शिक्षण के साथ शोध पर बल दें विश्वविद्यालय : प्रणब मुखर्जी

सोनीपत। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आज का युग तकनीकी का युग है। भारत में 757 विश्वविद्यालय हैं और 36 हजार डिग्री कॉलेज हैं। मौजूदा समय में 16 आईआईटी और 30 एनआईआईटी की स्थापना हो चुकी है। प्राचीन समय में शिक्षा की बदौलत भारत पूरी दुनिया में विश्वगुरु था। कई देशों के छात्र-छात्राएं शिक्षा लेने के लिए भारत के नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय में आते थे। आज के समय की सबसे अहम जरूरत है कि भारत को उच्चतर शिक्षा के मामले में और भी तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में युवाओं की आबादी है जिन्हें शिक्षित करने के साथ रोजगार से जोड़ना अति आवश्यक है। इसके लिए शिक्षण संस्था, कारपोरेट जगत और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाना होगा। राष्ट्रपति शनिवार को ओपी जिंदल ग्लोलब यूनिवर्सिटी में आयोजित भविष्य के विश्वविद्यालय: ज्ञान, नवाचार एवं जिम्मेदारी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि 2030-50 के बीच भारत में युवाओं की आधी आबादी 35 वर्ष से भी कम होगी। युवाओं को स्किल और गुणवत्तापरक उच्चतर शिक्षा प्रदान कर उन्हें गलोबल प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने के लिए अभी से एकजुट होना होगा।

उन्होंने जर्मनी के एकीकरण करने में अहम योगदान देने वाले चिंतक बिस्मार्क को याद करते हुए कहा कि भारत आज पूरी दुनिया में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। लोकतांत्रिक प्रणाली की बदौलत दुनिया के अन्य देश भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रहे हैं। उन्होंने देश के बड़े औद्योगिक घरानों से उम्मीद जताई कि वे उच्चतर शिक्षण संस्थान खोलने की ओर कदम बढ़ाये, जिसमें सरकार का सहयोग लिया जाये। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ शोध पर भी ध्यान देने की जरूरत है। शोध से ही भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें समस्याओं का समाधान करने वाले मस्तिष्क की जरूरत है। इसके लिए इनोवेशन का होना जरूरी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री लिंकेज के विश्विद्यालयों को चिंतन व चिंता करने की सलाह दी। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में शोध के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं को स्थापित करने पर भी बल दिया।

शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि हरियाणा गीता की जन्मभूमि है और ज्ञान, अन्वेषण और जिम्मेदारी भारत का पेटेंट है। ज्ञान ही भविष्य है और ये वो धारा है जो हर समय चलती रहती है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान भी है और विज्ञान भी, गीता शंका भी है और समाधान भी। गीता की इसी महता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने पाठ्यक्रमों में गीता को शामिल किया है। कार्यक्रम में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति नवीन जिंदल ने कहा कि आज यह सेमिनार हरियाणा प्रदेश के स्वर्ण जयंती के पावन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब हम भविष्य के विश्वविद्यालयों की बात करते हैं तो हमें अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान चाहिए। इसके लिए पाठ्यक्रमों का समावेश होना जरूरी है। इसके साथ-साथ पाठ्यक्रम रोजगारपरक हों और उन पाठ्यक्रमों की ग्लोबल स्तर पर मान्यता भी हो। इन विषयों को अगर हम ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान करेंगे तो युवाओं का बेहतर भविष्य होगा और रोजगार भी मिलेगा।

इस अवसर पर उन्होंने यूनिवर्सिटी परिसर में स्कूल आफ जर्नलिज्म शुरू करने की भी घोषणा की जिसमें आधुनिक मीडिया के बारे में बच्चों को प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों से हर साल हजारों स्नातक निकलते हैं, लेकिन उन स्नातकों की रोजगार योग्यता को लेकर बहुत ही गंभीर सवाल उठाए जाते हैं। ऐसे में हमें निश्चित रूप से देश की तरक्की तथा विकास का मुख्य स्तंभ होना चाहिए जहां से 21वीं सदी की विलक्षण प्रतिभाओं को तैयार किया जा सके। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सी राजकुमार ने सेमिनार के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय उच्चतर शिक्षा प्रणाली के समक्ष कई चुनौतियां हैं। जिनमें क्वालिटी, क्वांटिटी, एक्ससेब्लीटि और और इक्विटी से जुड़े मसलों को एक साथ हल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों में नई खोज का होना जरूरी है। इसके साथ-साथ सूचना तकनीक का उचित उपयोग भी किया जाए।

उन्होंने कहा कि शोध पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है और शिक्षण संस्थाओं की स्वायतता की रक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन पाठ्यक्रमों के साथ-साथ व्यवहारिक पाठ्यक्रमों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। दुनिया में बदलाव की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि कक्षा आधारित शिक्षण को परंपरागत शिक्षण पद्धति से निकालकर ई-शिक्षण पद्धति को अपनाना होगा। बाजार की संभावनाओं को समझने की जरूरत है ताकि उनकी जरूरतों के अनुसार मानव संसाधन को प्रशिक्षित किया जा सके। इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन, सांसद रमेश कौशिक,ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रो. वाइस चांसलर डॉ. एलिस प्रोचस्का भी मौजूद थी।

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