चलित दूरभाष ने की चिट्ठियों की छुट्टी, आज भी टंगे हैं अंग्रेज कालीन बॉक्स

मथेला/खंडवा। राजा महाराजाओं के समय कबूतरों के द्वारा पत्रों का आदान-प्रदान किया जाता था। फिर आई डाक सेवा जिसने लंबे समय तक अपनी सेवाएं देकर संचार के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया, इसके बाद तार, कोरियर, स्पीड पोस्ट के बाद फिर धमाका किया स्मार्ट फोन ने। जिसने डाक सेवा में पत्रों के आदान-प्रदान को लगभग समाप्त कर दिया और अब वह सिर्फ दास्तां बन कर रह गई।

डाक सेवा में लगभग 40 वर्षों से सेवा दे चुके, हेडमैन पद से आठ वर्ष पूर्व रिटायर हुए मथेला निवासी नत्थू कुवंर यादव पुराने दिनों की याद ताजा करते हुए बताते हैं कि एक समय था जब श्रीराम मंदिर के पास टंगा लेटर बाक्स डॉग सामग्री से फुल हो जाता था। इसके अलावा लोग मेरे घर तक भी भेजे जाने वाले पत्र रख जाते थे। रक्षाबंधन पर राखी के लिफाफे हो या मनी आर्डर प्रचुर मात्रा में लेटर बाक्स से जाते थे। जैसे-जैसे समय बदला पत्रों के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी पिछड़ती गई और जब स्मार्ट फोन ने संचार के क्षेत्र में दस्तक दी तो पत्रों की आवक जावक जीरो हो गई, लेकिन आज भी श्रीराम मंदिर के पास सन 1979 से टंगा लैटर बाक्स पुराने दिनों की याद ताजा करता है।

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