सेहत को खोखला कर रहे ’मल्टीविटामिन्स

प्राकृतिक जीवनशैली को दरकिनार करके जल्दी सेहत बनाने की मंशा युवाओं पर भारी पड़ती जा रही है। बाजार में दवा कंपनियों में विटामिन से भरपूर अनेकों टाॅनिक उतार दिए हैं, जो सेहत को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन विटामिन टाॅनिक की खपत बढ़ती ही जा रही हैं, जबकि यह लोगों का लीवर ठप करने के साथ ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की सौगात भी दे रहे हैं।

आलस्य में फंसकर लोग अपनी प्राकृतिक जीवनशैली को छोड़कर जल्दी सेहत बनाने के फार्मूले को अपना रहे हैं। लोगों की इसी मंशा को भांपकर दवा कंपनियों ने मुनाफे का ऐसा कुचक्र रचा, जिसके फेर में पड़ लोग अपनी सेहत को गंवा ही रहे हैं, साथ ही गंभीर बीमारियां भी पाल रहे हैं। दवा कंपनियों ने सेहत के बाजार में मल्टीविटामिन्स मार्किट में परोस रखे हैं। इन टाॅनिक पर विटामिन्स की अधिकता से होने वाले नुकसान की कोई जानकारी नहीं दी गई है। पैकेटों पर इनसे होने वाला साइड इफेक्ट भी नहीं छापा जाता। सेहत के बाजार में इन विटामिन टाॅनिक की खपत बढ़ती जा रही है और सरकारी मशीनरी हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

खुलेआम हो रहा औषधि कानून का उल्लंघन

मल्टीविटामिन टाॅनिक को दवा कंपनियों ने खाद्य पदार्थ के तौर पर पंजीकृत कराया हुआ है, जबकि उसे दवाओं के साथ दिया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि कानून के तहत इन टाॅनिक पर होने वाले साइड इफेक्ट की जानकारी छपी होनी जरूरी है, लेकिन दवा कंपनियां अपनी मनमानी करने में लगी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

कई गंभीर बीमारियों का खतरा

विटामिन्स के ज्यादा सेवन से लोगों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। विटामिन ए, विटामिन बी-3, विटामिन डी, विटामिन ई की मात्रा अधिक होने से लीवर सिरोसिस, गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकृति, यूरिक एसिड बढ़ना, पथरी, स्तन कैंसर, स्ट्रोक, लीवर फैल आदि का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही प्रोटेस्ट कैंसर भी फैलने आशंका बन जाती है। मेडिकल काॅलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. तुंगवीर सिंह आर्य का कहना है कि फूड सप्लीमेंट के साथ दी जा रही विटामिन्स में कई घात स्टेराॅयड भी पाए जा रहे हैं। फोलिक एसिड खाने से ह्दय पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ ही कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए प्राकृतिक खानपान पर ध्यान देना चाहिए।
दवा व्यापारी रजनीश कौशल रज्जन का कहना है कि खैर नगर दवा बाजार में मल्टीविटामिन्स की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है। इस खेल में दवा कंपनियांे और डाॅक्टरों की मिलीभगत है।

एफएसडीए के ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चैधरी का कहना है कि एफएसडीए के दायरे से बाहर होने के कारण इनकी जांच नहीं की जा रही। फूड सप्लीमेंट के बहाने बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया गया है। इसमें डाॅक्टरों की मल्टीविटामिन्स लिखने की आदत भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस कारण दवाओं से ज्यादा मल्टीविटामिन्स का कारोबार बढ़ रहा है।

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