मंत्री बृजमोहन पर पत्नी के नाम वन विभाग की जमीन खरीदने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर राज्य के महासमुंद जिले में पत्नी के नाम वन विभाग की जमीन खरीदकर रिसोर्ट बनाने का आरोप है। राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वहीं मंत्री अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने नियमों का पालन करते हुए किसान से यह जमीन खरीदी है। जमीन खरीदी का यह मामला तब सामने आया जब महासमुंद जिले में किसान संघ के नेता ललित चंद्रनाहू ने इस मामले को लेकर सरकारी विभागों में शिकायत की।

चंद्रनाहू के मुताबिक जिले के जलकी गांव में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम पर वर्ष 2009 में 4.12 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई है। किसान मजदूर संघ के संयोजक चंद्रनाहू ने मंगलवार को बताया कि सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक अविभाजित मध्य प्रदेश में वर्ष 1994 में जलकी गांव निवासी विष्णु साहू और पांच अन्य ने 4.12 हेक्टेयर जमीन को जल संसाधन विभाग को दानपत्र के माध्यम से दान में दे दी थी। चंद्रनाहू ने बताया कि जिले में जल संसाधन विभाग ने सिंचाई परियोजना के दौरान डूब क्षेत्र के बदले 61.729 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया था। वन विभाग को हस्तांतरित जमीन में दान की गई 4.12 हेक्टेयर जमीन भी शामिल थी। बाद में इस जमीन पर वन विभाग ने पौधा रोपण का भी कार्य किया था। लेकिन उस भूमि के आधिपत्य की प्रविष्ठि पटवारी के राजस्व अभिलेख में नहीं कराया गया।

सरकारी दस्तावेज के मुताबिक जमीन का नामांतरण नहीं कराया गया। यह जमीन किसान साहू और अन्य दानदाताओं के नाम पर ही थी। वर्ष 2009 में इस जमीन को मंत्री अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल को बेच दी गई। ऐतिहासिक स्थल सिरपुर के करीब इस जमीन पर अग्रवाल के परिजनों द्वारा रिसोर्ट का ​निर्माण कराया जा रहा है। चंद्रनाहू ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पिछले वर्ष महासमुंद जिले के कलेक्टर से मामले की शिकायत की थी। महासमुंद जिले के कलेक्टर ​ने मामले पर सुझाव के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।

कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता ने बताया कि इस मामले पर अपना सुझाव देने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में वन मंडल अधिकारी, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता और राजस्व विभाग के अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं। समिति ने इस मामले को लेकर पिछले महीने ही बैठक की थी। गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच पहले ही की जा चुकी है। जांच के मुताबिक किसान ने जमीन को दान में दिया था, लेकिन इसका नामांतरण नहीं हो पाया था।

इधर, राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने यहां संवाददाताओं से हुई बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले की राष्ट्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मंत्री अग्रवाल से इस्तीफे की भी मांग की।

वहीं राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है। अग्रवाल ने कहा कि किसान से यह जमीन राजस्व विभाग के दस्तावेजों के आधार पर नियमों के तहत खरीदी गई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बीते विधानसभा चुनाव में अपने शपथपत्र में पत्नी के नाम इस जमीन के होने की जानकारी भी दी थी। मंत्री ने कहा कि जमीन की खरीदी में उनकी ओर से कोई भी गलती नहीं की गई है। यदि इस मामले में जो भी गलती हुई है वह किसान की ओर से ही हुई है।

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