शिव की रौनक निखरी, विजेश का रंग हुआ गाढ़ा 

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भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह के बहुचर्चित तीन दिवसीय मप्र प्रवास रविवार को खत्‍म हुआ। समूची भाजपा में ‘चले गए कोतवाल अब डर काहे का’ सा भाव उत्‍पन्‍न है। एक बड़े अभ्‍यास के बाद मिली राहत के क्षण। इन तीन दिनों में जो घटा अब उसके आकलन, समीक्षा और प्रतिक्रियाओं का समय है। कार्य का ढर्रा बदलेगा, कुछ निर्णय होंगे, कुछ बातें हर बार की तरह बिसरा दी जाएंगी। मगर, शाह की भोपाल यात्रा के बाद भाजपा के इंद्रधनुष के कुछ रंग गाढ़े हुए हैं और कुछ की चमक मंद हुई है। ये वे नाम हैं जो सीधे-सीधे इन तीनों में मंच पर और मंच से परे सक्रिय रहे। शाह की यात्रा के ‘फल’ इन्‍हीं की झोली में गिरना है।

अमित शाह के आने की चकाचौंध इतनी थी कि मुख्‍यमंत्री के अलावा सारे चेहरे उस चकाचौंध में एक जैसे दिखाई दे रहे थे। शाह के ताप से कितने चेहरे झुलसे और कितने चेहरों पर फफोले पड़े हैं यह तो भविष्‍य में ही पता चलेगा लेकिन लगता है कि मुख्‍यमंत्री इस चकाचौंध से नई चमक के साथ बाहर निकल आए हैं। उनकी स्‍थाई रौनक बकरार है। न केवल सावर्जनिक रूप से बल्कि अंदरूनी बैठकों में भी शाह का स्‍वर उनकी सरकार को लेकर नहीं बल्कि व्‍यक्तियों को लेकर सख्‍त रहा। वे केवल अफसरशाही हावी होने के मुद्दे पर घिरते नजर आए। विरोधी भी उन्‍हें उनके इस ‘कोमल’ बर्ताव के कारण निशाना बनाते रहे हैं लेकिन समग्रता में शाह शिव ‘राज’ से वैसे असंतुष्‍ट नहीं दिखाई दिए जैसे अन्‍य के साथ पेश आए।

भाजपा अध्‍यक्ष अपने इस दौरे में पूरी तरह स्‍पष्‍ट विचारों के साथ नजर आए। उनके दौरे के पहले मंत्री डॉ नरोत्‍तम मिश्र को लेकर कई तरह की चर्चाएं थी लेकिन शाह ने उनके निवास पर जा कर साफ संदेश दिया है। इससे डॉ मिश्र का कद बढ़ा ही है। शाह के साथ ने उनका आत्‍मविश्‍वास बढ़ाया ही है। ऐसा ही एक संदेश शाह के आगमन के ठीक पहले संघ के महाकौशल प्रांत में संगठन मंत्री अतुल राय को प्रदेश में सह संगठन मंत्री का दायित्‍व दिया गया। वे संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ काम करेंगे। महाकौशल प्रांत में नियुक्ति पर राय का विरोध हुआ था लेकिन उनका दायित्‍व बढ़ाया गया है। शाह ने बैठकों में साफ-साफ कहा है कि चुनाव हर हाल में जीतना है। अतुल राय की कार्यशैली पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के समान है। इसलिए, जहां मेनन दिल्‍ली में रह कर शाह के वांछित कार्यों को अंजाम दे रहे हैं वहीं अब भगत के ‘कमजोर’ माने जाने वाले मोर्चा को मजबूत करने का काम राय करेंगे।

संगठन मुखिया होने के कारण स्‍वाभाविक था कि प्रदेश अध्‍यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यप्रणाली और कार्यकाल पर खूब चर्चा, आलोचना, समीक्षा हुई। समन्‍वय के मुद्दों से के साथ नियुक्तियों में देरी व लचीले रूख पर शाह की तल्‍ख टिप्‍पणियां हुई। इन तीन दिनों में शाह ने कई लक्ष्‍य दिए हैं। कई सुधार आवश्‍यक बताए हैं। कई हिदायतें दी हैं। उन सभी को पालन करने वाले चुनिंदा लोगों में से प्रमुख नाम नंदकुमार चौहान है। अत: आने वाला समय उनके लिए जरूर थोड़ी मुश्किल होगा।

इन सारे नामों में एक नाम ऐसा भी है जो मंच पर नहीं दिखा लेकिन नैपथ्‍य में रह कर उसने अपना रंग अधिक गहरा कर लिया। यह नाम है प्रदेश उपाध्‍यक्ष विजेश लूनावत। लूनावत के पास वीआईपी अतिथियों के आगमन तथा आयोजन का प्रभार है। उनके वर्तमान कार्यकाल में शाह की तीन दिनी यात्रा सबसे बड़ा आयोजन है जो बिना किसी बाधा के सरस ढंग से संचालित हुआ। सभी जानते हैं कि लूनावट पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री अनिल माधव दवे की टीम का प्रमुख चेहरा रहे हैं। दवे बड़े आयोजनों को सरलता से रच देने तथा चुनाव प्रबंधन के कुशल रणनीतिकार रहे हैं। लूनावत ने उतनी ही सहजता से इस आयोजन को सम्‍पन्‍न करवाया। रही बात चुनाव प्रबंधन की तो प्रदेश में करीब पिछले तेरह सालों से चुनाव प्रबंधन कर रहे दवे के रहने के बाद भाजपा ने अपनी नई चुनाव प्रबंधन टीम बनाई है। इस टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष लूनावत को शामिल किया गया है। साफ है कि लूनावत के कंधों पर अधिक बड़ा दायित्‍व आया है।

ये सारे नाम भाजपा की भविष्‍य की राजनीति के प्रमुख चेहरे होंगे जो मिशन 2018 ही नहीं लोकसभा चुनाव 2019 में भी शाह की व्‍यूह रचना को अंजाम देंगे। अगले दो साल इन्‍हीं के लिए बड़ी चुनौती है।

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