‘मंत्रीजी,कृपया बैठ जाएं, यह क्या हो रहा है?’

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पुलिस गोलीकांड में किसानों की मौत, किसान आत्महत्या और मंत्री डॉ. नरोत्ताम मिश्रा को अयोग्य घोषित किए जाने के चुनाव आयोग के निर्णय पर विपक्ष के जैसे आक्रामक रुख का अनुमान लगाया जा रहा था, वैसा रुख विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष का भले ही न दिखा हो लेकिन सत्ता पक्ष भाजपा ने हमले करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दस बैठकों वाले मानसून सत्र के छठे दिन सोमवार को सत्ता पक्ष ने ही इतना हंगामा किया किया कि अध्य‍क्ष डॉ. सीतासरन शर्मा बार-बार कभी सख्त तो कभी नर्म अंदाज में उन्हें समझाते रहे। प्रश्नकाल में ऐसा भी मौका आया जब राज्यमंत्री लालसिंह आर्य के न बैठने तथा लगातार बोले जाने पर अध्यक्ष डॉ. शर्मा को कहना पड़ा कि ‘मंत्रीजी, कृपया बैठ जाएं, यह क्या हो रहा है?’ फिर भी जब बात नहीं बनी तो अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने वरिष्ठ मंत्रियों से अनुरोध किया कि वे सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य को बैठाएं। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दस मिनिट और 15 मिनिट के लिए दो बार स्थगित की गई। तीसरी बार भोजनावकाश के 5 मिनिट पहले ही कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा को अंदाजा था कि किसान मुद्दे पर कांग्रेस विधायक इस बार सदन में खासा हंगामा करेंगे इसलिए मुख्यमंत्री निवास पर हुई विधायक दल की बैठक में चुनिंदा मंत्रियों तथा विधायकों को संकेत दे दिए गए थे कि वे विपक्ष के आरोपों का उतनी ही आक्रामकता से जवाब दें। ऐसा हो भी रहा था लेकिन कांग्रेस ने बीते पांच दिनों में बहुत एकता के साथ हमला नहीं किया। इस बीच अशोकनगर में ट्रॉमा सेंटर का भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव द्वारा, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के तय कार्यक्रम के एक दिन पहले, उद्घाटन कर देने तथा सिंधिया द्वारा उद्घाटन के पहले ट्रॉमा सेंटर को गंगाजल से धोने के सांसद प्रतिनिधि (अब पार्टी से निष्कासित) के बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा को तो जैसे बैठे बिठाए कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया। उसने सदन के अंदर और सदन के बाहर कांग्रेस के वर्तमान में सबसे सक्रिय नेताओं में से एक ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा।
प्रश्नकाल आरंभ होते ही कांग्रेस विधायक सुंदरलाल तिवारी ने प्रश्नोत्तरी में जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम देखा तो उन्होंने इस पर आपत्ति लेते हुए सरकार से जानना चाहा कि नरोत्तम मिश्रा मंत्री हैं या नहीं? सदन की कार्यवाही चलने के पहले इस मामले को स्पष्ट कर देना चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने व्यवस्था देते हुए कहा कि ये प्रश्नकाल है और तिवारीजी चाहते हैं तो इस मामले पर शून्यकाल में चर्चा करा ली जाएगी। जहां तक नियम और कानून की बात है संविधान के आर्टिकल 164(4) को पढ़ लें पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इतने में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने अशोक नगर का मामला उठाते हुए कहा कि यहां पर एक ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन दलित नेता गोपीलाल जाटव ने किया तो सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उस ट्रॉमा सेंटर को गंगाजल से धुलवाकर उसे पवित्र कराने की कोशिश की। ये तो समूचे दलितों का अपमान है और इसकी पूरे सदन को निंदा करनी चाहिए। तभी वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार और सहकारिता राज्यी मंत्री विश्वास सारंग खड़े हो गए। जवाब में कांग्रेस के सदस्य भी खड़े हुए और दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगाने लगे। सदन में जोरदार हंगामा हुआ जिससे कार्यवाही में भारी व्यवधान खड़ा हो गया। कांग्रेस जहां नरोत्तम मामले में सदन में स्थिति स्पष्ट किए जाने को लेकर अड़ी थी वहीं सत्ता पक्ष और भाजपा के लोग दलितों का अपमान करने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया से माफी मांगने पर अड़े हुए थे। इस पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह खड़े हुए, उन्होंने कहा कि अभी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सदन में मौजूद थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि नरोत्तम मिश्रा का मामला उठ रहा है, वे पतली गली से निकल लिए। इस पर राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री का सीना चौड़ा है वे कभी मैदान नहीं छोड़ते हैं। अध्यक्ष सदस्यों को शांत करवाने का प्रयत्न करते रहे। अध्यक्ष ने निर्दलीय विधायक दिनेश राय मुनमुन को अपना प्रश्न पढ़ने को कहा लेकिन शोर शराबे में उनका प्रश्न् सुनाई नहीं दिया।
सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री आर्य बार-बार कहते रहे कि कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। वे उस समाज के प्रतिनिधि हैं। आर्य ने यहां तक कहा कि उन्हें ठेस पहुंची है। रात भर नींद नहीं आई। पूरे मप्र से फोन आ रहे हैं। विधायक रामेश्वर शर्मा भी आर्य के साथ बोलते रहे। अंत में अध्यक्ष ने वरिष्ठ मंत्रियों से आग्रह कर आर्य को शांत करवाया और प्रश्नकाल आरंभ करवाया। इस हंगामे के कारण प्रश्नकाल में केवल 10 प्रश्नों पर ही चर्चा हो सकी। इसके पहले शुक्रवार को भी अध्यक्ष ने प्रश्नकाल में व्यवधान पर चिंता जताई थी।

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