हरियाणा बजट : स्वर्ण जयंती वर्ष के बजट में कोई नया कर नहीं

चंडीगढ़। हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु द्वारा वर्ष 2017-18 के लिए सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए 102329.35 करोड़ रुपए के स्वर्ण जयंती वर्ष के बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। बायो डीजल (बी-100) और सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में इस्तेमाल होने वाले सौर उपकरणों एवं कलपुर्जों को वैट से छूट देकर कर-मुक्त किया गया है। लगातार अपना तीसरा बजट पेश करते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि यह संशोधित अनुमान 2016-17 के 90412.59 करोड़ रुपये पर 13.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। बजट परिव्यय में 22393.51 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च और 79935.84 करोड़ रुपये का राजस्व व्यय शामिल है जोकि क्रमश: 21.88 प्रतिशत और 78.12 प्रतिशत है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब खाद्यान्न खरीद कार्यों को छोड़कर, बजट ने एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। योजनागत और गैर योजनागत वर्गीकरण को समाप्त करने, पूंजीगत और राजस्व खर्च तथा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों का वर्गीकरण करने जैसी कुछ नई पहलों के साथ इस बजट में शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिये अवसरंचना तथा राजस्व बढ़ाने के लिये सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी इस्तेमाल पर बल दिया गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें बदलाव के एक नये युग की शुरुआत का संदेश दिया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च की बढ़ोतरी, चरणबद्ध तरीके से बजटीय प्रावधानों के साथ विभिन्न विभागों के कुछ कार्यों को हस्तांतरित करके पंचायती राज संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण, टिकाऊ अवसंरचना का निर्माण, शासन में सुधारों का सूत्रपात, डिजिटल हरियाणा पर बल और मुख्यमंत्री की घोषणाओं का क्रियान्वयन, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर बजट में विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। बजट यह दर्शाता है कि हरियाणा की परिपक्व अर्थ-व्यवस्था सभी क्षेत्रों में मजबूत हो रही है तथा सभी मानकों पर महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्घि, प्रति व्यक्ति आय, वित्तीय घाटा, ऋण व जीएसडीपी के अनुपात या जीएसडीपी के अनुपात में कुल राजस्व में व्यापक सुधार हुआ है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि राज्य की अर्थ-व्यवस्था पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हावी रहे बढ़ते घाटा मानकों को बदलने में सक्षम हुई है। वर्ष 2016-17 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, वर्ष 2017-18 में यह 9.0 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है।

पिछली सरकार के गत पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान जीएसडीपी विकास दर कभी भी 9.0 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाई। वर्ष 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय की विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि अखिल भारतीय प्रति व्यक्ति आय 5.9 प्रतिशत की दर से बढऩे की उम्मीद है। राज्य के प्राथमिक क्षेत्र (कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र) ने वर्ष 2014-15 में 2 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि की तुलना में वर्ष 2015-16 में 3.2 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। वर्ष 2016-17 में इसके 7.0 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है। वर्ष 2014-15 में राजस्व घाटा, जोकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 1.90 प्रतिशत था, वर्ष 2015-16 में कम होकर 1.60 प्रतिशत हो गया और वर्ष 2016-17 में इसके 1.33 प्रतिशत रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए, इसे एक प्रतिशत से भी कम करने का लक्ष्य रखा है और वर्ष 2019-20 के अंत तक लक्ष्य इसे शून्य पर लाने का है। वित्त वर्ष 2017-18 में अधिकतर क्षेत्रों के लिये आवंटन बढ़ाया गया है। कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों (सिंचाई, सहकारिता और ग्रामीण विद्युतीकरण सब्सिडी सहित) को 12,784.72 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास एवं पंचायत के लिए 4963.09 करोड़ रुपये, शिक्षा क्षेत्र (प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर, तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण, खेल, कला और संस्कृति सहित) के लिए 15546.65 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 3839.90 करोड़ रुपये, उद्योग एवं खनिज विकास के लिए 399.88 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए 6859.55 करोड़ रुपये, बिजली क्षेत्र के लिए 12,685.71 करोड़ रुपये, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी के लिए 3382.84 करोड़ रुपये, शहरी विकास के लिए 4973.58 करोड़ रुपये और जिला योजना के लिए 400 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। परिवहन क्षेत्र के लिए 2549.81 करोड़ रुपये और भवन एवं सडक़ क्षेत्र के लिए 3827.70 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव है। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि किसी भी प्रयास की सफलता समाज के वंचित वर्गों के लिए उपलब्ध करवाए गए लाभों से आंकी जाती है। मैंने वर्ष 2017-18 में एससीएसपी घटक के तहत अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए विशेष रूप से 7230 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया है जोकि विकासात्मक योजनाओं के 35885 करोड़ रुपये के परिव्यय का 20.15 प्रतिशत है।

