।

इस अवसर पर निदेशक आयुर्वेद डाॅ0 सुरेश चन्द्र ने बताया कि अर्जुन की छाल से बने काढे का सेवन हृदय रोगियों के लिए अत्यंत लाभप्रद है। यह हृदय धमनी काठिन्य (कोरोनरी हार्ट डिजीज) को ठीक करने के साथ-साथ यकृत विकार तथा हड्डियों को मजबूत करने में भी लाभप्रद है।

आज भी किसी बीमारी के होने पर हमें अपनी घरेलू चिकित्सा के रूप में घर के आस-पास पाये जाने वाले पेड़-पौंधों के रूप में पाई जाने वाली औषधियों की ओर ध्यान सर्वप्रथम जाता है। अतएव स्वास्थ्य संरक्षण की इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद‘ को पुनर्जीवित करने हेतु आवश्यक है कि ऐसे औषधीय पौंधो का रोपण किया जाए जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हर दृष्टि से लाभप्रद हैं। उन्होंने हरसिंगार पौंधे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसकी 11 पत्तियों का काढा बनाकर प्रतिदिन पिया जाय तो गृधसी (सियाटिका), जोड़ों के दर्द आदि वातव्याधियों को दूर करता है।

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डाॅ0 शिवशंकर त्रिपाठी ने बताया कि कचनार की छाल में शरीर की ग्रन्थियों में होने वाली सूजन को दूर करने तथा अर्बुद (टयूमर) को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता है तथा वासा (अडूसा) की पत्तियों एवं फूलों का काढा किसी भी प्रकार की खांसी को दूर करने में अत्यंत लाभकारी है।

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