नगर भ्रमण पर निकले भगवान महाकाल, पांच रूपों में दिए दर्शन

उज्जैन। राजाधिराज भगवान महाकाल श्रावण माह के पांचवे और अंतिम सोमवार की शाम अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकाल ने अपनी प्रजा को पांचवी सवारी में पांच रूपों में दर्शन दिये। सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन करने के बाद निर्धारित समय से भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। सभामंडप में पूजा-अर्चना के अवसर पर विधायक डॉ. मोहन यादव, म.प्र. जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डे, जिला पंचायत के अध्यक्ष महेश परमार, गृह विभाग के सचिव केदार शर्मा, डीआईजी डॉ. रमणसिंह सिकरवार, कलेक्टर संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर आदि उपस्थित रहे।

पांचवी सवारी में रजतजडित पालकी में भगवान चन्द्रमौलेश्वर विराजित थे और पालकी के पीछे हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिव तांडव की प्रतिमा और नंदी रथ पर उमामहेश तथा डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखौटा विराजित था। इस प्रकार पांचवी सवारी में भगवान महाकाल ने पांच रूपों में अपने भक्तों को दर्शन दिये। भगवान महाकाल की अब छटवी सवारी भादो मास में सोमवार 14 अगस्त को निकलेगी तथा अंतिम शाही सवारी सोमवार 21 अगस्त को नगर भ्रमण पर राजसी ठाट-बाट के साथ निकलेगी।

महाकाल मंदिर से जैसे ही पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, वैसे ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा सलामी दी गई। पालकी के आगे घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकड़ियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थीं। राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी में हजारों भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए तथा विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे। सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमौलेश्वर के दर्शन के लिए खड़े थे। जैसे ही पालकी उनके सामने से निकली वैसे ही भगवान के गुणगान एवं पुष्प वर्षा करते हुए श्रद्धालुओं ने भगवान जयकारा किया।

महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची, जहां शिप्रा के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। रामघाट पर पूजा-अर्चना के बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए पुन: महाकाल मंदिर को रवाना हुई। सवारी के साथ विधायक डॉ.मोहन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष महेश परमार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भरत पोरवाल, जिला पंचायत सदस्य करण कुमारिया सहित जन प्रतिनिधि, समाजसेवी, धर्मपरायण जनता चल रहे थे और भगवान महाकाल के गुणगान करते हुए शिवमय हो रहे थे।

कलेक्टर संकेत भोंडवे एवं पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर सवारी मार्ग में व्यवस्थाओं पर पूर्ण रूप से निगरानी रख रहे थे और अपने मातहत अधिकारियों को व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी साथ में दे रहे थे। भगवान महाकाल की पांचवी सवारी में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की शानदार व्यवस्था की श्रद्धालुओं के द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।

रामघाट पर हुआ भगवान चंद्रमौलेश्वर का जलाभिषेक

 श्रावण मास के पांचवें सोमवार को देर शाम भगवान महाकालेश्वर की सवारी बैण्ड-बाजों, हाथी-घोड़ों एवं कड़ाबीन के धमाके के साथ रामघाट पहुंची। रामघाट पर मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का जलाभिषेक व पूजन हुआ। पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में विराजित थे। शिप्रा तट पर विधि-विधान से पूजन एवं अर्चन पुरोहितों के दल द्वारा करवाया गया।

भगवान महाकालेश्वर की पालकी के दर्शन करने के लिए रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट, रामानुकोट से रामघाट तक हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से खड़े थे। जैसे ही पालकी घाट पर पहुंची, ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से घाट गुंजायमान हो गया। श्रद्धालुओं के जयकारे के साथ ही पुलिस बैण्ड द्वारा मधुर धुनों की प्रस्तुति से आमजन भावविभोर थे। रामघाट पर विश्राम देकर पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन कर पुरोहितों द्वारा आरती-वन्दना की गई।

रामघाट पर सुरक्षा एवं प्रशासन के व्यापक इंतजाम किये गये थे। श्रद्धालुओं को सुगमता से पालकी के दर्शन हो सके, इस हेतु पुख्ता बैरिकेडिंग की गई थी। सवारी मार्ग एवं रामघाट पर पुलिस द्वारा पर्याप्त संख्या में बल लगाकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। होमगार्ड द्वारा निरन्तर शिप्रा नदी में बोट द्वारा पेट्रोलिंग करते हुए किसी भी आकस्मिक घटना को रोकने का कार्य मुस्तैदी के साथ किया गया।

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