शहरी निकाय चुनाव में वामो और कांग्रेस का सफाया, भाजपा की जगी उम्मीदें

कोलकाता। राज्य के सात शहरी निकायों के लिये व्यापक छापेमारी व हिंसा के बीच हुए चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने धमाकेदार जीत दर्ज की है। इस चुनाव में वाम-मोर्चा और कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने उन जगहों पर भी सीटें हासिल की हैं जहां उसे खुद भी उम्मीद नहीं थी।

चुनाव नतीजों ने संकेत दे दिया है कि राज्य में भाजपा दूसरे विकल्प के तौर उभर रही है। इन चुनावों में शानदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए बीजेपी नंबर दो पर रही। राज्य में एक तरह से मुख्य विपक्षी की भूमिका में आने वाली बीजेपी के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। उल्लेखनीय है कि राज्य के सात निकायों के लिए 13 अगस्त को चुनाव हुए थे। इनमें से पांच नगर निगम हैं। पूर्व मिदनापुर जिले के पांशकुड़ा और हल्दिया, बीरभूम जिले में नलहाटी, दक्षिण दिनाजपुर में बुनियादपुर और जलपाईगुड़ी जिले में धूपगुड़ी।

इनके अलावा, बर्धमान (पश्चिम) जिले के दुर्गापुर नगरपालिका परिषद और नदिया में एक अधिसूचित निकाय कूपर्स कैंप में मतदान हुए थे जिसमें हिंसा भी जमकर हुई थी। दुर्गापुर में तृणमूल ने सभी 43 वॉर्डों पर कब्जा किया, लेकिन भाजपा प्राय: अधिकतर वॉर्ड में दूसरे नंबर पर रही। बुनियादपुर में 14 में से 13 पर तृणमूल जीती, जबकि एक वॉर्ड पर बीजेपी का कब्जा रहा।
धूपगुड़ी में तृणमूल ने 14 सीटों पर कब्जा किया, बीजेपी के चार उम्मीदवार यहां भी जीत गए। पांशकुड़ा में 18 में से 17 वॉर्ड पर तृणमूल का पताका लहराया, जबकि बाकी की एक सीट बीजेपी ने अपने कब्जे में किया। हल्दिया के सभी 29 और कूपर्स कैंप के 12 वॉर्डों में तृणमूल उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

इस बारे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पूछने पर कहा कि जिस तरह से वोट लूटे गए थे, उससे साफ था कि चुनाव के नाम पर दिखावा हुआ है और असल में राज्य प्रशासन की मिली भगत में हिंसा के बल पर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लूटा गया, लेकिन बावजूद इसके जिस तरह से भाजपा को वोट मिले हैं वह तृणमूल के पतन का संकेत है। लोगों ने इन्हें सत्ता से हटाने का मन बना लिया है।

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