विधायक पूछें सवाल, मंत्रियों का एक ही जवाब- जानकारी एकत्रित की जा रही है

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बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक संदेश आया था कि कैसा हो कि सभी कर्मचारी ऑफिस आएं… आते ही शोर मचाने लगें.. फिर बॉस कहे कि ऑफिस 2 बजे तक बंद किया जाता है…। कर्मचारी बतियाते हुए बाहर निकल जाएं.. फिर दो बजे भी यही सब हो। आख़िरकार परेशान होकर बॉस कह दे कि अब ऑफिस कल खुलेगा। कर्मचारी हंसी ठिठोली करते हुए घर चले जाएं। लेकिन महीने के आखिर में सैलरी पूरी मिले। अजीब तो लगता है न? लेकिन हमारी संसद-विधानसभाओं में यही हो रहा है। विपक्ष सवाल पूछ रहा है और सरकार उनके जवाब खोज रही है। सत्र के सत्र हंगामे की भेंट चढ़ रहे हैं।
मप्र विधानसभा का मानसून सत्र तो हंगामे के बीच तय समय से दो दिन पहले खत्म हुआ ही, अंतिम दिन 50 से अधिक प्रश्नों के उत्त र में मंत्रियों ने जवाब दिए कि ‘जानकारी एकत्रित की जा रही है।‘ ये सवाल भी सांख्यिकी या आंकड़ों के जोड़-घटाव के नहीं बहुत सरल थे। मसलन, किसानों की फसलों के आकलन की आनावरी गणना करने का तरीका क्या पुराना है? सरकार द्वारा किस आधार पर आनावरी की जाती है? कृषकों की कृषि भूमि के दस्तावेज खसरा, बी -1 की नकल उपलब्धव कराए जाने की क्या व्यवस्था है? क्याव शासन द्वारा निजी कॉलेजों द्वारा छात्रों से वसूली जाने वाली फीस के निर्धारण के संबंध में कमेटी गठित कर दी गई है? भू-अधिग्रहण के संबंध में शासन के कौन-कौन से अधिनियम/ नियम/ परिपत्र प्रचलित और लागू हैं? या इंदौर में कितनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें संचालित हैं?
कितना आश्यर्च है कि सरकार को अपने ही नियमों की जानकारी नहीं है। उसे यह भी नहीं पता कि फीस कमेटी बनाई गई या नहीं? असल में, विभाग विधायकों को नियमों तथा प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों के जवाब भी नहीं देना चाहते, क्योंकि इनके पूरक प्रश्न सरकार को परेशानी में डालने वाले हैं। यही कारण है कि मानसून सत्र के आखिरी दिन राजस्व, खाद्य, गृह और तकनीकी शिक्षा विभाग से जुड़े प्रश्नों पर शासन ने एक पंक्ति में उत्तृर दिया कि प्रश्न (क) से (घ) तक जानकारी जुटाई जा रही है। इनमें सबसे अधिक 43 सवाल तेज तर्रार मंत्री उमाशंकर गुप्ता) के राजस्व विभाग के बारे में हैं। खाद्य विभाग के दस, गृह विभाग के दो और तकनीकी शिक्षा विभाग के दो सवालों पर जानकारी जुटाने का रटा-रटाया जवाब दिया गया है। अफसर जानकारी देने से बच रहे हैं क्योंकि ये खुलासे तंत्र की कमियों को उजागर करके रख देंगे।

//पिछले सत्र से जुटाई जा रही है जानकारी //
गंभीर प्रश्नों पर सरकार का एक पंक्ति का उत्तर एक सत्र की बात नहीं है। यह परंपरा तो कई सत्रों से चली आ रही है। अकसर अगले सत्र में इन प्रश्नों को भुला दिया जाता है लेकिन इस बार जब विधायकों ने मार्च 17 के शीतकालीन सत्र में दिए गए जवाब की स्थिति पूछी तो अफसरों ने दोहरा दिया कि जानकारी एकत्रित की जा रही है। ये सवाल भी विभागों की कार्यप्रणाली पर ही संदेह जताने वाले हैं। जैसे कि कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने प्रश्न 2976 में राजस्व मंत्री से शीतकालीन सत्र के अपने प्रश्न 4659 के जवाब पर पूछा था कि क्या ई गर्वनेंस तकनीक दुरुस्त कर ली है तथा पेमेंट गेट-वे ले लिया है, क्या सामान्य जनता को लॉगिन बना कर पेमेंट गेट-वे से नकल प्राप्त करने की सुविधा प्रारंभ कर दी गई है यदि नहीं तो क्यों? उन्हें जवाब मिला कि जानकारी एकत्रित की जा रही है। हर्ष यादव ने पूछा कि 20 मार्च 17 को चर्चा में मंत्री ने कस्टोडियन संपत्ति को मर्जर एग्रीमेंट में सम्मिलित किए जाने की जांच कराए जाने की बात कही थी, यह जांच किस अधिकारी द्वारा की गई तथा जांच में क्या तथ्य पाए गए? सुंदरलाल तिवारी ने पूछा कि 20 मार्च को प्रश्न 6276 में जानकारी एकत्रित करने का उत्तर दिया गया था, क्या जानकारी एकत्रित हो गई है?

//इन सवालों की जानकारी जुटा रही सरकार //
– क्या बंदोबस्त पश्चात नक्शे में रास्ता पगडंडी को विशेष रूप से दर्शाये जाने के नियम हैं?
मुकेश पंड्या, प्रश्न क्रमांक 1927
– क्या कृषकों की कृषि भूमि के दस्तावेज खसरा, बी -1 की नकल उपलब्ध कराए जाने की क्या व्यवस्था है? क्या विभाग द्वारा कम्‍प्‍यूटरीकृत खसरा, बी-1 दस्तावेज प्रतिवर्ष किसानों को नि:शुल्क वितरित किए जाने का प्रावधान है, यदि हां तो क्या उक्त दस्तावेज किसानों को ग्रामों में नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं?
अनिल फिरोजिया, प्रश्न क्रमांक 2028
– शहरी क्षेत्र में नजूल आबादी भूमि का नजूल नक्शा/नजूल खसरा/नजूल शीट तैयार करने के क्या नियम हैं? नियम की प्रति उपलब्ध/ करवाएं।
गिरीश भंडारी, प्रश्न क्रमांक 2500
– भू-अधिग्रहण के संबंध में शासन के कौन-कौन से अधिनियम/ नियम/ परिपत्र प्रचलित और लागू हैं और इनकी वैधानिकता क्यां है और किस आधार पर परिपत्रों की वैधानिकता अवैध मानी जाए, शासन सप्रमाण उत्तर दें।
कुंवर विक्रम सिंह, प्रश्ना क्रमांक 2973
– प्रदेश में राजस्व विभाग के कार्यालयों में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कितने पद रिक्त हैं?
अमर सिंह यादव, प्रश्न क्रमांक 2447

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