मप्र को उप्र बनने से रोकने की कांग्रेसी जुगत

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मध्‍य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति इन दिनों भाजपा से मुकाबला करने में कम और पार्टी का मुख्यमंत्री दावेदार और नए अध्यक्ष का चेहरा पहचानने में अधिक केन्द्रित हो गई है। राष्ट्रीय स्तर के दो नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मप्र में सक्रियता तथा उन्हें पार्टी का चेहरा बनाने की अटकलें महीनों से चल रही हैं। इस बीच, प्रदेश अध्‍यक्ष अरुण यादव और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नई जुगलबंदी के साथ भाजपा सरकार के पोलखोल अभियान में जुट गए हैं। बीते दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद खिले-खिले नजर आए प्रदेश अध्यक्ष यादव ने सोमवार को हुई बैठक में साफ कर दिया है कि पार्टी के प्रादेशिक नेताओं को मुखिया परिवर्तन की अटकलों पर ध्यान देने की जगह संगठन चुनाव में जुट जाना चाहिए ताकि भाजपा के मुकाबले संगठन खड़ा किया जा सके। यादव की इस सार्वजनिक घोषणा के अपने निहितार्थ हैं, मगर दिल्ली  के सूत्र बताते हैं कि शीर्ष नेतृत्व लगातार मंथन कर रहा है कि मप्र को कैसे उप्र प्रदेश होने से रोका जाए। इस क्रम में अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जब पार्टी ऐसे निर्णय कर सकती है जिनके द्वारा सिंधिया की ऊर्जा और कमलनाथ के अनुभव से पार्टी को संवारा जा सके।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सोमवार का दिन यूं तो संगठनात्मक चुनाव की तैयारियों के लिए तय था, लेकिन प्रदेश निर्वाचन अधिकारी पवन बंसल की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष यादव ने जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों, प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों, विधायकों सहित अन्य नेताओं को साफ कर दिया कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने की खबरों में कोई दम नहीं है। अपनी बात को पुख्ता बनाने के लिए यादव ने राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी से भेंट का जिक्र किया। कांग्रेस नेताओं को संगठन चुनाव में जुट जाने की हिदायत देते हुए यादव ने कहा कि बदलाव की खबरें असल में भाजपा द्वारा फैलाई गई अफवाहें हैं। भाजपा चाहती है कि कांग्रेस कार्यकर्ता नेतृत्व की लड़ाई में ही खोए रहें।

यादव ने भले ही यह बात अपने संदर्भ में कही है लेकिन असल में कांग्रेस कार्यकर्ता नेतृत्व के मामले पर ही उलझे हैं। कांग्रेस हाईकमान भी समझ चुका है कि इस दिशा में जल्द फैसला नहीं लिया गया तो खेमों में बंटी कांग्रेस की हालत उत्‍तरप्रदेश जैसी हो जाएगी। सूत्र बताते हैं कि अन्य प्रदेशों में लिए गए निर्णयों की तर्ज पर मप्र में भी युवा ऊर्जा और अनुभव के समन्वय की जुगत भिड़ाई जाएगी। समन्वय की कई राहों पर विमर्श जारी है लेकिन सर्वमान्य राह नहीं निकल पा रही है। 2018 के चुनाव में यदि भाजपा को टक्कर देना है तो फैसला जल्द करना होगा। इसी दबाव को देखते हुए माना जा रहा है कि अगले हफ्ते तक कुछ अहम फैसला होगा।

इधर, भोपाल में हुई बैठक में निर्वाचन अधिकारी पूर्व मंत्री पवन बंसल ने प्रतिनिधियों से कहा कि पांच चरणों में होने वाले पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के एजेंडे को ध्यान में रखते हुए 15 जून तक बनाए गए सदस्यों की सूची का जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा 30 जून तक प्रकाशन करवाएं। पार्टी ने जिला व विकासखण्ड वार, प्रत्येक मतदान केंद्रवार 50 प्राथमिक सदस्य एवं 2 सुपात्र सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया है। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त एपीआरओ जितेन्द्र कंसाना एवं राजकुमार कटारिया, सेवादल के राष्ट्रीय संयोजक महेंद्र जोशी, प्रदेश के वरिष्ठ नेता रामेश्वर नीखरा भी मंचासीन थे।

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