कपास व सोयाबीन की फसलों पर इल्लियों का प्रकोप

बाग/धार। बाग क्षेत्र में कम बारिश के चलते सोयाबीन व कपास की फसलों पर इल्ली व सफेद मच्छरों का प्रकोप निरंतर बढ़ता जा रहा है। इल्लियों की रोकथाम के लिए किसानों द्वारा प्रयोग की जा रही कीटनाशक दवाएं भी असरदार साबित नहीं हो पा रही है। फलस्वरूप फसलें लगातार कमजोर पड़ती जा रही है।

बारिश की खेच के कारण संतोषजनक उत्पादकता नहीं होने का अंदेशा तो था ही उस पर फसलों की बीमारी से परेशान किसानों का पैसा कीटनाशक दवाइयों में जा रहा है। इसके बावजूद फसलों पर इल्लियों के प्रकोप को समूल नष्ट किए जाने में सफलता नहीं मिल पा रही है। सोयाबीन की तुलना में कपास व उड़द की फसलों पर इल्लियों का प्रकोप भयंकर रुप धारण करता जा रहा है। जिसका कारण यह बताया जा रहा है कि गत सप्ताह से काफी गर्मी पड़ने से इल्लियों का प्रकोप बड़ा।

क्षेत्र में फसलों पर इल्लियों एवं सफेद मच्छरों के प्रकोप की यही स्थिति रही तो सोयाबीन, कपास, उड़द आदि फसलों की उत्पादकता में 25 से 30 प्रतिशत गिरावट होने की आशंका बलवती हो रही है। वर्तमान में प्रमुख खरीफ फसलों में बाग क्षेत्र में करीब 9500 हैक्टर में सोयाबीन तथा 3100 हेक्टर में कपास 5500 हेक्टर में मक्का की बोवनी करने का आनुमान है बाग के कृषि विस्तार अधिकारी जीएस ठाकुर ने बताया कि फसलों की स्थिति इल्लियों के प्रकोप पर सतत निगरानी रखे हुए हैं। सोयाबीन पर इल्लियों का प्रकोप कम है परंतु 1 सप्ताह से कपास की फसलों पर अधिक गर्मी की वजह से प्रकोप बढ़ा है, इस स्थिति में इल्लियों की चपेट में आए खेतों में उत्पादकता में निश्चित रूप से गिरावट आना है।

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