हाईकोर्ट में मालवा वनस्पति के खिलाफ शासन की याचिका खारिज

इंदौर। मालवा वनस्पति की करीब पौने दो सौ करोड़ की 41.38 एकड़ जमीन पर कब्जा लेने के मामले में शासन अपील में भी हार गया है। सिंगल बेंच द्वारा उक्त मामले में कलेक्टर का आदेश निरस्त किया गया था। इसके विरुद्ध शासन द्वारा रीट अपील दायर की गई थी। जिसे दो न्यायाधीशों की बेंच ने खारिज कर दिया है। होलकर स्टेट द्वारा मालवा वनस्पति एंड केमिकल्स लिमिटेड को भागीरथपुरा में उद्योग लगाने के लिए 28 नवंबर 1944 को 41.38 एकड़ जमीन दी गई थी। तब प्रभावशील इंदौर लेंड एजुकेशन एक्ट 1919 के तहत नोटिफिकेशन होने के साथ राजस्व रिकार्ड में कंपनी जमीन की मालिक हो गई थी।

कंपनी ने जमीन मालिकों को मुआवजा भी दिया था। उसके बाद 1950 से उत्पादन शुरू हो गया और 2003 में आर्थिक स्थिति बिगडऩे से सिक यूनिट बनी और 2012 में यूनिट का प्रोडक्शन पूरी तरह बंद हो गया। उक्त जमीन के संबंध में प्रशासन को भू अर्जन और भू उपयोग को लेकर शिकायत हुई जिस पर कलेक्टर ने 07 जून 2014 को कब्जा लेने के आदेश दिए और 04 दिसम्बर को कब्जा लेने के साथ ही कारखाने पर ताले लगा दिए। इसके विरुद्ध कंपनी ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई जिस पर कहा गया कि कंपनी की सुनवाई के बगैर ही यह कार्रवाई की गई जिसके बाद 28 जनवरी 2015 को कोर्ट ने कलेक्टर को कंपनी का पक्ष सुन नया आदेश जारी करने के निर्देश दिए।

09 मार्च 15 को कलेक्टर ने फिर आदेश जारी करते हुए कब्जा लेने के लिए कहा। इसके विरुद्ध फिर कंपनी हाई कोर्ट गई तो कोर्ट ने 18 मार्च 15 को कलेक्टर को इन्हें सुनने का आदेश दिया। इसके बाद कलेक्टर ने 01 अप्रैल 2015 को नए भूमि अधिग्रहण एक्ट की धारा 16 के तहत जमीन अधिग्रहित करने के आदेश दिए। जिसे फिर कंपनी ने चुनौती दी। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक वीर कुमार जैन, वैभव जैन आदि ने तर्क देते हुए कहा सन 1946 से कंपनी इस जमीन की विधिवत मालिक है। इस पर नया अधिग्रहण एक्ट लागू नहीं होता है। रेलवे को भी जब इस जमीन के कुछ हिस्से की जरूरत थी तो कंपनी ने दी थी जिसका मुआवजा भी उसे दिया था। कलेक्टर का आदेश वैधानिक नहीं है। सिंगल बेंच द्वारा उक्त मामले में सुनवाई करते हुए कलेक्टर का आदेश निरस्त किया गया था। इसके विरूद्ध शासन द्वारा रीट अपील दायर की गई थी जिस पर जस्टिस पीके जायसवाल और वीरेन्दर सिंह की डिवीजन बेंच ने शासन द्वारा दायर की गई अपील को खारिज कर दिया।

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