पहली बार कांग्रेसियों ने लगाए ज्योतिरादित्य मुर्दाबाद के नारे

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में भाजपा के डेढ़ दशक के एकाधिकार को चुनौती देने भिंड के लहार से शुरू हुए कांग्रेस के एकता मिशन को एक माह के अंदर ग्वालियर में ही चुनौती मिल गई है। लहार में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ समेत सभी दिग्गजों ने ज्योतिरादित्य को प्रदेश में मिशन 2018 की बागडोर सौंपने के लिए सहमति जताई थी। इसके उलट, ग्वालियर में संगठन चुनावों के लिए रविवार को हुई बैठक में सेंट्रल ऑब्जर्वर के सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।

कांग्रेस में बड़े नेता आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी को एकता के सूत्र में बांधने के लिए कोशिशों में जुटे हैं, जबकि ग्वालियर के जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित डीसीसी की बैठक के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह गुट के नेता आपस में भिड़ गए और एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। खास बात यह रही की ग्वालियर की डीसीसी में पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ नारेबाजी की गई।

दरअसल, अलवर से पूर्व विधायक रमेश खींची को ग्वालियर कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों के लिए ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था। उनके निर्देश पर रविवार को दोपहर में जिला कांग्रेस कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल स्वागत भाषण देने के उठे और उन्होंने ऑब्जर्वर रमेश खीची से आग्रह किया कि ग्वालियर के संगठनात्मक चुनावों के लिए एक लाइन में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अधिकृत किया जाए। रमेश अग्रवाल वासुदेव शर्मा और ब्रज मोहन सिंह परिहार ने कहा कि जब कांग्रेस लोकतंत्र की तरफ बढ़ रही है तब इस तरह इकतरफा चुनाव की बात क्यों हो रही है।

बैठक में मौजूद दिग्विजय गुट के बृजमोहन परिहार, वासुदेव शर्मा और वीर सिंह सारे संगठन पदाधिकारी नियुक्तियों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को एकाधिकार दिए जाने का विरोध किया। इस पर सिंधिया समर्थकों ने ज्योतिरादित्य के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी, जवाब में दिग्विजय गुट के नेताओं ने भी सिंधिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ऑब्जर्वर जिलाध्यक्ष के कमरे में पहुंच गए उनके पीछे-पीछे सिंधिया गुट और दिग्गी गुट के नेता भी नारेबाजी करते हुए कमरे में पहुंचे और एक बार फिर से भिड़ गए। बृजमोहन परिहार ने आरोप लगाया कि जब पार्टी ने ऑब्जर्वर को रायशुमारी के लिए भेजा गया है तो फिर एक लाइन में सिंधिया को अधिकृत करने की बात क्यों कही जा रही है। उन्होंने डीसीसी की बैठक को भी अवैध बत कहा कि बैठक को नियमानुसार नहीं बुलाया गया है और जिलाध्यक्ष की अनुपस्थिति में जिला उपाध्यक्ष को बैठक की अध्यक्षता करने की अनुमति दी जाए।

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