यह बजट हरियाणा को भारतीय संघ की एक जीवंत, गतिशील और उभरती इकाई के रूप में रूपांतरित करने के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के उस विजन पर आधारित है, जहां खेतों में फसलें लहलहा रही हों, उद्योग के पहिये निर्बाध रूप से गतिशील हों, कोई भी अपने-आपको वंचित महसूस न करे, लोगों में संतुष्टि का भाव हो, युवा गर्व की भावना से ओत-प्रोत हों और अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों, समाज के कमजोर वर्गों तथा महिलाओं को न केवल सुरक्षा और समान अवसर मिलें, बल्कि वे सशक्त भी महसूस करें। वित्त मंत्री ने कहा कि ‘अंत्योदय’ और ‘सरकार कम से कम-सुशासन अधिकतम’ ऐसे मार्गदर्शक सिद्धान्त हैं, जो हरियाणा को रहने के लिये एक बेहतर स्थान बनाते हैं। उन्होंने नौ प्राथमिकता क्षेत्रों पर आधारित इस विजन को पूरा करने के उद्देेश्य से एक कार्य-योजना बनाई है। यह क्षेत्र हैं – कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, अवसंरचना, शिक्षा और आईटी शासन, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, युवा और संस्कृति का विकास। राज्य सरकार ने प्रदेश में उत्तरदायी, पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन उपलब्ध करवा कर व्यवस्था-परिवर्तन के एक नए युग का सूत्रपात किया है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) इस दिशा में एक प्रमुख कदम है, जिसके तहत विभिन्न कल्याण सबसिडी वाली योजनाओं के तहत अपात्र लाभार्थियों को निकालकर अब तक लगभग 571 करोड़ रुपये की बचत की गई है।

पढ़ी-लिखी पंचायतों का चुनाव, एचसीएस अधिकारियों से लेकर पुलिस कर्मियों तक सरकारी नौकरियों में पूर्णत: योग्यता आधार पर पारदर्शी भर्ती, ऑनलाइन शिक्षक स्थानांतरण नीति, सीएम विंडो के माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी निवारण, समय पर, पारदर्शी और परेशानी-मुक्त तरीके से कम्प्यूटर के एक क्लिक पर 24 विभागों की लगभग 170 ई-सेवाओं का प्रावधान, शासन में बदलाव के कुछ महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देते समय मैंने ”सबका साथ-सबका विकास” के सिद्धान्त के अनुसार हमारे प्रगतिशील राज्य के समाज के सभी वर्गों के हितों को संतुलित करने का प्रयास किया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि आम जनता के लिए विकास के एजेंडे के मामले में सबको एक साथ लेकर चलना वर्तमान सरकार की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने कहा कि मेरा बजट अभिभाषण बड़े ध्यान व धैर्य से सुनने के लिए तथा आपके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए, मैं इस गरिमामय सदन के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूँ। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि मैं हरियाणा को चहुंमुखी विकास, समृद्धि और लोगों की भलाई के मामले में नई उचाइयों पर ले जाने के लिए राजनैतिक एवं वैचारिक मतभिन्नता से ऊपर उठकर इस पर चर्चा एवं विचार-विमर्श करने और मेरे बजट प्रस्ताव को अंगीकार करने का आग्रह करता हूं।

शिक्षा के लिए 14005 करोड़ रुपये

युवा पीढ़ी को शिक्षित, सदाचारी, कुशल और उद्योगों में रोजगार के लिए वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने 2017-18 में शिक्षा ( मौलिक, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा) के लिए 14005 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। जोकि संशोधित बजट प्रावधान 2016-17 के 11825.67 करोड़ रुपये पर 18.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सोमवार को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2017-18 के लिये अपने बजट प्रस्ताव को पेश करते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि सरकार शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने के अतिरिक्त, शिक्षा के सभी स्तरों में गुणात्मक सुधार लाने पर बल दे रही है। तकनीकी शिक्षा के और अधिक पोर्टल खोलने तथा युवाओं को सक्षम बनाने के उद्देश्य से उनका कौशल तराशने के लिये सुविधायें सृजित करने पर भी बल दिया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, राज्य में गुणवत्ता सुधार का एक कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सीखने के अंतर को पाटना और यह सुनिश्चित करना है कि पांच वर्षों में प्राथमिक कक्षाओं के कम से कम 80 प्रतिशत विद्यार्थी ग्रेड स्तरीय दक्षता प्राप्त कर लें। ”अध्ययन अभिवृद्धि कार्यक्रम (एलईपी)” के तहत प्राथमिक कक्षाओं के लिए रेमेडियल कक्षाएं शुरू की गई हैं। इसके साथ ही, अध्यापक प्रशिक्षण कोर्सों के माध्यम से अध्यापकों की क्षमता बढ़ायी जा रही है।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि स्कूल शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों, छात्रों और अन्य हितधारकों को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल टूल्स का लाभकारी उपयोग किया जा रहा है। विभाग ने स्कूल प्रशासन में निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने और प्रशासनिक तथा शैक्षणिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत एमआईएस पोर्टल विकसित किया है। शिक्षकों का न्यायोचित और मांग आधारित वितरण सुनिश्चित करने, विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करने, अपने कर्मचारियों में निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कार्य के प्रति संतुष्टि के स्तर को बढ़ाने के लिए, एमआईएस आधारित ऑनलाइन शिक्षक स्थानांतरण नीति लागू की गई है। शिक्षक स्थानांतरण की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से 12843 पीजीटी और 22588 पीआरटी को स्थानांतरित किया गया है और इसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को सभी प्रोत्साहन, छात्रवृत्तियां और अन्य लाभ आधार से जुड़े खातों के माध्यम से दिये जा रहे हैं। लगभग सभी विद्यार्थियों का आधार कार्ड के लिए पंजीकरण किया जा चुका है। वित्त मंत्री ने कहा कि भर्ती निकायों के माध्यम से नियमित कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग ने स्कूलों में अध्यापकों की तत्काल तथा अपरिहार्य कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्त अध्यापकों की सेवाएं लेने के लिए ‘सुगम शिक्षा’ स्कीम बनाई है। इसी प्रकार, स्कूलों की सम्पूर्ण स्वच्छता में सुधार लाने के लिए स्वच्छता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्राथमिक स्कूलों में ‘स्वच्छ प्रांगण’ योजना शुरू की है। वर्ष 2016-17 के दौरान 33 राजकीय मिडल एवं हाई स्कूलों को वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का दर्जा दिया गया और दो नए स्कूल भी खोले गए। इन सभी स्कूलों में कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों की शिक्षा की सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं और इन विषयों के लिए अध्यापकों के पद भी स्वीकृत किए गए हैं।

सरकार उच्चतर शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समाज के सभी वर्गों, विशेषकर जरूरतमंदों और महिलाओं तक उच्चतर शिक्षा की न्यायसंगत, सस्ती और सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, गुणवत्ता पर ध्यान केन्द्रित करते हुए विस्तार पर भी पर्याप्त बल दिया गया है। तकनीकी शिक्षा पर अत्यधिक बल देते हुए वित्त मंत्री ने वर्ष 2017-18 में तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए 487.84 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव किया है। राज्य सरकार ने इंडरी (नूंह), मालब (नूंह), छपार (दादरी), मंडकोला (पलवल) और शेरगढ़ (कैथल) में पांच नए बहुतकनीकी संस्थानों का निर्माण किया है। इसके अलावा, गांव नीमका, (फरीदाबाद) में बहुतकनीकी संस्थान के साथ-साथ एक टूल रूम/टैक्नालॉजी सेंटर चलाने के लिए लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पंचकूला और रेवाड़ी में क्रमश: 38 करोड़ रुपये और 16.85 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो नए राजकीय बहुतकनीकी-सह-बहु कौशल विकास केन्द्र स्थापित किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सिलानी केशो, झज्जर और जैनाबाद, रेवाड़ी में दो नए इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित किए हैं। इन कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2017-18 से कक्षाएं शुरू होने की संभावना है। वर्ष 2017-18 में आईआईआईटी, सोनीपत और एनआईएफटी, पंचकूला का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। भारत सरकार ने ऐसे जिलों, जिनमें बहुतकनीकी संस्थान नहीं हैं या इनकी कमी हैं, में सात बहुतकनीकी स्वीकृत किए हैं और प्रत्येक के लिए 12.30 करोड़ रुपये की अनुदान स्वीकृत की है। चीका (कैथल) और लिसाणा (रेवाड़ी) में बहुतकनीकी स्थापित कर दिए गए हैं, हथनीकुंड (यमुनानगर), उमरी (कुरुक्षेत्र), जाटल (पानीपत) और धांगड़ (फतेहाबाद) में निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है, तथा नानकपुर (पंचकूला) में कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय के बहु क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) के तहत 10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सढ़ौरा, यमुनानगर में राजकीय बहुतकनीकी स्थापित किया जा रहा है। कौशल अंतराल को भरने के लिये गंभीर तथा कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण पर बल देते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने वर्ष 2017-18 में कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के लिए 487.39 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव किया है। राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की तर्ज पर ”हरियाणा कौशल विकास मिशन” शुरू किया है। इसके तहत हर वर्ष लगभग 1.15 लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पलवल के दुधोला में विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। वर्ष 2017-18 में गांव नोहनी(अंबाला), घरौंडा (करनाल), राई(सोनीपत), इंद्री (करनाल), सतनाली (महेंद्रगढ़), सिकरोना(फरीदाबाद), मुशैदपुर (गुरुग्राम), खेवड़ा (सोनीपत), कादमा (भिवानी), सेहलंगा (महेंद्रगढ़), बराणा (पानीपत), पलवल, फरीदाबाद, हसनपुर (अंबाला) और जीवन नगर (सिरसा) में 15 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव है । इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति उप योजना (एससीएसपी) स्कीम के तहत 05 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, टंकड़ी (रेवाड़ी), नलवा (हिसार), जुलाना (जींद), कलायत (कैथल) और मुंडलाना (सोनीपत) के विस्तार का भी प्रस्ताव है।

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